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विधायी सुधार और निःशुल्क कानूनी सहायता के लिए केंद्र कर रहा व्यापक प्रयास : अर्जुन मेघवाल

Updated at : 03 Apr 2025 5:36 PM (IST)
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विधायी सुधार और निःशुल्क कानूनी सहायता के लिए केंद्र कर रहा व्यापक प्रयास : अर्जुन मेघवाल

विधायी सुधार और निःशुल्क कानूनी सहायता के लिए केंद्र कर रहा व्यापक प्रयास : अर्जुन मेघवाल

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राज्यसभा में भाजपा के सांसद डा भीम सिंह के सवाल के जवाब में बोले केंद्रीय विधि न्याय राज्य मंत्री संवाददाता,पटना राज्यसभा सांसद डा भीम सिंह द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में विधि और न्याय राज्यमंत्री(स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि सरकार कानूनी ढांचे को सुलभ और पारदर्शी बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है. इस दिशा में अब तक 1,562 अप्रचलित और अनावश्यक नियमों को निरस्त किया गया है. इसके अलावा, भारत के 23वें विधि आयोग को यह जिम्मेदारी सौंपी गयी है कि वह ऐसी विधियों की पहचान करे, जिनकी अब आवश्यकता नहीं है और जिन्हें निरस्त किया जा सकता है. लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भी कई मौजूदा कानूनों की समीक्षा की जा रही है ताकि उन्हें अधिक प्रभावी बनाया जा सके. केंद्रीय विधि राज्य मंत्री श्री मेघवाल ने कहा कि सरकार न्याय तक समान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से समाज के कमजोर वर्गों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध करा रही है. विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम के तहत राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नालसा की स्थापना की गयी है.इसके माध्यम से 2022-23 से 2024-25 (दिसंबर 2024 तक) की अवधि में 39.44 लाख व्यक्तियों को निःशुल्क कानूनी सहायता दी गयी है. इसके अतिरिक्त, डिजाइनिंग इनोवेटिव सॉल्यूशंस फॉर होलिस्टिक एक्सेस टू जस्टिस इन इंडिया (दिशा) नामक केंद्रीय योजना को 250 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ लागू किया जा रहा है. इस योजना के तहत टेली-लॉ, न्याय बंधु (प्रो बोनो कानूनी सेवाएं), तथा विधिक साक्षरता और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से देशभर में 2.10 करोड़ से अधिक नागरिकों को लाभान्वित किया गया है. टेली-लॉ सेवा के माध्यम से नागरिकों को मोबाइल ऐप और टोल-फ्री नंबर के जरिए वकीलों से जोड़ा जा रहा है. वहीं न्याय बंधु पहल के तहत पंजीकृत लाभार्थियों को मुफ्त कानूनी परामर्श और सहायता दी जा रही है. सरकार राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम योजना भी चला रही है.इसका उद्देश्य निःशुल्क आपराधिक बचाव परामर्शदाता सेवाएं प्रदान करना है. इस योजना का वित्तीय परिव्यय 998.43 करोड़ रुपये (2023-24 से 2025-26) निर्धारित किया गया है. दिसंबर 2024 तक देशभर के 654 जिलों में एलएडीसीएस कार्यालयों के माध्यम से 3.95 लाख से अधिक आपराधिक मामलों का निपटारा किया जा चुका है. इस प्रणाली के तहत 5,251 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें 3,448 बचाव परामर्शदाता शामिल हैं. सरकार न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या को कम करने के लिए लोक अदालतों को भी प्रभावी रूप से संचालित कर रही है. लोक अदालतें तीन स्तरों पर कार्य कर रही हैं. राष्ट्रीय लोक अदालतें, राज्य लोक अदालतें और स्थायी लोक अदालतें इसमें शामिल हैं. 2022 से 2024 तक राष्ट्रीय लोक अदालतों ने कुल 23.17 करोड़ मामलों का निपटारा किया. इसमें वर्ष 2022 में 4.19 करोड़, 2023 में 8.53 करोड़ और 2024 में 10.45 करोड़ मामलों का समाधान किया गया. इसी अवधि में राज्य लोक अदालतों ने 32.66 लाख और स्थायी लोक अदालतों ने 5.65 लाख मामलों का निपटारा किया. 2025 में राष्ट्रीय लोक अदालतों का आयोजन 8 मार्च, 10 मई, 13 सितंबर और 13 दिसंबर को किया जायेगा. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जनसुलभ बनाने के लिए सतत प्रयास कर रही है. विधायी सुधारों, कानूनी सहायता योजनाओं और लोक अदालतों के प्रभावी संचालन से आम नागरिकों को त्वरित और सस्ती न्याय सेवाएं उपलब्ध करायी जा रही हैं. इन प्रयासों का मुख्य उद्देश्य न्याय तक समान पहुंच सुनिश्चित करना और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Mithilesh kumar

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By Mithilesh kumar

Mithilesh kumar is a contributor at Prabhat Khabar.

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