सिर्फ पढ़ाई नहीं अब साख की लड़ाई, पटना के दो शिक्षकों के बीच की जंग का पूरा सच क्या?
Published by : Paritosh Shahi Updated At : 05 Jun 2026 6:25 PM
खान सर और रोशन सर की तस्वीर
Khan Sir vs Roshan Anand: बिहार की राजधानी पटना में दो बेहद मशहूर कोचिंग सेंटर्स के बीच की आपसी होड़ अब एक खतरनाक मोड़ ले चुकी है. खान सर और ज्ञान बिंदु एकेडमी के संचालक रौशन आनंद के बीच का यह विवाद सिर्फ कोचिंग चलाने और ज्यादा से बात बच्चों को लुभाने तक सीमित नहीं रहा. अब इस पूरे मामले में छात्र, पुलिस प्रशासन, जेल और सोशल मीडिया का वार-पलटवार सब कुछ शामिल हो चुका है.
Khan Sir vs Roshan Anand: पटना में सरकारी नौकरी की तैयारी कराने वाले दो सबसे बड़े नाम हैं. इनमें से एक खान सर हैं, जो अपने सरल, ठेठ और अनोखे अंदाज में पढ़ाने के लिए लाखों छात्र-छात्राओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं. उनके चाहने वाले सिर्फ बिहार ही नहीं बल्कि पूरे देश में मौजूद हैं. दूसरी तरफ ज्ञान बिंदु एकेडमी है, जिसे रौशन आनंद चलाते हैं. उन्होंने भी अपनी बेहतरीन ऑनलाइन क्लासेस और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दम पर बहुत कम समय में छात्रों का एक बहुत बड़ा आधार तैयार किया है. चूंकि दोनों ही संस्थान एक ही तरह के प्रतियोगी छात्रों को पढ़ाते हैं, इसलिए इनके बीच अंदरूनी खींचतान काफी समय से चल रही थी.
खान सर के सेंटर पर हमला और रौशन आनंद की जेल यात्रा
यह पूरा मामला तब अचानक चर्चा में आया जब कुछ दिनों पहले पटना में खान सर के कोचिंग सेंटर के बाहर भारी हंगामा हो गया. पुलिस के आधिकारिक बयानों के मुताबिक कुछ अज्ञात असामाजिक तत्व वहां पहुंचे और उन्होंने कोचिंग के मेन गेट पर जमकर बवाल काटा.
इस दौरान वहां सुरक्षा में तैनात सिक्योरिटी गार्ड पर जानलेवा हमला किया गया, जिससे उसे बेहद गंभीर चोटें आईं. पटना पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत कार्रवाई की और इस हमले के पीछे मुख्य साजिशकर्ता बताते हुए ज्ञान बिंदु के डायरेक्टर रौशन आनंद और उनके कुछ अन्य साथियों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया.
गिरफ्तारी के बाद पटना में छात्रों का भारी प्रदर्शन
जैसे ही रौशन आनंद की गिरफ्तारी की खबर आई, वैसे ही दोनों कोचिंग संस्थानों के छात्र सोशल मीडिया पर एक-दूसरे के खिलाफ आमने-सामने आ गए. इंटरनेट पर खान सर के समर्थकों और ज्ञान बिंदु एकेडमी के सपोर्टर्स के बीच वीडियो और पोस्ट डालने की होड़ मच गई. इससे माहौल और ज्यादा गरमा गया. यह विवाद सिर्फ सोशल मीडिया तक ही सीमित नहीं रहा. गुरुवार को ज्ञान बिंदु एकेडमी से जुड़े सैकड़ों छात्र-छात्राएं रौशन आनंद की रिहाई की मांग को लेकर पटना की सड़कों पर उतर आए.
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का सीधा आरोप था कि पुलिस प्रशासन ने इस मामले में एकतरफा कार्रवाई की है और पूरे मामले की जांच पूरी तरह पक्षपातपूर्ण तरीके से की जा रही है. प्रदर्शनकारी छात्रों ने यह मांग भी उठाई कि इस पूरे बवाल के लिए खान सर के खिलाफ भी सख्त कानूनी कदम उठाए जाने चाहिए. इस बड़े प्रदर्शन के दौरान पटना पुलिस की तरफ से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे ताकि किसी भी तरह की हिंसक परिस्थिति को संभाला जा सके.
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क्यों भड़क रही है आग
यह घटना सिर्फ दो कोचिंग सेंटरों की मामूली लड़ाई नहीं है, बल्कि यह एक बहुत बड़े बदलाव की ओर इशारा करती है. आज के दौर में कोचिंग चलाने वाले ये शिक्षक सिर्फ पढ़ाने वाले टीचर नहीं रह गए हैं, बल्कि वे बहुत बड़े पब्लिक फिगर और सेलिब्रिटी बन चुके हैं. सोशल मीडिया पर उनके लाखों-करोड़ों फॉलोअर्स हैं. इसके कारण छात्र उनके साथ पूरी तरह से भावनात्मक रूप से जुड़ जाते हैं. यही मुख्य वजह है कि जब भी इन शिक्षकों के बीच कोई व्यक्तिगत या कारोबारी विवाद होता है, तो छात्र पढ़ाई छोड़कर सड़कों पर उतर आते हैं और कानून-व्यवस्था के लिए एक बड़ा संकट खड़ा हो जाता है.
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By Paritosh Shahi
परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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