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BSSC परचा लीक मामला : एक और IAS होंगे गिरफ्तार! बोले सीएम, पूरी ईमानदारी से जांच करे SIT

Updated at : 01 Mar 2017 7:38 AM (IST)
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BSSC परचा लीक मामला : एक और IAS होंगे गिरफ्तार! बोले सीएम, पूरी ईमानदारी से जांच करे SIT

पटना : बीएसएससी पेपर लीक कांड में एसआइटी बड़ी कार्रवाई की तैयारी में है. एक आइएएस अधिकारी के चार करीबियों समेत छह लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है. उनसे पूछताछ हुई है, जिसमें पेपर लीक कराने में अध्यक्ष सुधीर कुमार के साथ उनकी सहभागिता की पुष्टि हुई है. इस पूछताछ में मिली जानकारियों […]

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पटना : बीएसएससी पेपर लीक कांड में एसआइटी बड़ी कार्रवाई की तैयारी में है. एक आइएएस अधिकारी के चार करीबियों समेत छह लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है. उनसे पूछताछ हुई है, जिसमें पेपर लीक कराने में अध्यक्ष सुधीर कुमार के साथ उनकी सहभागिता की पुष्टि हुई है. इस पूछताछ में मिली जानकारियों के अाधार पर एसआइटी बुधवार को उक्त आइएएस अिधकारी को गिरफ्तार कर सकती है. उक्त अधिकारी एक बड़े ओहदे पर कार्यरत हैं.

सूत्रों की मानें, तो एसआइटी ने गोपनीय तरीके से कोर्ट में वारंट के लिए प्रे कर दिया है. कोर्ट से इजाजत मिलते ही एसआइटी गिरफ्तारी कर सकती है. इसके लिए पूरी तैयारी कर ली गयी है. जिन लोगों को हिरासत में लिया गया है, उनमें से तीन कदमकुआं से उठाये गये हैं.
जिस अफसर की गिरफ्तारी की तैयारी है, उनके शहर से भाग जाने की भी आशंका है, इसलिए एसआइटी ने रेलवे स्टेशन व हवाई अड्डे पर अपने स्पाइ लगा रखे हैं. उन पर नजर रखी जा रही है. खास बात यह है कि जिस अफसर की गिरफ्तारी की तैयारी चल रही है, उनके आवास का पता लगाने में एसआइटी के पसीने छूट गये. अफसर के ड्राइवर और गार्ड को भी उनके आवास का पता नहीं मालूम है. वह सरकारी गाड़ी को कभी अपने आवास पर लेकर नहीं जाते हैं.

सूत्रों की मानें, तो इनकम टैक्स गोलंबर के पास अपनी दोपहिया गाड़ी रोज लगाते हैं और वहीं से सरकारी गाड़ी बुला कर आॅफिस जाते हैं. आॅफिस से आवास जाने पर भी सरकारी गाड़ी उन्हें इनकम टैक्स के पास छोड़ देती है. एसआइटी ने अब तक जिन लोगों को गिरफ्तार किया है, उनके मोबाइल फोन के कॉल डिटेल्स को खंगाल रही थी.

वहीं से पता चला है कि एक और अफसर हैं, जो पेपर लीक करानेवाले आरोपितों से बातचीत करते थे. उनकी बात अहमदाबाद के प्रिंटिंग प्रेस मालिक से भी हुई है और अन्य लोगों से भी, जो गिरफ्तार हो चुके हैं. इस संबंध में हिरासत में लिये गये लोगों ने भी एसआइटी के सामने सारा सच कबूल किया है. इसी आधार पर कोर्ट में वारंट के लिए प्रे किया गया है. अब उनकी गिरफ्तारी होनी है.
साक्ष्य मिटाने का है आरोप, सुधीर कुमार को दिलवाया था नया सिम कार्ड
एसआइटी के टारगेट पर अब जो आइएएस अधिकारी हैं, उन पर साक्ष्य मिटाने का आरोप है. सूत्रों की मानें, तो सुधीर कुमार को गिरफ्तारी से दो दिन पहले अपना मोबाइल फोन बंद करने, पटना से हजारीबाग जाने की सलाह भी इसी आइएएस अधिकारी ने दी थी. इसी ने उन्हें नया सिम कार्ड भी उपलब्ध कराया था. बताया जा रहा है कि सुधीर की गिरफ्तारी से तीन दिन पहले उनके भांजे को एसआइटी ने उठा लिया था. इसके बाद से ही सुधीर कुमार की गतिविधियां संदिग्ध हो गयी थीं. इसके बाद उनके भाई और उनकी पत्नी को एसआइटी ने उठाया था. इस बीच में उक्त आइएएस अधिकारी ने उनकी मदद की थी.
सुधीर कुमार का भांजा आशीष रिमांड पर
पटना. बीएसएससी अध्यक्ष सुधीर कुमार के भांजे आशीष कुमार को एसआइटी ने रिमांड पर लिया है, जबकि उनके प्रोफेसर भाई अवधेश कुमार और पूर्व सचिव परमेश्वर राम को रिमांड पर लेने की एसआइटी तैयारी कर रही है. एसआइटी को प्रिंटिंग प्रेस के मालिक व मैनेजर से पेपर लीक के बारे में जो जानकारी मिली है, उसके संबंध में तीनों से पूछताछ होगी और कुछ आरोपों का सत्यापन भी किया जायेगा.
पूरी ईमानदारी से जांच करे एसआइटी : मुख्यमंत्री
पटना : बिहार कर्मचारी चयन आयोग (बीएसएससी) पेपर लीक मामले पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि एसआइटी पूर्वाग्रह से ग्रसित हुए बिना पूरी ईमानदारी से जांच करे. वह न किसी के बयान पर, न ही किसी की बातों पर ध्यान दे. पूरे मामले की जांच में इसका असर नहीं होना चाहिए. मुख्यमंत्री मंगलवार को बिहार विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर हुए वाद-विवाद के बाद जवाब दे रहे थे. उन्होंने कहा कि बीएसएससी पेपर लीक की बात जब सामने आयी, तो डीजीपी और गृह सचिव को जांच करने को कहा. तो उन्होंने रिपोर्ट दी कि सही में पेपर लीक हुआ है.
इसके बाद एसआइटी का गठन किया गया. एसआइटी जांच कर रही है और साक्ष्य के आधार पर कार्रवाई भी कर रही है. किसी भी प्रकार की कार्रवाई चेहरा देख कर नहीं होती है. कोई समझौता नहीं हो सकता है. कार्रवाई होगी. मैं कुरसी पर खाली बैठनेवाले नहीं हूं. इसके लिए जनता ने जनादेश नहीं दिया है. पूरी निष्पक्षता से काम करता हूं.
मामला आयेगा, तो जांच का आदेश दूंगा. न किसी को फंसाऊंगा और न ही किसी को बचाऊंगा.किसी को बेवजह फंसाया नहीं जा रहा है. अगर किसी को बेवजह फंसाया जा रहा है, तो वे कोर्ट में दावा कर सकते हैं. जांच में जो दोषी होगा, उस पर कार्रवाई तो होगी. देश में राष्ट्रपति का पद ही ऐसा है, जिनके खिलाफ जांच नहीं हो सकती है.
प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री समेत मंत्रियों के मामलों में भी जांच हो सकती है. मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी मामले की सीबीआइ जांच का फैशन चल रहा है. कभी-कभी लगता है कि सीबीआइ जांच की मांग किसी अनुसंधान की जो प्रगति रहती है, उसमें बाधा डालने का तो नहीं होता है.
सीबीआइ को बिहार के कई मामले दिये गये, लेकिन जांच की प्रगति आगे नहीं बढ़ी. ब्रह्मेश्वर मुखिया हत्याकांड की जांच के लिए सीबीआइ से अनुशंसा की गयी थी, लेकिन उसने लौटा दिया था. दोबारा फिर अनुशंसा की गयी और सीबीआइ जांच शुरू हुई, लेकिन पुलिस ने जो जांच की थी, उससे जांच आगे नहीं बढ़ी. मुजफ्फरपुर के नवरुणा चक्रवर्ती मामले की जांच में भी सीबीआइ ने कोई प्रगति नहीं की. यही हाल पत्रकार राजदेव रंजन हत्याकांड में दिखा. पुलिस अनुसंधान से मामला आगे नहीं बढ़ा.
सीआरपीसी एक्ट में संशोधन करा दे भाजपा, जांच का दे देंगे अधिकार : नीतीश
मुख्यमंत्री ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा किसी भी मामले में पुलिस अनुसंधान पर सवाल खड़ा कर देती है. अगर पुलिस पर भरोसा नहीं है, तो वह सीआरपीसी एक्ट में संशोधन करवा दे कि भाजपा को ही किसी मामले की अनुसंधान की जिम्मेदारी दी जाये.
ऐसा संशोधन प्रस्ताव सदन में लाये, सरकार खुद उस प्रस्ताव को दोनों सदनों में पारित करवा कर केंद्र को भेज देगी. केंद्र में भाजपा की ही सरकार है, वहां से भी आसानी से मंजूरी मिल जायेगी अौर उसे राज्य में लागू कर दिया जाये. तब कोई भी घटना होगी, उसकी जांच का पुलिस पावर भाजपा को दे दिया जायेगा. उन्होंने भाजपा से कहा कि अपने आप का मजाक नहीं बनवाइए, न ही कानून का मजाक बनाइए. उन्होंने कहा कि पुलिस जांच पर जब भरोसा नहीं करते हैं और कहते हैं कि पुलिस सरकार के दबाव में जांच कर रही है, तो क्या सीबीआइ पर भी यही कहेंगे कि वह केंद्र सरकार के दबाव में काम करता है.
घोटाला सामने आने पर सबौर कृषि विवि के पूर्व कुलपति पर प्राथमिकी
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में नियुक्ति के मामले में विपक्ष ने कह दिया कि मुख्यमंत्री ने यहां फाइल पेंडिंग पड़ी रही. यह आरोप सरासर गलत है. यह मामला राजभवन से जुड़ा हुआ था. राज्यपाल ने जांच करवायी और उसके बाद जब नियुक्ति घोटाला सामने आया, तो तत्कालीन कुलपति सह जदयू विधायक मेवालाल चौधरी पर प्राथमिकी भी दर्ज करवायी. जब एफआइआर हो गयी, तो जदयू ने उन्हें पार्टी से सस्पेंड कर दिया. कहा जा रहा है कि उन्हें सरकार बचा रही है. कौन बचा रहा है, विपक्ष सबूत दें? क्या हम किसी को फोन कर रहे हैं? किसी भी पद पर रहते हुए मेरा कर्तव्य है कि जो भी मामला आये, उसकी जांच करवाये.
महागंठबंधन के एक दल को बदनाम करने की कोशिश:सीएम
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व मंत्री की बेटी के यौन शोषण मामले में पीड़िता व उनके अभिभावक मेरे पास आये थे. हमने मुख्य सचिव और डीजीपी को बुलाया और कहा कि कार्रवाई करें. विपक्ष कह रहा है कि आरोपित को बचाया जा रहा है, लेकिन कौन बचा रहा है, यह तो बताएं. महागंठबंधन के एक दल को बदनाम करने की कोशिश हो रही है. साक्ष्य मिलने पर किसी को पकड़ा जाता है. जांच हो रही है, सब कुछ सामने आयेगा.
सुशील माेदी ने विधानसभा अध्यक्ष पर लगाया आरोप, पीएस से करायी थी सिफारिश
पटना : बीएसएससी अध्यक्ष सुधीर कुमार से एसएमएस से की गयी सिफारिश का प्रिंट आउट मंगलवार को खुब वायरल हुआ. इसको लेकर दिन भर चर्चा होती रही. इस बीच पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने आरोप लगाया कि परीक्षा में बीएसएससी अध्यक्ष सुधीर कुमार से सिफारिश की गयी है.
उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष के पीएस ने बीएसएससी अध्यक्ष को एसएमएस भेज कर परीक्षार्थी के संबंध में सिफारिश की है. उन्होंने एसएमएस के प्रिंट आउट की कॉपी प्रस्तुत की. एसएमएस नौ जनवरी और 20 जनवरी, 2017 को भेजा गया है.
उन्होंने कहा कि हम विधानसभा अध्यक्ष पर आरोप नहीं लगा रहे हैं, लेकिन बीएसएससी अध्यक्ष से जदयू के बड़े नेताओं ने सिफारिश की है. बड़े-बड़े लोगों ने दबाव बनाने का काम किया. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कह रहे हैं कि विपक्ष नाम बताएं. हमलोग जांच एजेंसी नहीं है. सुधीर कुमार के बयान को सार्वजनिक करें, तो पता चलेगा. हम आइएएस एसोसिएशन की सीबीआइ जांच की मांग का समर्थन करते हैं.

मोदी ने कहा कि आइएएस अधिकारी सुधीर कुमार ने पांच फरवरी को होनेवाली परीक्षा के दिन निर्धारित अवधि के दौरान इंटरनेट सेवा बंद करने के लिए 31 जनवरी को मुख्य सचिव को पत्र लिखा था. लेकिन, गृह विभाग की विशेष शाखा के विशेष सचिव ने अध्यक्ष को भेजे पत्र में कहा कि प्रश्नपत्र लीक या अफवाह रोकने व सामान्य विधि-व्यवस्था के संधारण में इंटरनेट सेवा निलंबित किया जाना विधिसम्मत नहीं है.

आनंद किशोर पर लगाया आरोप
मोदी ने सुधीर कुमार की ओर से पटना के प्रमंडलीय आयुक्त आनंद किशोर के खिलाफ लगाये गये आरोप से संबंधित पत्र प्रस्तुत किया. सुधीर कुमार ने 30 जनवरी, 2017 को मुख्य सचिव को लिखे अपने पत्र में कहा है कि 27 मार्च, 2016 को द्वितीय स्नातक स्तर की मुख्य प्रतियोगिता परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने की जांच बिना किसी साक्ष्य के आधार पर करने की बात कही. बिना किसी केंद्र का भ्रमण किये ये इस निष्कर्ष पर कैसे पहुंचे कि पेपर लीक होने की जांच करायी जायेगी.

समाचार पत्रों या मीडिया से प्रगाढ़ संबंध रखने का यह अर्थ नहीं है कि परीक्षा जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में बिना प्राधिकार के हस्तक्षेप करते हुए किसी वैधानिक आयोग की छवि खराब की जाये. जहां तक आयोग को विभिन्न सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि आनंद किशोर जान-बूझ कर कोचिंग संस्थानों की मंशा सार्थक करने में लगे हुए थे. सुधीर कुमार ने आनंद किशोर के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई करने के लिए मुख्य सचिव को लिखा.

सीएम का करारा जवाब, कहा- कच्चा चिट्ठा खुला, तो मुंह नहीं दिखा सकते
सीएम ने कहा कि विपक्ष एक एसएमएस वायरल करा रहा है. इसमें विस अध्यक्ष के ओएसडी द्वारा बीएसएससी अध्यक्ष को एक एसएमएस किया गया दिखाया गया है. यह एएनएम परीक्षा से संबंधित है. सार्वजनिक जीवन में लोग ऐसी सिफारिश करते रहे हैं, ताकि अभ्यर्थी के साथ अन्याय न हो. इसमें कहां कहा गया है कि प्रश्नपत्र की एक प्रति मुहैया कराया जाये? उन्होंने कहा कि कौन-कौन और किसको-किसको फोन करते हैं, सब पता है. कच्चा चिट्ठा खुला, तो मुंह नहीं दिखा सकते हैं, लेकिन मेरी अपनी मर्यादा है. मैं ऐसी बातें नहीं करता हूं.
आइएएस एसोसिएशन का विरोध तीसरे दिन भी जारी, काला बिल्ला लगा कर किया काम
पटना : बीएसएससी अध्यक्ष सुधीर कुमार की गिरफ्तारी के विरोध में आइएएस एसोसिएशन का प्रदर्शन लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा. मंगलवार को भी सचिवालय स्थित सभी विभागों में तैनात अधिकारियों ने काला बिल्ला लगा कर काम किया. जिन अधिकारियों ने दूसरे दिन किसी कारण से काला बिल्ला नहीं लगाया था, उन्होंने ने भी तीसरे दिन काला बिल्ला लगा कर काम किया.
इन्हें अलग-अलग कर्मचारी संगठनों का समर्थन भी मिलता जा रहा है. इस वजह से इनका आंदोलन तेज और व्यापक होता जा रहा है. मुख्य सचिवालय में मंगलवार को मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह की अध्यक्षता में योजना एवं विकास विभाग की विशेष बैठक होनी थी, जिसमें विभागीय खर्च को लेकर लेखा-जोखा पेश होना था.
साथ ही खर्च की रफ्तार को तेज करने के लिए सभी जिलों के डीएम और अन्य अधिकारियों के साथ सुबह 11 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग भी होनी थी. लेकिन, इस विशेष बैठक में योजना एवं विकास विभाग के संयुक्त सचिव अरविंद चौधरी को छोड़ कर अन्य कोई अधिकारी नहीं पहुंचे. स्थिति यह हो गयी कि मुख्य सचिवालय के सभागार में मुख्य सचिव और संयुक्त सचिव के अलावा अन्य कोई अधिकारी ही नहीं बैठे थे.

इसके कारण यह बैठक 10 मिनट इंतजार करने के बाद बिना किसी नतीजा के ही समाप्त हो गयी. इसी तरह का आलम अन्य विभागों में भी रहा, न कोई बैठक और न ही कोई आदेश का पालन. सिर्फ रूटीन की फाइलें ही अनमने भाव से अधिकारी निबटाते नजर आये. इधर, आइएएस एसोसिएशन सुधीर कुमार की जमानत के लिए कोर्ट में जाने की योजना बना रहा है. जल्द ही सभी जरूरी कागजों को जुटा कर कोर्ट में इसके लिए अर्जी दी जायेगी.

एसोसिएशन के ज्ञापन का इंतजार, ऐसी कार्रवाई होगी कि गवर्नेंस के लिए माइल स्टोन साबित होगा : सीएम
पटना. पेपर लीक मामले में बीएसएससी अध्यक्ष सुधीर कुमार की गिरफ्तारी का आइएएस एसोसिएशन द्वारा विरोध करने और सीबीआइ जांच की मांग करने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं तो उनके मेमोरेंडम का इंतजार कर रहा हूं. आइएएस एसोसिएशन के पदाधिकारी राज्यपाल से मिले.
मुझसे कहा गया कि मेरे पास भी ज्ञापन आयेगा, लेकिन न तो उनकी ओर से और न ही राजभवन की ओर से कोई सूचना है. मैं तो मेमोरेंडम का इंतजार कर रहा हूं. मेमोरेंडम के एक-एक शब्द को पढ़ूंगा. उसे पूरे तौर पर एग्जामिन कराऊंगा. जो भी संविधान, कानून और कोड के अनुसार होगा, कार्रवाई करूंगा. एक-एक बिंदु पर पूरी छानबीन कर कार्रवाई की जायेगी, गवर्नेंस के क्षेत्र में माइल स्टोन साबित होगा.
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