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बिहार स्टेट फार्मेसी काउंसिल को भी पक्षकार बनाया जाये

Updated at : 24 Aug 2024 12:53 AM (IST)
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बिहार स्टेट फार्मेसी काउंसिल को भी पक्षकार बनाया जाये

राज्यभर में निबंधित और योग्य फार्मासिस्ट के पर्याप्त संख्या में नहीं होने के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर होने वाले असर को लेकर दायर लोकहित याचिका पर हाइकोर्ट ने सुनवाई की .

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विधि संवाददाता, पटना राज्यभर में निबंधित और योग्य फार्मासिस्ट के पर्याप्त संख्या में नहीं होने के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर होने वाले असर को लेकर दायर लोकहित याचिका पर हाइकोर्ट ने सुनवाई की . कोर्ट ने सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह बिहार स्टेट फार्मेसी काउंसिल को भी पक्षकार बनाएं ताकि उससे भी इस मामले में जवाब मांगा जा सके .मुख्य न्यायाधीश के विनोद चंद्रन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इस मामले को लेकर मुकेश कुमार द्वारा दायर लोकहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार को जवाब देने का निर्देश दिया था.कोर्ट को बताया गया कि राज्य में लगभग दस हजार अस्पताल हैं, जबकि निबंधित फरमासिस्टों की संख्या छह सौ से कुछ अधिक है.कोर्ट को बताया गया कि डॉक्टरों द्वारा लिखी गयी पर्ची पर निबंधित फार्मासिस्टों द्वारा दवा नहीं दी जाती है.बहुत सारे सरकारी अस्पतालों में अनिबंधित नर्स,एएनएम,क्लर्क ही फार्मासिस्ट का कार्य करते हैं. बिना जानकारी और योग्यता के ही ये लोग मरीजों को दवा देते हैं,जबकि ये कार्य निबंधित फार्मासिस्टों द्वारा किया जाना है. अधिकारियों द्वारा अनिबंधित नर्स, एएनएम, क्लर्क से काम लेना न केवल संबंधित कानून का उल्लंघन है,बल्कि आम आदमी के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ भी है. कोर्ट को बताया गया कि फार्मेसी एक्ट,1948 के तहत फार्मेसी से संबंधित विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिए अलग अलग पदों का सृजन किया जाना चाहिए, लेकिन बिहार सरकार ने इस संबंध में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है.

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