पटना: दो लाख की कैंसर दवा 60 हजार में मिलने की उम्मीद, इम्यूनोथेरेपी सस्ती होने से मरीजों को राहत
सांकेतिक तस्वीर
कैंसर का इलाज करा रहे मरीजों के लिए बड़ी खुशखबरी है. कुछ महंगी इम्यूनोथेरेपी दवाओं के पेटेंट की अवधि खत्म होने के बाद इनकी कीमतों में भारी गिरावट आने की उम्मीद है. डॉक्टरों का कहना है कि करीब 2 लाख रुपये प्रति डोज वाली दवाएं 60 हजार रुपये तक सस्ती हो सकती हैं, जिससे मरीजों पर इलाज का आर्थिक बोझ कम होगा.
Cancer Treatment: कैंसर का इलाज करा रहे मरीजों के लिए राहत की उम्मीद जगी है. कुछ महंगी इम्यूनोथेरेपी दवाओं के पेटेंट की अवधि खत्म होने के बाद इनके दाम में बड़ी गिरावट आ सकती है. डॉक्टरों के मुताबिक अभी जिन दवाओं के 100 एमएल के एक डोज की कीमत करीब दो लाख रुपये से अधिक पड़ती है, उनकी कीमत घटकर करीब 60 हजार रुपये तक आने की संभावना है. इससे लंबे समय तक इम्यूनोथेरेपी लेने वाले मरीजों और उनके परिवार पर इलाज का आर्थिक बोझ कम हो सकता है.
विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले दिनों जारी किए गए बजट में कुल 17 तरह की कैंसर दवाओं से कस्टम ड्यूटी हटाने की घोषणा की गयी थी. इसमें इम्यूनोथेरेपी वाली दवाएं भी शामिल हैं. ऐसे में अब इलाज पहले की तुलना में और सस्ता होने की उम्मीद है.
पेट, फेफड़े, स्तन, किडनी और गर्भाशय के कैंसर में होता है दवाओं का इस्तेमाल
कैंसर रोग के इलाज कर रहे विशेषज्ञों के अनुसार, इम्यूनोथेरेपी कैंसर के इलाज में नयी रोशनी बनकर सामने आयी है. इम्यूनोथेरेपी शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कैंसर कोशिकाओं के खिलाफ सक्रिय करने का काम करती है. इसका इस्तेमाल मरीज की बीमारी और कैंसर के प्रकार के आधार पर किया जाता है.
पेट, फेफड़े, स्तन, गर्भाशय, किडनी समेत कई तरह के कैंसर में कुछ इम्यूनोथेरेपी दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है. आईजीआईएमएस कैंसर रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. राजेश कुमार सिंह ने बताया कि मौजूदा समय में इन दवाओं के एक डोज की कीमत में टैक्स समेत अन्य शुल्क शामिल होने से मरीजों को भारी खर्च उठाना पड़ता है. ऐसे में दवाएं सस्ती होने से इलाज भी अब पहले की तुलना में सस्ता हो जायेगा.
पेटेंट खत्म होते ही बढ़ेगा विकल्प, जेनेरिक दवाएं भी आएंगी
पटना जिले के औषधि नियंत्रक प्रशासक चुनेंद्र महतो के मुताबिक कुछ इम्यूनोथेरेपी दवाओं का पेटेंट खत्म होने वाला है. पेटेंट अवधि पूरी होने के बाद अन्य दवा कंपनियां भी उसी सक्रिय दवा और निर्धारित फॉर्मूले के आधार पर अपने उत्पाद बाजार में ला सकेंगी. इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने और कीमतों में कमी आने की उम्मीद है.
यदि कीमत दो लाख से घटकर 60 हजार के लगभग आती है, तो अधिक से अधिक मरीज इस आधुनिक इलाज को वहन कर सकेंगे. हालांकि वास्तविक कीमत कंपनी, दवा और नियामकीय प्रक्रिया के आधार पर तय होगी. उन्होंने बताया कि उम्मीद है कि जल्द ही जेनेरिक इम्यूनोथेरेपी बाजार में भी आने की चर्चा चल रही है.
लंबे समय तक चलती है कैंसर के इलाज की प्रक्रिया
बुद्धा कैंसर सेंटर के निदेशक व कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि कैंसर का इलाज केवल एक बार की थेरेपी नहीं, बल्कि एक लंबी प्रक्रिया होती है. हालांकि वर्तमान में आधुनिक इलाज से अब मरीजों को अधिक राहत दी जा रही है.
उन्होंने कहा कि जिस तरह डायबिटीज और ब्लड प्रेशर के मरीज लंबे समय तक दवाएं लेते हैं, उसी तरह अब कैंसर के मरीजों को भी लंबे समय तक दवा लेनी पड़ती है. नयी दवाएं एडवांस स्टेज में भी कैंसर को नियंत्रित कर रही हैं और उसे लंबे समय तक काबू में रख पा रही हैं. इसलिए इलाज का खर्च मरीज और उसके परिवार के लिए बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा बन जाता है.
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