Bihar Elections: बिहार चुनाव से पहले हथियारों पर शिकंजा, एक्शन मोड में DGP, होगा डिजिटल ऑडिट
Published by : Paritosh Shahi Updated At : 23 Jun 2025 6:33 PM
डीजीपी विनय कुमार
Bihar Elections: बिहार विधानसभा चुनाव को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बनाने के उद्देश्य से सरकार ने अवैध हथियारों और कारतूस की ब्लैक मार्केटिंग पर कड़ा कदम उठाया है. लाइसेंसधारियों की समीक्षा, गोली की सीमा तय करने और डिजिटल रिकॉर्ड अनिवार्य करने जैसे सख्त उपायों के जरिए राज्य में कानून-व्यवस्था मजबूत करने की तैयारी तेज हो गई है.
Bihar Elections: बिहार में लॉ एंड आर्डर को दुरुस्त करने के साथ ही आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए कारतूस की ब्लैक मार्केटिंग पर नकेल कसने की ठोस रणनीति तैयार की गई है. हथियारों का बेजा इस्तेमाल करने वालों की पहचान कर उनके हथियारों के लाइसेंस रद्द किए जाएंगे.
जिन लाइसेंस धारकों का आपराधिक इतिहास रहा है या किसी संदिग्ध गतिविधि में शामिल रहे हैं, हर्ष फायरिंग के मामले में शामिल रहे हैं अथवा सोशल मीडिया पर अवैधानिक प्रदर्शन या सार्वजनिक स्थानों पर अपना वर्चस्व या भय कायम करने के वैसे आरोपी जिनके पास हथियार के लाइसेंस हैं, इन सभी की पहचान कर इनके लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई शुरू होने जा रही है.
इसमें कई लोगों की पहचान कर कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है. पुलिस मुख्यालय ने इससे संबंधित कार्रवाई करने का आदेश जारी कर दिया है.
200 के स्थान पर 50 राउंड गोली ही मुहैया कराई जाएगी
इसके अतिरिक्त अपराधियों या असामाजिक तत्वों तक पहुंचने वाली अवैध गोलियों की सप्लाई चेन को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है. अब प्रत्येक लाइसेंस धारकों को प्रतिवर्ष अधिकतम 200 के स्थान पर 50 राउंड गोली ही मुहैया कराई जाएगी. इसके लिए आयुध नियम, 2016 में संशोधन किया गया है.
पुलिस के मुखिया डीजीपी विनय कुमार के दिशा-निर्देश पर एडीजी (STF) कुंदन कृष्ण की तरफ से इससे संबंधित प्रस्ताव गृह विभाग को भेजा गया है. इस पर जल्द ही सरकार के स्तर से अंतिम रूप से आदेश जारी होने जा रही है.
सभी लाइसेंस की जानकारी पोर्टल पर दर्ज कराना अनिवार्य
अब सभी लाइसेंस धारकों की आर्म्स समेत तमाम बातों की जानकारी एनडीएएल-एएलआईएस (नेशनल डाटाबेस ऑफ आर्म्स लाइसेंस- आर्म्स लाइसेंस इश्योएंस सिस्टम) पर अनिवार्य रूप से अपलोड करनी होगी. लाइसेंस पर नई गोली खरीदने वाले को खोखा को जमा कराकर उपयोगिता प्रमाण-पत्र प्राप्त करना अनिवार्य होगा. इस संबंध में उत्तर प्रदेश सरकार के जारी दिशा-निर्देश यानी यूपी मॉडल को यहां लागू किया जाएगा.
सभी शस्त्र दुकानों और कारखानों के साथ ही बंद पड़ी लाइसेंसी दुकानों या कारखानों की समीक्षा कर विधि-सम्मत कार्रवाई की जाएगी. सभी दुकानों एवं कारखानों को खरीद-बिक्री का पूरा स्टॉक पंजी जिला के एसपी या स्थानीय थाना को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराना होगा, ताकि इसके आधार पर भौतिक सत्यापन हो सके.
जिला स्तरीय गठित कमेटी करेगी समीक्षा
जिला स्तर पर शस्त्र एवं कारतूस के संबंध में विस्तृत समीक्षा और निरंतर निगरानी करने के लिए स्थाई समिति का गठन किया गया है. जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित यह कमेटी प्रत्येक तीन महीने पर लाइसेंसधारी दुकानों की जांच, निर्गत या नवीकरण की विवरणी की समुचित समीक्षा की जाएगी. साथ ही अर्द्धवार्षिक या वार्षित उच्च स्तरीय समीक्षा गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय स्तर पर किया जाएगा.
इस कारण लिया गया यह निर्णय
राज्य पुलिस औसतन 3600 अवैध हथियार और 17000 अवैध गोलियां प्रत्येक वर्ष जप्त करती है. राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (एनसीआरबी) के अनुसार, हिंसक अपराध दर में बिहार का स्थान देश के शीर्ष पांच राज्यों में रहा है. अवैध गोलियों की जांच में यह पाया गया कि इसका मुख्य स्रोत लाइसेंसी दुकानों से लाइसेंस के नाम पर गोलियां उठाकर इनकी अवैध सप्लाई अपराधियों या ब्लैक मार्केट में की जाती है.
इसे भी पढ़ें: बिहार के 9400000 परिवारों के बैंक अकाउंट में आएंगे 2-2 लाख! जानिए कौन-कौन होंगे इसके हकदार
जांच में ये त्रुटियां पाईं गईं हैः
- ऑनलाइन पोर्टल पर सभी शस्त्र लाइसेंस और आयुद्ध दुकानों की इंट्री नहीं होना.
- लाइसेंसधारकों को नई गोली देने से पहले विधि सम्मत उपयोग एवं जांच की निर्धारित प्रक्रिया नहीं होना.
- गोली देते समय लाइसेंसधारकों के वेरिफिकेशन की प्रभावी व्यवस्था नहीं होना.
- लाइसेंसधारी शस्त्र दुकानों या कारखानों का समुचित ऑडिट नहीं होना.
- नागालैंड, जम्मू-कश्मीर समेत अन्य राज्यों से जारी लाइसेंसी हथियारों की कोई समुचित जानकारी नहीं होना.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Paritosh Shahi
परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










