जनधन खाते के जरिये जारी है गोरखधंधा, कालाधन हो रहा सफेद

Updated at : 15 Dec 2016 7:55 AM (IST)
विज्ञापन
जनधन खाते के जरिये जारी है गोरखधंधा, कालाधन हो रहा सफेद

कौशिक रंजन पटना : नोटबंदी के बाद ऐसे दर्जनों बैंक खातों में दनादन धन जमा हुए हैं, जिनमें सालों से या खाता खुलने के बाद से कोई ट्रांजेक्शन ही नहीं हुआ है. इनमें ज्यादातर जन-धन योजना के तहत खुले खाते हैं. इसके खातेदारों को पता ही नहीं और संबंधित व्यक्ति के बैंक अकाउंट में तुरंत […]

विज्ञापन
कौशिक रंजन
पटना : नोटबंदी के बाद ऐसे दर्जनों बैंक खातों में दनादन धन जमा हुए हैं, जिनमें सालों से या खाता खुलने के बाद से कोई ट्रांजेक्शन ही नहीं हुआ है. इनमें ज्यादातर जन-धन योजना के तहत खुले खाते हैं. इसके खातेदारों को पता ही नहीं और संबंधित व्यक्ति के बैंक अकाउंट में तुरंत धन आ गये, लेकिन यह धन ठहरता नहीं है. बस कुछ ही दिनों बाद वह फिर से दूसरे एकाउंट में ट्रांसफर हो जाता है. इस सारे खेल में बैंक वालों की पूरी तरह से मिलीभगत रहती है.
इस तरह से किसी जालसाज की ब्लैक मनी को व्हाइट करने का पू्रा खेल जोरों पर चल रहा है. राज्य में ऐसे अनेक मामलों की मॉनीटरिंग आयकर विभाग कर रहा है. जन-धन योजना के तहत खोले गये खातों का उपयोग खासतौर से इस तरह के गोरखधंधे में किया जा रहा है. बैंक वालों से ऐसे संदिग्ध लेन-देन वाले खातों के डिटेल मांगे गये हैं, लेकिन अभी तक सभी बैंक वालों ने आयकर को एकाउंट का पूरा डिटेल नहीं उपलब्ध कराया है. जन-धन योजना के तहत खोले गये एकाउंट का डिटेल मुहैया कराने में बैंक वाले खासतौर से कोताही बरत रहे हैं.
बेनामी एकाउंट का पहला मामला गया में
गया की टेक्सटाइल मिल एमटीआइ के मालिक मोती बाबू उर्फ मोती लाल के यहां आयकर विभाग की टीम ने मंगलवार को छापेमारी की थी, तो इस तरह से जुड़ा पूरा खेल उजागर हुआ. जांच में यह बात सामने आयी कि गया के मानपुर स्थित बैंक ऑफ इंडिया की शाखा ने करीब 30 बेनामी बैंक खातों (ज्यादातर जन-धन योजना वाले एकाउंट) में मोती बाबू के करीब 10 करोड़ रुपये ब्लैक मनी को जमा करके इसे व्हाइट कर दिया. इन पैसों को जमा करने के लिए ऐसे बैंक खातों को चुना गया, जो खुलने के बाद आज तक ऑपरेट नहीं हुए हैं और अधिकतम गरीब लोगों के ही खाते हैं.
आयकर की टीम ने ऐसे उपयोग किये गये कई खातेदारों से पूछताछ की, जिसमें यह पाया कि इसके बारे में अधिकतर को कोई जानकारी ही नहीं है. विभाग इसकी जांच कर रहा है. हालांकि करीब पांच-छह ऐसे मामले भी सामने आये हैं, जिनमें जन-धन योजना के खातेदारों को कुछ रुपये कमीशन के तौर पर देकर पैसे जमा करवाये गये हैं. राज्य में ब्लैक को व्हाइट करने के लिए बेनामी एकाउंट के उपयोग करने का यह पहला मामला सामने आया है. छापेमारी के दूसरे दिन भी आयकर की टीम गया में जमी हुई है और पूरे मामले की तहकीकात में जुटी है. बैंक के सीसीटीवी फुटेज को जब्त करके सभी बैंक कर्मियों से भी पूछताछ की गयी है.
इस तरह होता है यह गोरखधंधा
किसी संबंधित बैंक शाखा का मैनेजर पहले अपने यहां इस तरह के नन-ऑपरेशनल या डोरमेट एकाउंट की पहचान करता है. फिर ऐसे खातों में बिना खातेदार की जानकारी के किसी की ब्लैक मनी जमा कर दी जाती है. फिर इसे कुछ दिनों बाद किसी दूसरे एकाउंट में जमा कर दिया जाता है. इस तरह दर्जनों डोरमेट एकाउंट का उपयोग किसी की ब्लैक मनी को व्हाइट करने के लिए किया जा रहा है. अधिकतर जन-धन योजना के तहत ही खोले गये एकाउंट का चयन इसके लिए खासतौर से किया जा रहा है. राज्य में जन-धन योजना के तहत करीब दो करोड़ 40 लाख बैंक एकाउंट खोले गये, जिसमें करीब 40 प्रतिशत एकाउंट में लेनदेन नहीं हो रहे हैं. ये एकाउंट ही बैंक वालों के लिए सॉफ्ट टारगेट पर हैं, जिनका उपयोग ब्लैक को व्हाइट करने में किया जा रहा है.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन