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खेती पर खतरा : टिड्डियों के बाद अब फॉल आर्मीवार्म की दस्तक, मक्का में होगा भारी नुकसान

Updated at : 06 Jun 2020 5:57 AM (IST)
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खेती पर खतरा  :  टिड्डियों के बाद अब फॉल आर्मीवार्म की दस्तक, मक्का में होगा भारी नुकसान

रबी के मौसम में पहली बार बेहद खतरनाक कीट फॉल आर्मीवार्म ने राज्य में दस्तक दी है. राज्य के सीमावर्ती जिलों में पहले से चले रहे टिड्डियों के प्रकोप के खतरे के बीच अब फसलों के लिए फॉल आर्मीवर्म यानी स्पोडोप्टेरा फ्रूगीपेर्डा काल बन कर उभर रहा है

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पटना : रबी के मौसम में पहली बार बेहद खतरनाक कीट फॉल आर्मीवार्म ने राज्य में दस्तक दी है. राज्य के सीमावर्ती जिलों में पहले से चले रहे टिड्डियों के प्रकोप के खतरे के बीच अब फसलों के लिए फॉल आर्मीवर्म यानी स्पोडोप्टेरा फ्रूगीपेर्डा काल बन कर उभर रहा है. बीते वर्ष रबी के मौसम में राज्य में पहली बार आने वाले इस भयंकर कीट ने अपनी पहुंच अब रबी के फसल तक कर लिया है. पहला मामला बक्सर के सिमरी प्रखंड में देखने को मिला है. सबसे बड़ी बात है कि फॉल आर्मीवार्म की पुष्टि डुमरांव स्थित वीर कुंवर सिंह कृषि महाविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों ने जांच के बाद कर दी है. साथ ही इसकी जांच के लिए अन्य क्षेत्रों से जानकारी भी जुटायी जा रही है.

बेहद खतरनाक है अमेरिका से आया कीट : जानकार बताते है कि फॉल आर्मीवर्म बिहार या देश का कीट नहीं है. आम तौर पर यह अमेरिका के उष्ण कटिबंधीय और उपोष्ण कटिबंधीय क्षेत्र में पाया जाता है. एक-दो वर्ष पहले तक देश में इसके मामले नहीं थे. बिहार में खरीफ 2019 के दौरान पूर्वी जिलों पूर्णिया, कटिहार, दरभंगा आदि जगहों पर पहली बार इसकी पुष्टि की गयी थी.

उस दौरान इसके नुकसान के बचाव के लिए अभियान चलाया गया था. कृषि वैज्ञानिक डॉ अजय कुमार सिंह बताते हैं कि यह इतना घातक है कि मात्र तीन से चार दिनों में एक एकड़ से अधिक फसल को पूरी तरह बर्बाद कर देता है. इसकी क्षति ऐसी दिखती है कि जैसे खेत में बड़े जानवर ने प्रवेश कर पूरी फसल काे बर्बाद कर दिया हो.

पहला मामला बक्सर के सिमरी प्रखंड में देखने को मिला है

इसकी क्षति ऐसी दिखती है कि जैसे खेत में बड़े जानवर ने प्रवेश कर पूरी फसल काे बर्बाद कर दिया हो.

क्या है इसका उपाय : पहली बात तो यह मक्का पर लगने वाला किट है. इस किट से बचाव के लिए कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि स्पिनेटोरम 11.7 फीसदी को 0.5 एमएल एक लीटर पानी में मिला कर या लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन 9.5 फीसदी और थाएमेथोक्जाम 12.6 फीसदी 0.25 मिली प्रति लीटर पानी में मिलाकर या कालोरंतरानिलीप्रोले 18.5 फीसदी एससी 0.4 मिली प्रति लीटर पानी में मिलाकर फसल पर किसानों को छिड़काव करना चाहिए.

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