बिहार राजस्व विभाग के फील्ड में तैनात कर्मियों को लगानी होगी बायोमैट्रिक हाजिरी, नहीं कर पाएंगे कामचोरी

राजस्व विभाग फील्ड में तैनात राजस्व कर्मचारी सहित जमीन के सर्वेक्षण और बंदोबस्त से जुड़े कर्मचारी पदाधिकारियों की उपस्थिति ऑनलाइन करने जा रहा है. राजस्व कर्मचारी हो अथवा किसी गांव में जमीन का सर्वे करने वाला अमीन, सभी को अपने मोबाइल से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करानी होगी.
अनुज शर्मा, पटना. बिहार राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के राजस्व कर्मचारी, अमीन, विशेष सर्वेक्षण करने वाले पदाधिकारी- कर्मचारी आने वाले दिनों में घर बैठकर कामचोरी नहीं कर सकेंगे. फील्ड में जाने पर ही उनकी उपस्थिति दर्ज होगी. विभाग फील्ड में तैनात राजस्व कर्मचारी सहित जमीन के सर्वेक्षण और बंदोबस्त से जुड़े कर्मचारी पदाधिकारियों की उपस्थिति ऑनलाइन करने जा रहा है. राजस्व कर्मचारी हो अथवा किसी गांव में जमीन का सर्वे करने वाला अमीन, सभी को अपने मोबाइल से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करानी होगी.
आरएंडआर साफ्टवेयर के जरिये फील्ड में तैनात कर्मचारी बायोमीटरिक अटेंडेंस लगा सकें, इसके लिए कर्मचारियों की उंगलियों के निशान को सॉफ्टवेयर में अपलोड किया जायेगा. पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर मुंगेर में इसका ट्रायल भी शुरू हो गया है. हालांकि अभी इसमें तकनीकी खामी है. 16 दिसंबर को इसने केवल 10 कर्मचारियों की उपस्थिति दर्शायी थी. एप और साफ्टवेयर की खामियों को दूर करने काे भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय एनआइसी के वैज्ञानिकों की मदद ले रहा है.
जिला स्तर पर बंदोबस्त पदाधिकारियों के स्तर से बड़ी संख्या में विशेष सर्वेक्षण कर्मियों को एक शिविर या गांव से बदल कर दूसरे शिविर या गांव में टैग किया जा रहा है. इस कारण विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त के कार्य की गति बाधित हो रही है. विशेष सर्वेक्षण कर्मियों की ऑनलाइन उपस्थिति के लिए बनाये गये नये एप को मुंगेर जिले में प्रायोगिक तौर पर प्रारंभ हो गया है. जिला स्तर पर बंदोबस्त पदाधिकारियों द्वारा किये जा रहे विशेष सर्वेक्षण कर्मियों की टैगिंग के संबंध में सभी बंदोबस्त पदाधिकारियों को आवश्यक निदेश देते हुए पत्र दिया जा रहा है.
सॉफ्टवेयर की कमियों के दूर होने के बाद कर्मचारियों की संख्या , उपस्थिति और उनके द्वारा किये गये काम का ब्योरा अपडेट रहेगा. मानीटरिंग भी प्रभावी होगी. अभी भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय , विशेष सर्वेक्षण कर्मियों के खिलाफ की गयी कार्रवाई, हटाये गये विशेष सर्वेक्षण कर्मियों, त्याग-पत्र देने वाले कर्मियों आदि का ब्योरा अपडेट करने की कोई निश्चित प्रक्रिया वर्तमान में नहीं है. इस कारण सॉफ्टवेयर में कर्मियों की वास्तविक संख्या पता नहीं चल पाती है. उसमें समानता नहीं रह जाती है. विभिन्न जानकारियों की समीक्षा में भी दिक्कत है. इन खामी को दूर होने से सेवा पुस्तिका तक एकरूपता से अपडेट की जा सकेगी.
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राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री आलोक मेहता ने कहा कि लोगों को भ्रष्टाचार मुक्त व जिम्मेदार सिस्टम उपलब्ध कराने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है. जरूरत के अनुसार नियम बदले जायेंगे. तकनीक की मदद ली जायेगी. जनता को किसी भी तरह की दिक्कत न हो, सरकार यही चाहती है.
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