Bihar News : सिपाही बहाली बोर्ड के ओएसडी रहे कमलाकांत की जमानत खारिज, करना होगा सरेंडर

एसआइटी की जांच में दुराचार के आरोप साबित होने पर जून 2021 में एडीजी कमजोर वर्ग ने दिये थे गिरफ्तारी के आदेश, लोअर कोर्ट से मिली जमानत को सरकार ने हाइकोर्ट में दी थी चुनौती
पटना हाइकोर्ट ने दुराचार के आरोपित केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती) के तत्कालीन विशेष कार्य पदाधिकारी डीएसपी कमलाकांत प्रसाद की जमानत को बुधवार को खारिज कर दिया . निलंबित चल रहे डीएसपी को निचली अदालत से जमानत मिली हुई थी. पीड़िता की ओर से सरकार ने जमानत को हाइकोर्ट में चुनौती दी थी. आरोप था कि वे बेल मिलने के बाद गवाह और वादी को धमकी दे रहे थे. पुलिस रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया. अब उनको आत्मसमर्पण करना होगा. ऐसा न करने पर पुलिस डीएसपी को कभी भी गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर सकती है.
मामले में तत्कालीन एडीजी कमजोर वर्ग अनिल किशोर यादव ने एसआइटी का गठन कर मामले की जांच करायी थी. एसआइटी की जांच में दुराचार के आरोप साबित होने पर जून 2021 में एडीजी अनिल किशोर यादव ने पटना और गया एसएसपी को टीम गठित कर डीएसपी को गिरफ्तारी करने का आदेश जारी दिया था. दोनों जिलों के अधिकारी को विशेष टीम का गठन कर आरोपित की गिरफ्तारी सुनिश्चित करनी थी. उनकी रिपोर्ट के आधार पर ही डीएसपी को निलंबित कर दिया गया था. गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपित अधिकारी ने निचली अदालत से बेल ली थी, जिसे सरकार ने चुनाैती दी थी.
पुलिस ने 27 मई 2021 को एससी-एस टी एक्ट , पॉक्सो एक्ट व आई पी सी के विभिन्न प्रावधानों में गया महिला पीएस केस नंबर- 18/ 21 दर्ज किया था. केस के सूचक पीड़िता के भाई का कहना था कि उसकी छोटी बहन ने बताया कि वर्ष 2017 में दशहरा पर्व के समय उनकी बहन को तत्कालीन गया के पुलिस उपाधीक्षक, मुख्यालय कमलाकांत प्रसाद की ओर से जबरदस्ती अपने गया स्थित सरकारी मकान में बलात्कार किया गया था, जब पीड़ित महिला उनके यहां पटना के घर का काम काज करने के लिए पटना जाने के लिए एक रात रुकी थी.
कमलाकांत प्रसाद की पत्नी ने दो मामले दर्ज करा रखे हैं. दहेज उत्पीड़न का पहला मामला पटना के रूपसपुर थाने में दर्ज कराया था. दिसंबर 2021 में पटना के गांधी मैदान में थाने में डीएसपी पर पत्नी का फर्जी साइन कर दस लाख रुपये का लोन लेने का केस दर्ज हुआ. गोपालगंज में भी एससीएसटी उत्पीड़न का मामला भी दर्ज है. इस मामले में भी एडीजी कमजोर वर्ग ने एसआइटी से जांच करायी थी.
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