जब फटे कुर्ते में मीटिंग करने पहुंचे बिहार के मुख्यमंत्री, चंद्रशेखर ने चंदा मांगकर सिलवाया नया जोड़ा

Published by : Paritosh Shahi Updated At : 16 Feb 2026 2:51 PM

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बिहार के पूर्व सीएम कर्पूरी ठाकुर

Karpoori Thakur: भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर ऐसे ईमानदार शख्स थे जिनके पास दो बार मुख्यमंत्री रहने के बाद भी न अपना घर था और न तन पर साबुत कुर्ता. 17 फरवरी को उनकी पुण्यतिथि है. राजनीति में ईमानदारी और सादगी के शिखर पुरुष रहे कर्पूरी जी ने सिखाया कि सत्ता सुख भोगने का नहीं, सेवा का साधन है.

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Karpoori Thakur: आज के दौर में जहां छोटे-से पद पर आते ही लोगों की लाइफस्टाइल बदल जाती है, वहां कर्पूरी ठाकुर एक अजूबा लगते हैं. बिहार के दो-दो बार मुख्यमंत्री रहे इस शख्स ने पूरी जिंदगी रिक्शे की सवारी की और किराए के मकान या सरकारी आवास में वक्त गुजारा. कल यानी 17 फरवरी को उनकी पुण्यतिथि है.

कर्पूरी ठाकुर की सादगी का एक मशहूर किस्सा उनके ऑस्ट्रेलिया दौरे का है. उनके पास विदेश जाने के लिए ढंग का कोट तक नहीं था. उन्होंने एक दोस्त से कोट उधार लिया, लेकिन वह भी फटा हुआ था. वे उसी फटे कोट को पहनकर चले गए. जब युगोस्लाविया के राष्ट्रपति मार्शल टिटो की नजर उनके फटे कोट पर पड़ी, तो वे दंग रह गए और उन्होंने सम्मान में कर्पूरी जी को एक नया कोट तोहफे में दिया.

जब मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा कर दिया कुर्ते का चंदा

एक बार कर्पूरी ठाकुर के घर पर बैठक चल रही थी. पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर भी वहां मौजूद थे. उन्होंने देखा कि मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर के कुर्ते की जेब फटी हुई है. चंद्रशेखर से रहा नहीं गया, उन्होंने अपनी झोली फैलाई और बैठक में मौजूद लोगों से चंदा इकट्ठा करना शुरू कर दिया. उन्होंने पैसे कर्पूरी जी को देते हुए कहा, “इनसे एक नया कुर्ता सिलवा लीजिएगा.” कर्पूरी जी ने पैसे तो ले लिए, लेकिन खुद पर खर्च करने के बजाय उन्हें मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा करवा दिया. अपने लिए आये पैसों को भी उन्होंने जनता की भलाई के लिय दान कर दिया.

सियासत के कबीर

कर्पूरी ठाकुर को जेपी और लोहिया का मानस पुत्र कहा जाता है. वे आजीवन समाजवादी रहे और पिछड़ों, दलितों और शोषितों की आवाज बने. उनके बारे में पूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने कहा था कि वे कबीर की तरह अपनी चदरिया को बेदाग रखकर चले गए. उनके पास विरासत में छोड़ने के लिए अपने पैतृक गांव में एक पक्का मकान तक नहीं था.

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चुनाव लड़ने के लिए पहला चंदा मां से लेते थे

कर्पूरी ठाकुर हर चुनाव का पहला चंदा अपनी मां से लेते थे. कभी एक आना तो कभी आठ आना. वे धनबल के कट्टर विरोधी थे. 14 साल की उम्र में युवाओं की टोली बनाने वाले कर्पूरी ठाकुर ने लाइब्रेरी आंदोलन चलाया और समाज को शिक्षित करने का बीड़ा उठाया. 17 फरवरी 1988 को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया. उनकी सादगी आज भी हर नेता के लिए प्रेरणा है. कर्पूरी ठाकुर को मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया.

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Paritosh Shahi

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परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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