Bihar: दुनिया में विलुप्तप्राय गरूड़ का पूर्णिया में बढ़ रहा कुनबा, पाये गये ढाइ दर्जन घोंसले

Author Ashish jha
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Bihar: बिहार में विलुप्तप्राय गरूड़ पक्षी की संख्या में लगातार बढोतरी दर्ज की जा रही है. भागलपुर के बाद अब पूर्णिया में कुनबा लगातार बढ़ रहा है. पूर्णिया के नाथपुर में ढाई दर्जन से अधिक गरूड़ के घोंसले मिले हैं.

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Bihar: पूर्णिया. पूरी दुनिया में विलुप्तप्राय गरूड़ पक्षी का पूर्णिया में कुनबा लगातार बढ़ रहा. महज एक पखवारे के अन्वेषण में पूर्णिया में गरूड़ के करीब ढाइ दर्जन घोंसले पाये गये हैं. पूर्णिया जिले के रुपौली प्रखंड के नाथपुर पंचायत के नवटोलिया में गरूड़ का बसेरा पिछले महीने ही पर्यावरणविदों ने पाया है. इसके बाद से गरूड़ के घोंसलों की खोज चल रही है. अधिकांश घोसले बरगद के पेड़ पर ही मिल रहे हैं. इसके साथ ही गांववासियों ने भी गरूड़ के संरक्षण का संकल्प लिया है. नाथपुर पंचायत के मुखिया विजय कुमार व सरपंच डॉ राजेंद्र प्रसाद सिंह बताते हैं कि पंचायत में गरुड़ के संरक्षण के लिए हम लोगों को जागरूक कर रहे हैं. भागलपुर स्थित गरूड़ सेवा एवं पुनर्वास केंद्र भी जागरूकता की दिशा में आवश्यक पहल कर रहा है.

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प्रतीक चिह्न के बहाने नवटोलिया की ब्रांडिंग

नवटोलिया में गरूड़ का नया बसेरा होने के बाद उसके संरक्षण के साथ, उसे भलीभांति जानने और उसे ब्रांड बनाने की तमन्ना ग्रामीणों के जेहन में आ गयी है. इसी को लेकर ग्रामीणों ने तय किया है कि गांव में सार्वजनिक स्थलों पर गरुड़ का प्रतीक चिह्न लगाया जा रहा है. इसके पीछे ग्रामीणों की मंशा है कि गरूड़ के बहाने उनके गांव को भी देश-दुनिया में ख्याति मिले. गांव में देश-विदेश के पर्यटकों का आगमन हो.

आस्था का भी हो रहा संचार

गरुड़ के आने से गांव में आस्था का भी संचार हो रहा है. दरअसल, हिंदू धर्म में गरुड़ धार्मिक आख्यानों से जुड़े हैं. वैसे वैज्ञानिक मत के अनुसार यह स्टार्क परिवार का सदस्य है. आकार के लिहाज से यह बहुत बड़ा पक्षी है. इसकी लंबाई 145 से 150 सेमी तक होती है. इसका पंख औसतन 250 सेमी तक होता है.

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गरूड़ के आहार को त्याग को मछुआरे भी तैयार

इधर, गरूड के मुख्य आहार में मछलियां शामिल हैं. ऐसे में इलाके के मछुआरों को भी जागरूक किया जा रहा है. मछुआरों को छोटी मछलियां मारने से परहेज करने का संदेश दिया गया है. उन्हें बताया गया है कि यदि छोटी मछलियों को मार लेंगे तो उन्हें बड़ी मछलियां मिल ही नहीं पाएंगी.इससे मछुआरों की आमदनी पर तो फर्क पड़ेगा ही गरुड़ जैसे दुर्लभ पक्षियों के लिए भी भोजन की कमी हो जायगी. पर्यावरणविद प्रो. जयनंदन मंडल ने बताया कि नवटोलिया गांव में भी भोजन की पर्याप्त उपलब्धता व मौसम अनुकूल होने से यहां गरुड़ों की संख्या बढ़ रही है.

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