बिहार में शराबबंदी कानून पर सवाल, अनंत सिंह बोले- इससे बढ़ रहा अवैध कारोबार, बिक्री शुरू हो

Published by :Paritosh Shahi
Published at :17 Apr 2026 3:10 PM (IST)
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Anant Singh

अनंत सिंह, विधायक

Bihar Liquor Ban: बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर एक बार फिर सियासत गरमा गई है. सत्ता पक्ष के विधायक ही अब इसके नुकसान गिनाते हुए इसे खत्म करने की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि इससे अवैध कारोबार बढ़ा है और राज्य को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है.

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Bihar Liquor Ban: बिहार में नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से हटते ही शराबबंदी कानून को लेकर बहस फिर तेज हो गई है. अब सरकार में शामिल दलों के नेता ही इस कानून पर सवाल उठाने लगे हैं. कई विधायक इसे खत्म करने या इसकी समीक्षा करने की मांग कर रहे हैं. जदयू विधायक अनंत सिंह ने कहा कि बिहार में शराबबंदी पूरी तरह सफल नहीं हुई है. शहर से लेकर गांव तक लोग आज भी शराब पी रहे हैं. फर्क सिर्फ इतना है कि अब लोग छिपकर शराब पीते हैं.

पहले स्थिति ठीक थी, अब हालात बदल गए

अनंत सिंह ने कहा कि जब यह कानून लागू हुआ था, तब उन्होंने इसका समर्थन किया था. शुरुआत में कुछ समय तक स्थिति ठीक रही, लेकिन अब हालात बदल गए हैं. सही शराब नहीं मिलने के कारण लोग गलत और जहरीली शराब पी रहे हैं. इससे उनकी सेहत खराब हो रही है.

अनंत सिंह ने कहा कि सरकार को शराब की बिक्री फिर से शुरू करनी चाहिए. साथ ही जो लोग शराब पीकर सड़क पर हंगामा करें, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. इससे सरकार को राजस्व का नुकसान भी नहीं होगा. उन्होंने कहा कि वह मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मिलकर इस मुद्दे पर बात करेंगे.

उपेंद्र कुशवाहा के विधायक क्या बोले

इससे पहले राष्ट्रीय लोक मोर्चा के विधायक माधव आनंद भी इसी तरह की मांग कर चुके हैं. उन्होंने कहा कि शराबबंदी से ज्यादा जरूरी लोगों को नशा छोड़ने के लिए जागरूक करना है. इस कानून से राज्य को आर्थिक नुकसान हो रहा है और गलत लोगों को फायदा मिल रहा है.

माधव आनंद ने कहा कि दस साल से यह कानून लागू है और अब इसकी समीक्षा जरूरी है. बिहार को विकास के लिए पैसे की जरूरत है, लेकिन शराबबंदी के कारण राजस्व की कमी हो रही है.

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मांझी भी उठा चुके हैं सवाल

केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी भी कई बार इस कानून पर सवाल उठा चुके हैं. उन्होंने कई बार कहा है कि इस कानून का सबसे ज्यादा नुकसान गरीब लोगों को हुआ है. अमीर लोग महंगी शराब खरीद लेते हैं, जबकि गरीब लोग सस्ती और जहरीली शराब पीकर अपनी जान गंवा देते हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि इस कानून के कारण कई गरीब लोग जेलों में बंद हैं. ऐसे में सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और जरूरत पड़े तो बदलाव करना चाहिए. बिहार में शराबबंदी कानून एक बार फिर बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है और नई सरकार के सामने इस पर फैसला लेना एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है.

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Paritosh Shahi

लेखक के बारे में

By Paritosh Shahi

परितोष शाही डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. अभी प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, सिनेमा और खेल (क्रिकेट) में रुचि रखते हैं.

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