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Bihar Elections 2025 : पटना में महिला शक्ति को कमान, 541 बूथों पर संभालेंगी मतदान की बागडोर

Updated at : 22 Oct 2025 7:51 AM (IST)
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Women take charge in Patna will control voting at 541booths

Women take charge in Patna will control voting at 541booths

Bihar Elections 2025: इस बार पटना के मतदान केंद्रों पर तस्वीर बदली होगी. 6 नवंबर को पटना की चुनावी तस्वीर होगी खास . मतदान केंद्रों पर पहली बार बड़ी संख्या में महिलाएं और दिव्यांगकर्मी निभाएंगे लोकतंत्र के प्रहरी का दायित्व. मतदाता कतार में होंगे और सामने होंगी महिला कर्मियों की पूरी टीम.

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Bihar Elections 2025: छह नवंबर को होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में पटना जिला प्रशासन ने मतदान व्यवस्था को लेकर खास पहल की है. जिले के 14 विधानसभा क्षेत्रों में कुल 541 मतदान केंद्रों की कमान इस बार महिला मतदान कर्मियों के हाथ में होगी. 14 बूथों पर दिव्यांग कर्मी चुनाव प्रक्रिया का संचालन करेंगे. चुनाव आयोग के निर्देश पर बनाए गए 469 मॉडल बूथों में सुविधाओं को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं.

महिला कर्मियों की बढ़ी भूमिका

जिला निर्वाचन कार्यालय ने बताया कि महिला मतदानकर्मी बूथों पर पीठासीन अधिकारी से लेकर तीसरे मतदान पदाधिकारी तक की सभी जिम्मेदारियां निभाएंगी. यानी इन केंद्रों पर चुनावी प्रक्रिया पूरी तरह महिलाओं के हवाले होगी. इतना ही नहीं, सुरक्षा व्यवस्था में भी महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की जा रही है.

यह कदम चुनाव में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने और मतदाताओं में भरोसा जगाने के उद्देश्य से उठाया गया है. वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में केवल 100 बूथों पर महिला कर्मियों को तैनात किया गया था, जबकि इस बार उनकी संख्या पांच गुना बढ़ाई गई है.

लोकतंत्र के उत्सव में दिव्यांगकर्मी भी आगे

चुनाव के दौरान समावेशी भागीदारी पर जोर देते हुए इस बार दिव्यांगकर्मियों को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है. उन्हें जिले के 14 बूथों पर मतदान कार्य का दायित्व मिला है. यह पहल न सिर्फ प्रशासन की संवेदनशीलता को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि अब चुनाव केवल मतदाताओं का नहीं, बल्कि कर्मियों के प्रतिनिधित्व का भी उत्सव बन चुका है. वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में जहां केवल चार बूथों पर दिव्यांग कर्मियों ने मतदान कार्य किया था, वहीं इस बार उनकी संख्या तीन गुना से अधिक हो गई है.

लोकतंत्र की भागीदारी में सबको शामिल करने के मकसद से इस बार 14 बूथों पर दिव्यांग कर्मियों को जिम्मेदारी दी गई है. इन कर्मियों को प्रशिक्षण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं ताकि वे मतदान प्रक्रिया को सुचारू रूप से संपन्न करा सकें. पिछली बार भी जिले में 14 दिव्यांगकर्मियों द्वारा बूथ संचालन कराया गया था, लेकिन इस बार व्यवस्थाओं को और बेहतर किया गया है.

मॉडल बूथों से बदलेगी मतदान की तस्वीर

मतदान को आसान और प्रेरणादायक बनाने के लिए पटना में 469 मॉडल बूथ बनाए जा रहे हैं. इन बूथों पर मतदाताओं के स्वागत के लिए बेहतर सजावट, पेयजल, बैठने की व्यवस्था और सेल्फी प्वाइंट जैसी सुविधाएं दी जाएंगी. प्रशासन का कहना है कि मॉडल बूथों का उद्देश्य मतदान को त्योहार जैसा अनुभव कराना है, ताकि मतदाताओं की भागीदारी और बढ़े.

रैंडमाइजेशन से पारदर्शी व्यवस्था

जिला निर्वाचन कार्यालय में मंगलवार को मतदान कर्मियों एवं पदाधिकारियों का दूसरा रैंडमाइजेशन किया गया. यह प्रक्रिया कलेक्ट्रेट स्थित एनआईसी में सामान्य प्रेक्षकों और जिला पदाधिकारियों की मौजूदगी में संपन्न हुई. डीएम ने बताया कि कुल 25,084 मतदान दल पदाधिकारियों और कर्मियों को विधानसभा क्षेत्रों में आवंटित किया गया है, जबकि 386 माइक्रो-ऑब्जर्वर की नियुक्ति की गई है.
इस बार वीमेन बूथ, पीडब्ल्यूडी बूथ और यूथ बूथ की संख्या क्रमशः 541, 14 और तीन रखी गई है. जिले के कुल 5,677 मतदान केंद्रों में 10 प्रतिशत रिजर्व सहित कुल 6,271 मतदान दलों का गठन किया गया है. डीएम के अनुसार, यह रैंडमाइजेशन प्रक्रिया चुनावी निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है.

महिला शक्ति और प्रशासन की साझी पहल

यह चुनाव केवल मतदाताओं के लिए नहीं, बल्कि महिला और दिव्यांग कर्मियों के लिए भी ऐतिहासिक साबित होगा. अधिकारी मानते हैं कि महिला कर्मियों की उपस्थिति से मतदान केंद्रों पर अनुशासन, संवेदनशीलता और विश्वास का माहौल बनेगा. दिव्यांगकर्मी यह संदेश देंगे कि लोकतंत्र में कोई सीमित नहीं, बल्कि सभी सहभागी हैं. प्रशासन को भरोसा है कि इस बार पटना जिले की चुनावी व्यवस्था न केवल सुरक्षित और पारदर्शी होगी, बल्कि प्रेरणादायक भी सिद्ध होगी.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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