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जमीन सर्वे के अब तक महज एक करोड़ आवेदन, राजस्व विभाग बना रहा फिर नया प्लान

Updated at : 30 Jan 2025 8:26 AM (IST)
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Revenue Department

Revenue Department

Bihar Land Survey: पिछले कई महीनों में भूमि धारकों द्वारा निर्धारित प्रपत्रों में स्व-घोषणात्मक प्रारूप में सहायक दस्तावेजों के साथ लगभग एक करोड़ आवेदन सत्यापन के लिए ब्लॉक कार्यालयों और अन्य राजस्व कार्यालयों (ऑनलाइन मोड) में जमा किए गए हैं.

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Bihar Land Survey: पटना. बिहार में जमीन सर्वे का काम बेहद धीमा चल रहा है. एक ओर जहां रैयतों को दस्तावेज खोजने में वक्त लग रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकार नित्य नये फरमान लेकर आ रही है. राजस्व विभाग के सूत्रों की माने तो पिछले कई महीनों में भूमि धारकों द्वारा निर्धारित प्रपत्रों में स्व-घोषणात्मक प्रारूप में सहायक दस्तावेजों के साथ लगभग एक करोड़ आवेदन सत्यापन के लिए ब्लॉक कार्यालयों और अन्य राजस्व कार्यालयों (ऑनलाइन मोड) में जमा किए गए हैं.

दस्तावेज खोजने के लिए मिला था समय

राज्य सरकार ने सितंबर में भूमि धारकों को जरूरी दस्तावेज जमा करने के लिए समय दिया था, क्योंकि लोगों से शिकायतें मिल रही थी कि उन्हें जमीन पर अपने दावे के समर्थन में जरूर दस्तावेज हासिल करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, चाहे वह जमाबंदी, स्वामित्व या फिर बंटवारे के कागज हों. राजस्व और भूमि सुधार विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने कहा कि किस्तवार और खानापूर्ति की प्रक्रिया के साथ भूमि सर्वेक्षण फरवरी के अंत से गति पकड़ेगा.

फरवरी से एक बार फिर तेज होगी मुहिम

बिहार में चल रहा जमीन सर्वेक्षण का काम फरवरी अंत से तेज होनेवाला है, जिसके तहत सीमाओं को मापने और किस्तवार/ खानापूर्ति की प्रक्रिया सभी जिलों में शुरू होगी. जिसकी जानकारी राजस्व और भूमि सुधार विभाग के शीर्ष अधिकारियों ने दी. किस्तावर और खानापूर्ति की प्रक्रिया फरवरी के अंत से राज्य के सभी जिलों में शुरू होगी. उसके बाद, हम मसौदा पब्लिश करेंगे और सर्वेक्षण प्रक्रियाओं के अनुसार आपत्तियां और दावे मांगेंगे.

सार्वजनिक कार्यक्रमों में बेचे जा रहे हैं नक्शे

अधिकारियों ने बताया कि राजस्व विभाग पिछले कुछ महीनों में सर्वेक्षण के लिए सभी कागजात कार्यों को पूरा करने में व्यस्त रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भूमि धारकों को उनके आवेदन जमा करने के लिए गांवों के डिजिटल मानचित्र सहित दस्तावेज आसानी से उपलब्ध हों, ताकि भूमि मालिक आसानी से अपने भूखंडों या भूमि के हिस्सों का पता लगा सकते हैं जो उनके कब्जे में हैं. अधिकारियों ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में कई सार्वजनिक कार्यक्रमों और मेलों में ये नक्शे बेचे गए.

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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