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बिहार में जमीन दाखिल खारिज को लेकर नया आदेश जारी, जानिए क्यों बढ़ाई गई CO साहब की ड्यूटी

Updated at : 22 Aug 2025 11:09 AM (IST)
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सांकेतिक तस्वीर

सांकेतिक तस्वीर

Bihar Land Mutation: बिहार में जमीन दाखिल-खारिज आवेदन अस्वीकृति पर विभाग ने सख्त निर्देश जारी किया है. अब CO को हर अस्वीकृति का ठोस कारण लिखित में देना होगा. साथ ही उसकी कॉपी रैयत को उपलब्ध करानी होगी.

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Bihar Land Mutation: बिहार सरकार ने राज्य में भूमि संबंधित मामलों में पारदर्शिता लाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. इस कड़ी में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने दाखिल खारिज से जुड़े आवेदनों की मनमानी अस्वीकृति को लेकर गंभीर रुख अपनाया है. दरअसल, पिछले कुछ दिनों से राज्य के विभिन्न जिलों से शिकायतें मिल रही थीं कि दाखिल खारिज के आवेदनों को बिना किसी स्पष्ट कारण के बड़े पैमाने पर अस्वीकृत कर दिया जा रहा है.

संयुक्त सचिव ने जारी किया निर्देश

इन शिकायतों को ध्यान में रखते हुए विभाग के संयुक्त सचिव ने पत्र जारी कर निर्देश दिया है कि अब से कोई भी आवेदन अस्वीकृत करने पर संबंधित अंचलाधिकारी (CO) को उसका पूरा कारण स्पष्ट रूप से दर्ज करना होगा. साथ ही यह जानकारी रैयत (भूमि स्वामी या आवेदनकर्ता) को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाएगी.

लिखित कारण देना होगा अनिवार्य

जानकारी के अनुसार हर अस्वीकृत आवेदन का लिखित कारण देना अनिवार्य होगा. कारण की यह कॉपी रैयत को व्यक्तिगत रूप से या पंजीकृत डाक/संदेशवाहक के माध्यम से भेज दी जाएगी. बिना किसी ठोस और वैध कारण के किसी भी दाखिल खारिज को अस्वीकृत करना संभव नहीं हो सकेगा. सभी डीएम को निर्देश दिया गया हैं कि इसका शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए.

आदेश का नहीं हो रहा पालन

बता दें कि विभाग ने इससे पहले भी स्पष्ट आदेश दिया था कि बिना कारण बताए कोई दाखिल खारिज आवेदन रद्द नहीं किया जाएगा. जबकि जमीनी स्तर पर इस आदेश का सही ढंग से पालन नहीं हुआ है. इस बार अब संयुक्त सचिव ने पुराने निर्देशों का हवाला देते हुए स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि अब भी शिकायतें मिलती हैं तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी.

50 हजार से अधिक आवेदन लंबित

बिहार के विभिन्न जिलों के अंचल कार्यालयों में दाखिल खारिज से संबंधित लगभग 50,000 से अधिक आवेदन लंबित हैं. इनमें से कई आवेदन ऐसे हैं जिन्हें दाखिल किए 75 दिन से भी ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है.

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ठोस और वैध कारण बताना जरूरी

देखा गया है कि अब तक कई मामलों में छोटे-छोटे तकनीकी कारणों या मामूली आपत्तियों के आधार पर वादों को खारिज कर दिया जाता था. जिस कारण न केवल रैयतों को आर्थिक और मानसिक परेशानी होती है, बल्कि भूमि विवादें भी बढ़ती हैं. अब नए निर्देशों के आधार पर कोई भी अस्वीकृति तभी वैध मानी जाएगी जब उसमें ठोस और वैध कारण लिखा होगा.

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Rani Thakur

लेखक के बारे में

By Rani Thakur

बंगाल की धरती पर एक दशक से अधिक समय तक समृद्ध पत्रकारिता अनुभव के साथ, रानी ठाकुर अब बिहार की धरती पर अपनी लेखनी से पहचान बना रही हैं. कोलकाता में कई राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित अखबारों के लिए रिपोर्टिंग और सब-एडिटिंग का अनुभव हासिल करने के बाद, वे अब प्रभात खबर के डिजिटल डेस्क से जुड़ी हैं, जहां वे लाइफ स्टाइल की खबरों के माध्यम से अपनी रचनात्मक सोच और पत्रकारिता कौशल को नई दिशा दे रही हैं.

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