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Gopalganj News: केला और पपीते की खेती से किसानों के घर आई खुशहाली, खेतों पर उमड़ रहे व्यापारी

Updated at : 01 Sep 2025 1:38 PM (IST)
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Cultivation of banana and papaya

Cultivation of banana and papaya

Gopalganj News: धान-गेहूं की परंपरागत खेती से मुश्किल से घर चलाने वाले गोपालगंज के किसान अब केला और पपीते की मिठास से खुशहाली का स्वाद चख रहे हैं. खेतों तक व्यापारी पहुंच रहे हैं और किसानों को यहीं अच्छी कीमत मिल रही है.

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Gopalganj News: गोपालगंज जिले में की पहचान अब केवल परंपरागत फसलों तक सीमित नहीं रह गई है. यहां के किसान धीरे-धीरे फल उत्पादन की ओर रुख कर रहे हैं.

खासकर केला और पपीते की खेती ने किसानों की जिंदगी बदल दी है. जिले के लगभग 70-70 हेक्टेयर में दोनों फलों की खेती हो रही है. इसके अलावा किसानों का रुझान चुकंदर की ओर भी बढ़ रहा है.

कुइसा खुर्द से शुरू हुई नई पहल

पंचदेवरी प्रखंड का कुइसा खुर्द गांव इस बदलाव की मिसाल बना है. करीब दस साल पहले यहां के किसान रामाशंकर पंडित ने पहली बार केला और पपीते की खेती शुरू की थी. पहले वे धान और गेहूं की पारंपरिक खेती करते थे, लेकिन कम आमदनी और मौसम की मार के कारण परिवार का भरण-पोषण मुश्किल हो रहा था. साल 2010 में कृषि विभाग की योजनाओं और सिपाया कृषि विज्ञान केंद्र से मिले प्रशिक्षण ने उनकी जिंदगी बदल दी.

रामाशंकर ने पपीता की खेती शुरू की और जल्द ही अच्छी आमदनी होने लगी. इसके बाद उन्होंने केला की खेती भी शुरू की. आज उनकी पहल पूरे इलाके के किसानों के लिए प्रेरणा बन गई है.

खेती से आई खुशहाली

पपीते और केले की खेती से मिली आय ने रामाशंकर पंडित के जीवन को नई दिशा दी. खेती से हुई आमदनी से उन्होंने पक्का मकान बनवाया और अपने तीन बेटों को उच्च शिक्षा दिलाई. सरकारी योजना का लाभ उठाकर उन्होंने खेत में सोलर पंप लगवाया और वर्मी कम्पोस्ट तैयार करना शुरू किया. आज वे पपीते की नर्सरी भी तैयार कर रहे हैं.

पड़ोसी गांव कपुरी के किसान आतम सिंह भी बड़े पैमाने पर केला उत्पादन कर रहे हैं. उनका कहना है कि पारंपरिक फसलों की तुलना में फल उत्पादन से दोगुनी कमाई होती है और बाजार की मांग भी लगातार बनी रहती है.

व्यापारी पहुंच रहे हैं खेतों तक

पहले किसानों को अपनी उपज लेकर मंडी तक जाना पड़ता था, लेकिन अब स्थिति बदल गई है. पंचदेवरी और आसपास के गांवों में फल व्यवसायी खुद खेतों तक पहुंच रहे हैं. किसान बताते हैं कि खेत में ही पपीता और केले की अच्छी कीमत मिल जाती है. व्यापारी मौके पर ही खरीद कर ले जाते हैं, जिससे किसानों को परिवहन और दलालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता.

परंपरागत खेती से हटकर बागवानी की ओर रुझान

बागवानी को बढ़ावा देने के लिए सरकारी योजनाओं और प्रशिक्षण ने किसानों को दिशा दी. परिणाम यह है कि आज पंचदेवरी प्रखंड और आसपास के गांवों में लगभग 50 एकड़ जमीन पर पपीता और केला की फसल लहलहा रही है.

कृषि विभाग द्वारा चलाई गई योजनाओं ने इस बदलाव में अहम भूमिका निभाई. किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण, सोलर पंप और नर्सरी लगाने के लिए सब्सिडी जैसी सुविधाएं दी गईं. विशेषज्ञ बताते हैं कि आधुनिक तकनीक से फल उत्पादन में लागत कम और मुनाफा अधिक होता है. यही कारण है कि धीरे-धीरे और किसान भी बागवानी की ओर बढ़ रहे हैं.

खेती से विकास की नई इबारत

गोपालगंज का यह बदलाव बताता है कि अगर सही समय पर किसान नई फसलों और आधुनिक तकनीक को अपनाएं, तो खेती से खुशहाली का रास्ता निकल सकता है.

कुइसा खुर्द से शुरू हुई यह पहल अब जिले के अन्य गांवों तक फैल चुकी है. पपीता और केले की मिठास सिर्फ खेतों में ही नहीं, बल्कि किसानों के जीवन में भी खुशियां घोल रही है.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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