अनंत सिंह की मांग- बिहार में शराब चालू हो, दिलीप जायसवाल बोले- बोलने से पहले शराबबंदी के फायदे भी बताने चाहिए

Updated at : 01 Apr 2026 9:56 PM (IST)
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anant singh on dilip jaiswal

अनंत सिंह और दिलीप जायसवाल की फाइल फोटो

Anant Singh On Liquor Ban: बिहार में शराबबंदी को लेकर एक बार फिर सियासत गरमा गई है. जेडीयू विधायक अनंत सिंह ने शराबबंदी खत्म करने की मांग की है. जिस पर मंत्री दिलीप जायसवाल ने प्रतिक्रिया देते हुए संतुलित बहस की नसीहत दी है.

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Anant Singh On Liquor Ban: बिहार में शराबबंदी को लेकर एक बार फिर सियासी बहस तेज हो गई है. मोकामा से जेडीयू विधायक अनंत सिंह द्वारा शराबबंदी खत्म करने की मांग उठाए जाने के बाद अब नीतीश सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने उन्हें नसीहत दी है. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर बोलने से पहले शराबबंदी के सकारात्मक पहलुओं पर भी चर्चा होनी चाहिए.

अनंत सिंह के बयान से बढ़ी सियासी हलचल

जेल से जमानत पर बाहर आने के बाद अनंत सिंह लगातार अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में हैं. हाल ही में उन्होंने कहा था कि बिहार में शराबबंदी अपने उद्देश्य में सफल नहीं हुई है. उन्होंने तर्क दिया कि राज्य में आज भी शराब की खपत जारी है और तस्करी बढ़ गई है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि शराबबंदी के बाद सूखे नशे का चलन तेजी से बढ़ा है.

मंत्री दिलीप जायसवाल की सख्त प्रतिक्रिया

इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल ने बिना नाम लिए कहा कि किसी भी नेता को इस मुद्दे पर बोलने से पहले शराबबंदी के फायदे भी बताने चाहिए. उन्होंने कहा कि शराबबंदी और सूखे नशे को एक नजर से नहीं देखा जा सकता. उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन समाधान और संतुलित चर्चा भी जरूरी है.

‘अच्छाई और बुराई दोनों पर हो चर्चा’

जायसवाल ने कहा कि शराबबंदी को लेकर केवल आलोचना ही नहीं, बल्कि इसके अच्छे प्रभावों पर भी विचार करना चाहिए. उन्होंने जोर देकर कहा कि बहस संतुलित होनी चाहिए, ताकि सही दिशा में निर्णय लिया जा सके.

2016 से लागू है पूर्ण शराबबंदी

बिहार में साल 2016 से पूर्ण शराबबंदी लागू है. इसके तहत राज्य में शराब के निर्माण, बिक्री और सेवन पर पूरी तरह प्रतिबंध है. इस कानून का उद्देश्य समाज में सुधार और अपराधों में कमी लाना था.

तस्करी और सूखे नशे पर चिंता

हालांकि, शराबबंदी के बाद राज्य में अवैध शराब के धंधे और पड़ोसी राज्यों व नेपाल से तस्करी बढ़ने की बात सामने आती रही है. वहीं, शराब नहीं मिलने के कारण सूखे नशे का प्रचलन भी बढ़ा है, खासकर युवाओं के बीच, जो चिंता का विषय बन गया है.

पहले भी उठ चुकी है समीक्षा की मांग

यह पहली बार नहीं है जब शराबबंदी पर सवाल उठे हैं. विधानसभा के पिछले बजट सत्र में भी विपक्ष के साथ-साथ कुछ सत्तापक्ष के विधायकों ने इस कानून की समीक्षा की मांग की थी. हालांकि, सरकार ने साफ कर दिया था कि फिलहाल शराबबंदी खत्म करने का कोई इरादा नहीं है.

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Abhinandan Pandey

लेखक के बारे में

By Abhinandan Pandey

अभिनंदन पांडेय डिजिटल माध्यम में पिछले 2 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर तक का मुकाम तय किए हैं. अभी डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास करते हैं. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखते हैं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.

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