‘भोजपुरी के स्वर शारदा’ कार्यक्रम : शारदा सिन्हा को किया याद

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 23 Dec 2024 12:51 AM

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बिहार म्यूजियम में रविवार को लोकगायिका शारदा सिन्हा की स्मृति में आयोजित ‘भोजपुरी के स्वर शारदा’ कार्यक्रम दो सत्रों में हुआ.

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लाइफ रिपोर्टर @ पटना

बिहार म्यूजियम में रविवार को लोकगायिका शारदा सिन्हा की स्मृति में आयोजित ‘भोजपुरी के स्वर शारदा’ कार्यक्रम दो सत्रों में हुआ. पहले सत्र में संवाद और व्याख्यान हुआ, जबकि दूसरे सत्र में शारदा सिन्हा को सांगीतिक श्रद्धांजलि अर्पित की गयी. लोकगायिका चंदन तिवारी ने लोकगायक आदित्य राजन और मिसरी बैंड के साथ कई प्रस्तुतियां दीं, जिनमें ‘जगदंबा घर में दियरा…, कहे तोहसे सजना…, जैसे गीतों पर श्रोता मुग्ध हो गये. साथ ही ‘पहिले पहिल हम छठ कइनी… और दुखवा मिटाईं हे छठी मइया… प्रस्तुत किए. पर्यावरण सुरक्षा के विषय पर कैलाश गौतम की कविता ‘चला चलीं कहीं बनवा के पार हिरना एही बनवा में..’ से जागरूकता फैलाने का प्रयास किया गया. मौके पर कॉफी टेबल बुक ‘जगदंबा घर में दियरा…’ पुस्तक का लोकार्पण किया गया. इसमें शारदा सिन्हा के नौ गीतों का संकलन है. छात्रा शान्या प्रसाद ने शारदा सिन्हा की पेंटिंग बना नयी दिल्ली से भेजी है. उसे बिहार म्यूजियम में रखा जायेगा. वह दिल्ली में आर्ट सीख रही हैं.

शारदा जी ने भोजपुरी गीतों से बिहार को एक सूत्र में बांधा, छठ गीतों को दुनिया में फैलाया : हरिवंश

इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि राज्य सभा के उपसभापति हरिवंश ने भोजपुरी में अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि शारदा जी ने भोजपुरी गीतों के माध्यम से बिहार को एक सूत्र में बांधने का कार्य किया. उनके गीतों में परिवार के सभी सदस्य एक साथ बैठकर आनंद ले सकते हैं. इसलिए, भोजपुरी समाज को अश्लीलता से बचाने के लिए गंभीर रूप से सोचने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि शारदा जी ने छठ गीतों को पूरी दुनिया में फैलाया और छठ मइया, जिनकी हम सब पूजा करते हैं, शारदा सिन्हा के लिए बेहद प्रिय थीं. हरिवंश ने बताया कि पटना में पहली बार उन्हें शारदा जी का गायन सुनने का अवसर मिला. आज भी जब वह अकेले होते हैं, तो शारदा जी और भोजपुरी के गीतों को सुनते हैं. शारदा जी के गीतों में पूरबी इलाके की पीड़ा, चेतना और अतीत का बखूबी चित्रण मिलता है. उनके गीतों में पलायन और प्रवासन की विवशता, गिरमिटिया देशों में गये श्रमिकों के दर्द को महसूस किया जा सकता है.

शारदा सिन्हा बिहार की पहचान : प्रेम

पूर्व विधानपरिषद सदस्य और वरिष्ठ आलोचक प्रेम कुमार मणि ने कहा कि शारदा सिन्हा बिहार की पहचान थीं, जिन्होंने संस्कार गीत, भजन, सामाजिक गीत और छठ गीतों से विशेष पहचान बनाई. उन्होंने पुरबिया संस्कृति और लोक की व्यापकता पर चर्चा की और बिहारी समाज से उनकी परंपरा को आगे बढ़ाने की अपील की, साथ ही शारदा जी के नाम पर सांस्कृतिक संस्था बनाने की मांग की.

शारदा सिन्हा के साथ अपने संस्मरणों को किया साझा

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संग्रहालय के महानिदेशक अंजनी कुमार सिंह ने कहा कि संग्रहालय बनने के दौरान शारदा सिन्हा से बात होती थी. वह समिति की सदस्य भी थी. उनका कहना था कि बिहार संग्रहालय धरोहरों को संजोने के अलावे कला संस्कृति का भी केंद्र भी बने. इसके साथ ही, शारदा सिन्हा ने कहा कि महगी, भोजपुरी व मैथिली गीतों का संकलन कराइए. आने वाली पीढ़ियों को संग्रह मिलेगा. इसका बाद शारदा सिन्हा के साथ अपने संस्मरणों को साझा किया. उन्होंने मॉरीशस में शारदा सिन्हा जी के गीतों के लोकप्रियता पर भी बात की. जब मनोज तिवारी के साथ एक कार्यक्रम में गये थे, तब वहां के लोगों ने शारदा सिन्हा के गीतों को गाने का आग्रह किया था.

निर्गुण के जरिये भरत शर्मा व्यास ने दी श्रद्धांजलि

लोकनायक भरत शर्मा व्यास ने कहा कि शारदा सिन्हा ने भोजपुरी खातिर जीवन न्योछावर कर दिया. उनसे आने वाले गायकों को प्रेरणा लेने की जरूरत है. उन्होंने अपने एक निर्गुण के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित की. ‘भंवरवा के तोहरा संग जाइ.., के तोहरा संग जाइ.., आवे के बेरिया सब कोई जाने.., दुअरा पर बाजेला बधाई’ की प्रस्तुति दे दर्शकों को मुग्ध कर दिया.

जब शारदा जी गाती, तो मैं तबला बजाता था : भारती

लोकगायक भरत सिंह ‘भारती’ ने कहा कि शारदा सिन्हा जी से पहली मुलाकात बोकारो में एक कार्यक्रम में हुआ था. जिसके बाद समस्तीपुर आने का आग्रह किया. लेकिन, किसी काम पर छह माह बाद जब गये तो शारदा सिन्हा से मिलने पहुंचे. वहां करीब छह से सात दिन रहे. हर दिन संगीत का अभ्यास करता. जब शारदा जी गाती तो मैं तबला बजाता और जब मैं गाता तो वह हारमोनियम बजाती. वहीं, वरिष्ठ पत्रकार संतोष सिंह की कविता ‘शारदा तत्त्व’ के भोजपुरी अनुवाद का पोस्टर भी जारी हुआ. कार्यक्रम का संचालन आखर परिवार के सदस्य संजय सिंह ने किया. धन्यवाद ज्ञापन संग्रहालय के अपर निदेशक अशोक सिन्हा ने किया.

ये रहे मौजूद:

आयोजन में मणिकांत ठाकुर, विनोद अनुपम, डॉ आलोक पांडेय, पी राज सिंह, प्रो अनिल प्रसाद, यशेन्द्र प्रसाद, यशवंत मिश्र, मोहन जी श्रीवास्तव, कृष्णा पांडेय व अन्य.

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