इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य अब कोर्ट में दस्तावेज के रूप में होंगे मान्य

Updated at : 28 Jun 2024 1:11 AM (IST)
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इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य अब कोर्ट में दस्तावेज के रूप में होंगे मान्य

एक जुलाई से लागू हो रहे तीन नये कानूनों में से एक भारतीय साक्ष्य अधिनियम के लागू होने पर इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य कोर्ट में दस्तावेज के रूप में मान्य होंगे.

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– एक जुलाई से लागू हो रहे नये भारतीय साक्ष्य अधिनियम में किया गया प्रावधान – जांच के दौरान घटनास्थल के वीडियो फुटेज और गवाहों की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग कोर्ट में होगी मंजूर संवाददाता, पटना. एक जुलाई से लागू हो रहे तीन नये कानूनों में से एक भारतीय साक्ष्य अधिनियम के लागू होने पर इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य कोर्ट में दस्तावेज के रूप में मान्य होंगे. नये कानून में इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को ”””””””” दस्तावेज ”””””””” जबकि इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्राप्त बयान को ”””””””” साक्ष्य ”””””””” के रूप में परिभाषित किया गया है. इससे इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल रिकॉर्ड को कानूनी स्वीकार्यता और वैधता मिल गयी है. बिहार पुलिस ने मुख्यालय से लेकर थाना स्तर के पुलिस पदाधिकारियों को नये कानूनों की इसकी जानकारी दे दी है. बताया है कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 में दस्तावेजों की परिभाषा का विस्तार करते हुए इसमें इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल रिकार्ड, इ-मेल, सर्वर लॉग्स, कंप्यूटर पर उपलब्ध दस्तावेज, स्मार्टफोन या लैपटॉप के संदेश, वेबसाइट और लोकेशनल साक्ष्य को भी शामिल किया गया है. इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल रिकॉर्ड को प्राथमिक साक्ष्य के रूप में मानने के लिए और अधिक मानक जोड़े गये हैं. स्मार्टफोन से घटनास्थल की रिकॉर्डिंग, लैपटॉप से इ-फाइलिंग नये कानून के लागू होने पर अभियुक्तों पर लगे आरोप प्रमाणित करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक व डिजिटल साक्ष्यों की अहमियत बढ़ जायेगी. इससे न्यायालय के स्तर पर निर्णय लेने में आसानी और फैसले में कम समय लगने की उम्मीद है. राज्य भर के पुलिसकर्मियों को नये कानूनों के अनुरूप डिजिटल बनाने के लिए प्रशिक्षण कार्य भी लगभग पूरा हो गया है. सभी जांच पदाधिकारी स्मार्टफोन और लैपटॉप से लैस किया जा रहा है. पुलिस पदाधिकारियों को स्मार्टफोन की मदद से घटनास्थल पर वीडियो रिकॉर्डिंग, फोटोग्राफ, गवाहों के बयान आदि के माध्यम से साक्ष्य इकट्ठा करना होगा. साथ ही लैपटॉप की मदद से पुलिस नेटवर्क और न्यायिक नेटवर्क से जुड़ने की सुविधा मिलेगी. इससे कानूनी प्रक्रियाओं में लगने वाले लंबे समय की भी बचत होगी.

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