नीतीश सरकार ने लिया राज्य की जेलों की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला

Updated at : 19 Jan 2017 7:08 AM (IST)
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नीतीश सरकार ने लिया राज्य की जेलों की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला

पटना : राज्य के जेलों में सुरक्षा चूक के कारण पिछले तीन साल में कैदियों के भागने की करीब आधा दर्जन घटनाएं हो चुकी हैं. इन सभी घटनाओं की समीक्षा के बाद जेलों में सुरक्षा बंदोबस्त और इन्हें बहाल करने में तैनात कर्मियों की लापरवाही भी सामने आयी है. अब जेल विभाग ने राज्य की […]

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पटना : राज्य के जेलों में सुरक्षा चूक के कारण पिछले तीन साल में कैदियों के भागने की करीब आधा दर्जन घटनाएं हो चुकी हैं. इन सभी घटनाओं की समीक्षा के बाद जेलों में सुरक्षा बंदोबस्त और इन्हें बहाल करने में तैनात कर्मियों की लापरवाही भी सामने आयी है. अब जेल विभाग ने राज्य की सभी जेलों की सुरक्षा व्यवस्था का ऑडिट कराने का निर्णय लिया है.
इसके तहत राज्य में मौजूद आठ केंद्रीय कारा, 32 मंडल जेल और 18 उप-काराओं में सुरक्षा व्यवस्था की जांच की जायेगी. इस दौरान सभी जेलों में इस बात की बारीकी से जांच की जायेगी कि सुरक्षा के तय मानकों का कितना पालन किया जा रहा है. सुरक्षा मानकों के पालन में किस पदाधिकारी के स्तर पर लापरवाही बरती जा रही है या मानकों के पालन में कौनसी कमी मौजूद है. अगर इस सुरक्षा ऑडिट के दौरान किसी अधिकारी या पदाधिकारी की लापरवाही सामने आती है, तो उन पर सख्त कार्रवाई की जायेगी. कारा विभाग ने अपने स्तर से इसके लिए विशेष प्रस्ताव तैयार कर लिया है. जनवरी के अंत से राज्य की सभी तरह की 58 जेलों में सुरक्षा ऑडिट शुरू होने की संभावना है.
औचक निरीक्षण का सिलसिला होगा शुरू
राज्य की सभी 58 जेलों में औचक निरीक्षण या जांच का सिलसिला भी जल्द ही शुरू होने जा रहा है. इस बार के औचक निरीक्षण के दौरान सभी जिलों की जांच मुख्यालय के स्तर पर बनायी गयी विशेष टीम के जरिये करायी जायेगी. मुख्यालय के ही अधिकारियों को सिर्फ इस बात की जानकारी होगी कि किस दिन किस स्थान पर किस जेल की जांच करनी है. जांच में सहयोग के लिए संबंधित जिला के अधिकारियों को शामिल किया जायेगा. औचक निरीक्षण की मॉनीटरिंग सीधे मुख्यालय स्तर पर की जायेगी. जांच में दोषी पाये जानेवाले कर्मचारियों पर कार्रवाई भी तुरंत ही मुख्यालय के स्तर पर की जायेगी.
सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
पिछले दो महीने के दौरान बिहार की दो जेलों में दो बड़ी घटनाएं हुईं, जिसके बाद से जेलों की सुरक्षा व्यवस्था पर कई स्तर पर सवाल उठने लगे हैं. पहली घटना सीवान जेल में बंद बाहुबली मो शहाबुद्दीन की सेल्फी वाली तस्वीर और बक्सर जेल से फरार हुए पांच कैदी की घटना ने पूरे प्रशासन को परेशान कर दिया है. इन घटनाओं के मद्देनजर जेल विभाग ने सभी जेलों की सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद बनाने के लिए कवायद तेज कर दिया है.
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