बिहार में सालाना एक लाख ब्रेन स्ट्रोक के मरीज आ रहे सामने

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फुलवारीशरीफ. बिहार में ब्रेन स्ट्रोक बीमारी के मरीजों की बढ़ती तादाद को देखते हुए विशेषज्ञ चिकित्सकों ने मंथन किया.

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फुलवारीशरीफ.

बिहार में ब्रेन स्ट्रोक बीमारी के मरीजों की बढ़ती तादाद को देखते हुए विशेषज्ञ चिकित्सकों ने मंथन किया. इस मौके पर एक राष्ट्रीय स्तर का सम्मेलन का आयोजन भी हुआ है. सम्मेलन का उद्घाटन एम्स पटना में कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) गोपाल कृष्ण पाल ने मुख्य अतिथि के रूप में किया. यह आयोजन न्यूरोसर्जरी और न्यूरोलॉजी विभागों के संयुक्त सहयोग से हुआ. सम्मेलन में बिहार, झारखंड और अन्य राज्यों से 250-300 न्यूरो चिकित्सकों ने भाग लिया. कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों में आइजीआइएमएस पटना के निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) बिंदे कुमार, रिम्स, रांची के निदेशक प्रोफेसर डॉ राजकुमार, प्रोफेसर (डॉ.) प्रेम कुमार, अकादमिक डीन, प्रोफेसर (डॉ.) अनूप कुमार, चिकित्सा अधीक्षक और परीक्षा डीन, और प्रोफेसर पुनम भदानी, डीन मौजूद रहे. एम्स पटना के निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) गोपाल कृष्ण पाल ने उन्नत न्यूरोसाइंस सेंटर के विकास का आश्वासन दिया है. उन्होंने बताया कि सालाना, बिहार में लगभग एक लाख एक लाख मरीज स्ट्रोक से पीड़ित होते हैं, जिसका मुख्य कारण मस्तिष्क की धमनियों में रक्त का थक्का जमना (80%) या धमनी के फटने के कारण मस्तिष्क रक्तस्राव (20%) होता है. स्ट्रोक के लक्षणों की प्रारंभिक पहचान जैसे कि अंगों की कमजोरी, अस्पष्ट वाणी, चेहरे की विषमता और चक्कर आना है.

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