बिहार के थानों में लागू होगा किशनगंज एसपी का मॉडल, थानों के मालखानों पर कंप्युटर सॉफ्टवेयर रखेगा नजर

किशगंज के पुलिस अधीक्षक इनामुल हक मेंगनू बताते हैं कि पुलिस द्वारा जब्त सामान को नियमानुसार नीलाम करने पर जो धनराशि प्राप्त होती है, उसे सरकारी खजाने में जमा कराया जाता है. जिस संपत्ति का मालिक नहीं मिलता वह सरकार की हो जाती है.
बिहार पुलिस अब किशनगंज के पुलिस अधीक्षक इनामुल हक मेंगनू के मॉडल को अपनाकर थानों को कबाड़ से मुक्त करने के साथ ही सरकारी खजाना भी भरेगी. मालखाना को अप टू डेट रखने के लिए 2012 बैच के आइपीएस मेंगनू द्वारा विकसित की गयी व्यवस्था से राज्य सरकार को करीब 200 करोड़ रुपये की आमदनी होने का भी अनुमान है. इसके लिए राज्य स्तर पर ई-मालखाना साफ्टवेयर भी विकसित किया जा रहा है.
थानों में वर्षों से जब्त वाहन हो रहे बर्बाद
थानों में विभिन्न मामलों में जब्त वाहन और सामान कई सालों से कबाड़ हो रहे हैं. खुले में रखी करोड़ों रुपये की यह संपत्ति बर्बाद हो रही है. किशनगंज के थानों में भी यही स्थिति थी. जिले के सभी थानों के परिसर अटे पड़े थे. पुलिस अधीक्षक इनामुल हक मेंगनू ने इससे निपटने के लिए ऐसी प्रणाली विकसित की कि पुलिस महानिदेशक ने उसे पूरे राज्य में लागू करने के लिए सभी पुलिस पदाधिकारियों को निर्देश दिये.
400 वाहनों की अगले सप्ताह नीलामी
इनामुल हक मेंगनू ने किशनगंज पुलिस के मालखाना में जितनी भी गाडियां- सामान थे, उसके सभी अभिलेख का मिलान कराया. ब्यौरा साॅफ्टवेयर में अपलोड कराया. जिस सामान-गाड़ी का कोई स्वामी नहीं मिला, उसकी अलग से लिस्ट तैयार करायी. लिस्ट को अखबार में प्रकाशित कराया. जब्त 900 वाहनों में 150 वाहन को रिलीज कर दिया गया. 400 वाहनों की अगले सप्ताह नीलामी होने जा रही है.
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नीलामी से प्राप्त राशि जाती है सरकारी खजाने में
जम्मू-कश्मीर के मूल निवासी इनामुल हक मेंगनू बताते हैं पुलिस द्वारा जब्त सामान को नियमानुसार नीलाम करने पर जो धनराशि प्राप्त होती है, उसे सरकारी खजाने में जमा कराया जाता है. जिस संपत्ति का मालिक नहीं मिलता वह सरकार की हो जाती है. भविष्य में कोई व्यक्ति यह दावा करता है कि नीलाम किया गया वाहन अथवा सामान उसका था और कोर्ट में भी वह साबित कर देता है तो नीलामी से प्राप्त राशि उसे दे दी जायेगी.
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