हाइकोर्ट : अदालती आदेशों का पालन करने में सुस्त रवैया अपनाने पर सरकार सहित सभी विश्वविद्यालय प्रशासन को फटकार
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 26 Apr 2024 12:44 AM
पटना.हाइकोर्ट ने अपने एक आदेश में राज्य सरकार एवं सूबे के विश्वविद्यालय प्रशासन को अदालती आदेशों का पालन करने में सुस्त रवैया अपनाने पर फटकार लगायी है. हाइकोर्ट ने कहा है कि संवैधानिक कोर्ट से मुकदमा जीतने के बाद भी याचिकाकर्ता को यह संशय हमेशा बना रहता है कि अदालती आदेश का पालन सरकार या विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा समय पर और अदालती निर्देशानुसार हो पायेगा या नहीं क्योंकि राज्य सरकार या विश्वविद्यालय प्रशासन अपने खिलाफ पारित आदेश के खिलाफ न तो वर्षों तक कोई अपील ही दायर करती है और न ही हाइकोर्ट के आदेश का समय पर अनुपालन ही करती है.
पटना.हाइकोर्ट ने अपने एक आदेश में राज्य सरकार एवं सूबे के विश्वविद्यालय प्रशासन को अदालती आदेशों का पालन करने में सुस्त रवैया अपनाने पर फटकार लगायी है. हाइकोर्ट ने कहा है कि संवैधानिक कोर्ट से मुकदमा जीतने के बाद भी याचिकाकर्ता को यह संशय हमेशा बना रहता है कि अदालती आदेश का पालन सरकार या विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा समय पर और अदालती निर्देशानुसार हो पायेगा या नहीं क्योंकि राज्य सरकार या विश्वविद्यालय प्रशासन अपने खिलाफ पारित आदेश के खिलाफ न तो वर्षों तक कोई अपील ही दायर करती है और न ही हाइकोर्ट के आदेश का समय पर अनुपालन ही करती है. उसे बस मामले पर आंखे मूंदे रहना है . उनकी आंखें तब खुलती है जब कोर्ट से अवमानना का नोटिस मिलता है . पटना हाइकोर्ट में यह सब देखने को मिल रहा है क्योंकि अमूमन हर दूसरे केस के आदेश का अनुपालन कराने के लिए कोर्ट में अवमानना याचिका दायर हो रही है . उक्त बातें मीरा सिंह एवं अन्य द्वारा अदालती आदेश की अवमानना को लेकर दायर किये गये अवमाना याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति पीबी बजंथरी और न्यायमूर्ति आलोक कुमार पांडेय की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा है . मामला वर्ष 2016 में पारित हाइकोर्ट के आदेश का शिक्षा विभाग और भागलपुर विश्वविद्यालय द्वारा अनुपालन नहीं किये जाने का है . खंडपीठ ने तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के कुलसचिव के वेतन भुगतान पर अगले आदेश तक के लिए रोक भी लगायी है . कोर्ट ने नौ वर्ष पहले याचिकाकर्ता के लंबित भुगतान को देने का निर्देश विश्वविद्यालय प्रशासन को दिया था, लेकिन सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन की आपसी खींचतान से कोर्ट आदेश का पालन नहीं हो सका . हाइकोर्ट ने अपने आदेश में अदालती आदेश का पालन करने में लापरवाही बरतने वाले अफसरों के कार्यशैली पर कहा है कि कुछ सुस्त अफसरों के कारण न्यायपालिका की मर्यादा को सुरक्षित रखने के लिए हाई कोर्ट को मिली अवमानना आदेश की शक्ति अब महज न्याय आदेश को फलीभूत कराने का जरिया बन गयी है .कोर्ट ने अगली सुनवाई को शिक्षा विभाग के उन अफसरों का नाम जानना चाहा है जिनके आदेश पर भागलपुर विश्वविद्यालय का बैंक खाता को फ्रिज कर दिया गया . कोर्ट ने माना की सरकार की ऐसी करतूत , यदि हाइकोर्ट के किसी आदेश के अनुपालन को रोकती है तो वह भी अवमानना का मामला होगा.
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