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कैबिनेट : राजगीर खेल परिसर को एनएच से जोड़ेगा 364 करोड़ का फोरलेन

राज्य सरकार ने राजगीर खेल परिसर-सह-राजगीर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम तक सुगम आवागमन सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ी योजना को मंजूरी दी है.

संवाददाता, पटना

राज्य सरकार ने राजगीर खेल परिसर-सह-राजगीर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम तक सुगम आवागमन सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ी योजना को मंजूरी दी है. ताकि स्टेडियम आने वाले खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों को आवागमन में कोई परेशानी नहीं हो.मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में राजगीर खेल परिसर-सह-राजगीर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम को जोड़ने वाली 7.40 किलोमीटर लंबी सड़क के लिए 364 करोड़ की स्वीकृति दी है. कैबिनेट विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ एस सिद्धार्थ ने बताया कि नवनिर्मित मार्ग राजगीर खेल परिसर-सह-राजगीर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम से आरंभ होगा और एनएच-120 से विरायतन तक जाएगा.यह सड़क कुबरी, जैतीपुर, फतेहपुर और इण्डो हुके होटल के रास्ते बनाई जाएगी.कुल 7.40 किलोमीटर लंबे इस मार्ग को 4-लेन के रूप में विकसित किया जाएगा और इसमें रेल ओवर ब्रिज (आरओबी) भी होगा. परियोजना पूर्ण होने पर खिलाड़ियों, पर्यटकों और खेल देखने आने वाले दर्शकों को खेल परिसर से एनएच-120 तक सुगम आवागमन की सुविधा मिलेगी.

राष्ट्रीय कृषि बाजार से जुड़ेंगे बिहार के 20 बाजार प्रांगण

राज्य कैबिनेट ने राज्य के 20 बाजार प्रांगणों में राष्ट्रीय कृषि बाजार (इ-नाम) के का कार्यान्वयन की स्वीकृति दी है. 2025-26 में कृषोन्नति योजना के तहत इसका क्रियान्वयन किया जायेगा. डीपीआर आधारित इस योजन के लिए केंद्र सरकार की ओर से छह करोड़ रुपये वन टाइम ग्रांट के रूप में उपलब्ध कराये गये हैं. योजना का उद्देश्य कृषि वस्तुओं के व्यापार के लिए एकीकृत बाजार प्रदान करना व कृषि उत्पादों के आगमन, गुणवत्ता एवं मूल्य, खरीद और बिक्री प्रस्ताव, व्यापार प्रस्तावों का संचालन करने का प्रावधान है.कृषि विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार ने बताया कि बिहार देश का पहला डिजिटल कृषि निदेशालय पहले ही गठित किया जा चुका है. इ-नाम योजना को इससे जोड़ने के बाद राज्य के बाजार प्रांगणों का अनुश्रवण और अधिक प्रभावी और पारदर्शी तरीके से किया जा सकेगा.

भविष्य निधि अंशदान राशि और ब्याज दर के आधार पर होगा लंबित मामलों का निबटारा

कैबिनेट ने उन सरकारी कर्मियों को राहत दी है, जिनकी वेतन भरपाई पंजी वर्ष 2012-13 से पहले नष्ट हो गई थी. इस वजह से भविष्य निधि से संबंधित संचित राशि के लेखा-अपडेट और अंतिम निकासी के कई मामले वर्षों से लंबित थे.अब ऐसे मामलों में अंशदान की राशि का निर्धारण उस वर्ष के मूल वेतन पर न्यूनतम अंशदान की राशि और उस समय वित्त विभाग द्वारा निर्धारित ब्याज दर के आधार पर किया जाएगा.

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