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Bihar News: सहरसा को जाम से मुक्ति! 12 एकड़ में बनेगा अत्याधुनिक बस स्टैंड, यात्रियों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं

Updated at : 01 Oct 2025 1:16 PM (IST)
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सांकेतिक तस्वीर

सांकेतिक तस्वीर

Bihar News: भीषण जाम से जूझते सहरसा को जल्द ही नई सौगात मिलने वाली है. प्रशासन ने शहर से बाहर बस स्टैंड बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है, जिससे यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा.

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Bihar News: सहरसा के लोगों के लिए यह खबर राहत भरी है. लंबे समय से शहर की सबसे बड़ी समस्या — ट्रैफिक जाम — अब खत्म होने की ओर बढ़ रही है. जिलाधिकारी दीपेश कुमार ने पटुवाहा पेट्रोल पंप के पास 12 एकड़ सरकारी जमीन पर अत्याधुनिक बस स्टैंड बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. यह पहल न केवल यातायात को सुगम बनाएगी, बल्कि शहर की छवि और बस सेवाओं को भी व्यवस्थित करेगी.

जाम से मिलेगी बड़ी राहत

सहरसा का मौजूदा बस स्टैंड शहर के भीतर होने के कारण रोजाना हजारों वाहनों के दबाव से जाम की समस्या बढ़ जाती है. नए बस स्टैंड के निर्माण के बाद बसों का परिचालन बाईपास के जरिए होगा, जिससे शहर के बीचोंबीच भारी वाहनों का दबाव कम होगा. अनियंत्रित बस स्टॉपिंग की समस्या घटेगी और शहर का ट्रैफिक फ्लो बेहतर होगा. विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से लोगों का समय बचेगा और शहरवासियों को मानसिक तनाव से भी राहत मिलेगी.

नया बस स्टैंड यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जा रहा है. यहां छत, बैठने की पर्याप्त जगह, स्वच्छ शौचालय, पीने का पानी और सुरक्षा व्यवस्था जैसी बुनियादी सुविधाएं होंगी. शहर से बाहर बस स्टैंड बन जाने से बाहर से आने वाले यात्रियों के लिए भी बेहतर अनुभव होगा और सहरसा की छवि एक व्यवस्थित नगर के रूप में उभरेगी.

स्थानीय लोग कर रहे स्वागत

सहरसा के निवासी ताबिश मेहर ने प्रशासन के इस निर्णय को सकारात्मक बताया. उनके अनुसार, “शहर के भीतर बस स्टैंड होने से न केवल जाम बढ़ता है, बल्कि प्रदूषण भी बढ़ता है. नए बस स्टैंड से यातायात में सुधार होगा और पर्यावरण भी स्वच्छ रहेगा.” स्थानीय लोगों का मानना है कि यह पहल शहर को नई दिशा देगी और आम यात्रियों के लिए सुरक्षित एवं सुविधाजनक यात्रा सुनिश्चित करेगी.

यह योजना उम्मीदों से भरी है, लेकिन निर्माण की गुणवत्ता को लेकर आम लोगों की चिंता भी सामने आई है. उनका कहना है कि अक्सर बड़ी परियोजनाएं मानक के अनुरूप नहीं बनतीं और कुछ ही वर्षों में जर्जर हो जाती हैं. यदि नया बस स्टैंड टिकाऊ और मजबूत नहीं हुआ, तो यह योजना अपने मकसद में सफल नहीं हो पाएगी. इसके अलावा, यदि स्थान असुविधाजनक साबित हुआ तो यात्री इसका पूरा लाभ नहीं उठा पाएंगे.

प्रशासनिक निगरानी होगी अहम

परियोजना की सफलता पूरी तरह निर्माण की गुणवत्ता और उसके रख-रखाव पर निर्भर करेगी. प्रशासनिक निगरानी और नियमित देखरेख ही सुनिश्चित करेगी कि बस स्टैंड यात्रियों की सुविधा के लिए लंबे समय तक उपयोगी बना रहे. स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि यह परियोजना केवल कागजों तक सीमित न रहकर धरातल पर मजबूत और टिकाऊ रूप में सामने आए.

सहरसा लंबे समय से भीषण जाम और अव्यवस्थित यातायात से परेशान रहा है. नया बस स्टैंड इस समस्या के स्थायी समाधान के रूप में देखा जा रहा है. बसों का परिचालन शहर से बाहर होने से शहर का ट्रैफिक हल्का होगा और चारों दिशाओं के लिए यात्रा सुगम बनेगी. इससे न केवल स्थानीय लोग बल्कि दूर-दराज से आने वाले यात्री भी लाभान्वित होंगे.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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