50 साल की उम्र के बाद होने वाली बीमारियां अब 30 में ही हो रहीं

Updated at : 07 Apr 2024 12:20 AM (IST)
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50 साल की उम्र के बाद होने वाली बीमारियां अब 30 में ही हो रहीं

फास्ट फूड, सिगरेट का सहारा लेने वाले युवाओं में हृदय रोग, डायबिटीज, कैंसर और हाइपरटेंशन जैसे रोग अब 30 साल की उम्र में ही शरीर पर कब्जा जमाने लगे हैं, जबकि यह बीमारियां पहले 40 से 50 साल की उम्र की मानी जाती थीं.

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विश्व स्वास्थ्य दिवस पर विशेष : बिहार में 68.6% बच्चों और 63% महिलाओं में खून की कमी

संवाददाता, पटना

जिले में सेहत को लेकर लोग लगातार लापरवाह होते जा रहे हैं. इसका सीधा प्रभाव लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है. भागदौड़ भरी जिंदगी, बदलते खान-पान, दिनचर्या, अवसाद लोगों को उम्र से पहले ही बीमार बना रही है. फास्ट फूड, सिगरेट का सहारा लेने वाले युवाओं में हृदय रोग, डायबिटीज, कैंसर और हाइपरटेंशन जैसे रोग अब 30 साल की उम्र में ही शरीर पर कब्जा जमाने लगे हैं, जबकि यह बीमारियां पहले 40 से 50 साल की उम्र की मानी जाती थीं. इन्हीं परिस्थितियों से लोगों को उबारने के लिए ही हर साल विश्व स्वास्थ्य संगठन के स्थापना दिवस पर 7 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है, जिसका मूल मकसद लोगों को स्वस्थ जीवन प्रदान करने के लिए जरूरी परामर्श के साथ जागरूक भी करना है. इस बार 2024 का थीम मेरा स्वास्थ्य, मेरा अधिकार है.पोषण को लेकर स्वास्थ्य विभाग की कई महत्वपूर्ण योजनाओं के बाद भी गर्भवती समेत अधिकांश महिलाओं व बच्चों में खून की कमी दूर नहीं हो पा रही है. बिहार की 63% महिलाएं खून की कमी से जूझ रही हैं. जबकि 68.6% बच्चों में खून की कमी पायी गयी. हालांकि वर्ष 2022-23 में महिलाओं में यह आंकड़ा 64 व बच्चों में 69.4 प्रतिशत था. बीते एक साल में लगभग एक प्रतिशत की कमी हुई है. इन बच्चों की उम्र 6 से 59 माह के बीच है. नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे 6 (एनएफएचएस 6) की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है.

गांव की 62 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं एनीमिक

15 से 49 वर्ष की गर्भवती महिलाओं पर हुए सर्वे के मुताबिक शहरों में 54.1 प्रतिशत महिलाओं में खून की कमी है जबकि 62.7 प्रतिशत ग्रामीण गर्भवती महिलाएं खून की कमी से जूझ रही हैं. इसके अलावा रिपोर्ट के मुताबिक पुरुषों में भी खून की कमी बढ़ रही है. 15 से 49 वर्ष के 27.5 प्रतिशत पुरुषों में खून की कमी है. हालांकि बीते तीन साल के अंदर महिलाएं व पुरुषों में जागरूकता बढ़ी है. पहले की तुलना में यह संख्या में गिरावट दर्ज की गयी है.

साप्ताहिक अवकाश को सेहत दिवस के रूम में मनाने का संकल्प लें

आइजीआइएमएस के पूर्व निदेशक व नेत्र रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ विभूति प्रसन्न सिन्हा ने कहा कि अपने साप्ताहिक अवकाश यानी छुट्टी के दिन को सेहत दिवस के रूप में मनाने का संकल्प लें. नियमित जांच, व्यायाम व डॉक्टर के संपर्क में रहें, ताकि बीमारी का समय से पता चलने के बाद जल्दी इलाज हो जाये और आप स्वस्थ रहें.

वेजिटेबल चाइल्ड बनायें न कि बर्गर चाइल्ड

इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ एनके अग्रवाल का कहना है कि कोरोना ने रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) की अहमियत को साबित कर दिया है. इसलिए बच्चों की इम्युनिटी पर खास ध्यान देने की जरूरत है. बच्चों के खाने में हरी साग-सब्जियों और मौसमी फलों को अवश्य शामिल करें, ताकि वह शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी स्वस्थ बन सकें. फास्ड फूड, बर्गर, पिज्जा से सिर्फ स्वाद मिलता है न कि रोगों से लड़ने की क्षमता. इसलिए उनको वेजिटेबल चाइल्ड बनाएं न कि बर्गर चाइल्ड.

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