पटना :बिहार में दो अक्टूबर से पूर्ण शराबबंदी का नया कानून लागू हो गया है. विधानमंडल के माॅनसून सत्र में पारित बिहार उत्पाद संशोधन विधेयक, 2016 को गांधी जयंती के मौके पर प्रभावी कर दिया गया. साथ ही शराबबंदी को लेकर पटना हाइकोर्ट के फैसलेको चुनाैतीदेने के लिए बिहार सरकार आज सुप्रीम कोर्ट पहुंच गयी है. इसमामले पर सुप्रीमकोर्ट में सुनवाई 7 अक्टूबरहोहोगी.
इससे पहले मुख्यमंत्री ने रविवार को कहा था कि कि शराबबंदी एक चुनौती है. बाधाएं उत्पन्न की जायेंगी, पर हर तरह की बाधा से निबटने को हम तैयार हैं. लोगों की मदद से हर बाधा से निबटेंगे. राज्य कैबिनेट की हुई कल हुई विशेष बैठक में इसे लागू करने के लिए एक संकल्प लाया गया. कैबिनेट की सहमति के बाद इस कानून के बारे में स्वयं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मीडिया को जानकारी दी. नये कानून को राज्यपाल की सहमति पहले ही मिल चुकी है. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा था कि सरकार शराबबंदी को लेकर पटना हाइकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी.
हाइकोर्ट के फैसले से नहीं हाेगा प्रभावित
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे राज्य में आज से फिर पूर्ण शराबबंदी लागू हो गयी है. हाइकोर्ट के फैसले से यह प्रभावित नहीं होगा. यह पूर्णत: नया कानून है. इसे लागू होते ही पूराना कानून स्वत: समाप्त हो गया. उन्होंने कहा, कुछ लोग इसे तालिबानी कानून बता कर तरह तरह की बातें करते हैं. नया एक्ट मद्य निषेध का कानून है. यदि कोई संशोधन चाहते हैं, तो स्पष्ट सुझाव दें. यदि कोई इसे तालीबानी कानून कहता है, तो गैर तालिबानी कानून के लिए सुझाव तो दें. विरोध करनेवाले लोग शराबबंदी के हिमायती नहीं हैं.
भाजपा नेताओं ने सुझाव क्यों नहीं दिया : सीएम नीतीश
अगर सचमुच में शराबबंदी के प्रति दृढ़ हैं, तो बताइए, क्या होना चाहिए? उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं से तो मैंने बात की. उनलोगों ने सुझाव क्यों नहीं दिये? हमने शराबबंदी से संबंधित जो नोट उन्हें दिया, उनलोगों ने उसे प्रेस को दे दिया. मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसी के घर में शराब या रैपर पकड़ाता है, तो बताइए किसको पकड़ना चाहिए? यदि कोई बाहर से पीकर बिहार में उधम मचाता है, तो क्या करना चाहिए? आपको बताना चाहिए, क्योंकि शराबबंदी के लिए आप संकल्प ले चुके हैं. सीएम ने कहा कि शराबबंदी लागू होने के बाद एक-एक कठिनाइयों को कानूनी तरीके से दूर किया गया. शराबबंदी को लेकर कोई संशोधन चाहते हैं, तो दिन दूर नहीं है. जल्द ही सेशन शुरू होनेवाला है. उसमें सुझाव दें.
अपराध होंगे, पर कानून को हटा लेना रास्ता नहीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एक सामाजिक परिवर्तन की लड़ाई है. इसे हम धैर्य और संकल्प के साथ आगे बढ़ायेंगे. पत्रकारों के एक-एक प्रश्न का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि शराबबंदी कानून लागू होने से पहले भी जहरीली शराब पीने की घटना होती थी. जहां शराबबंदी कानून लागू नहीं है, वहां भी जहरीली शराब से मौत की घटना हो रही है. ओड़िशा में सैकड़ों लोग मर गये. उसको आधार बना कर एक बड़े लक्ष्य को छोड़ा नहीं जा सकता है. अमेरिका में शराबबंदी कानून विफल होने संबंधी प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि हत्या और अपराध को रोकने के लिए कानून है. क्या हत्या और अपराध नहीं हो रहा है? इसका मतलब यह नहीं है कि कानून को ही हटा लें.
2अक्टृूबर से स्वत: प्रभावी हो गया नया शराबबंदी कानून
मुख्यमंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी की जयंती और चंपारण सत्याग्रह के सौवें साल के मौके पर आज से राज्य में शराबबंदी कानून स्वत: लागू हो गया है. पहले एक्ट में संशोधन कर शराबबंदी कानून लागू किया गया था. यह तो अपने आप में कानून है. बापू की जयंती पर इसे प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए संकल्पित हैं.
यह विधानमंडल दल से पारित होने, कैबिनेट के निर्णय और राज्यपाल की सहमति के बाद लागू किया गया है. उन्होंने कहा कि राज्य में शराबबंदी से आर्थिक स्थिति पर असर दिखने लगा है. लोगों के माली हालात में सुधार होने लगा है.
राज्य में शराबबंदी को लागू करने के लिए शिक्षा विभाग के सहयोग से पूरे राज्य में जनचेतना अभियान चलाया गया. 1.19 करोड़ लोगों ने अपने बच्चों के माध्यम से शराब नहीं पीने का संकल्प लिया. नौ लाख पोस्टर बनाये गये. गीत और नाटक लिखा गया. राज्य में शराबबंदी एक अप्रैल से लागू किया गया था. चरणबद्ध तरीके से लागू करने का निर्णय लिया गया था. माहौल बन गया था, इसलिए पांच अप्रैल से ही दूसरे चरण को लागू कर दिया गया. यह सब जनचेतना जागने का ही परिणाम है. शराबबंदी से गांव में शांति का वातावरण कायम हुआ.
शराबबंदी से एक तबका आहत
मुख्यमंत्री ने कहा कि शराबबंदी से एक तबका आहत है. उसके प्रभाव में आकर गैर संवैधानिक बात की जा रही है. एक खास पार्टी के एक खास नेता के दोहरे चरित्र को अब तक नहीं देखा था. विधान परिषद में चिल्ला- चिल्ला कर वह कह रहे थे कि शराबबंदी का अधूरा कानून है.
हमसे पूछा गया था कि कब से पूर्ण शराबबंदी होगी, डेट बताइए. हमने कहा था कि चिंता मत करें. विधानमंडल से पूर्ण सहमति के बाद इस संबंध में निर्णय लिया गया था. विधानसभा और विधान परिषद में संकल्प लिया गया था कि हम लोगों को नशा करने से रोकने के लिए प्रेरित करेंगे. वह विधानसभा और विधान परिषद में प्रोसिडिंग का हिस्सा है. समाज में इसका जबरदस्त प्रभाव है. इसके बावजूद इस तरह की बात की जा रही है. उन्होंने कहा कि कोई भी कानून बनता है, तो उसमें जरूरत के अनुसार संशोधन किया जा सकता है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि शराब पीना मौलिक अधिकार नहीं
सीएम ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि शराब पीना या इसका व्यवसाय करना मौलिक अधिकार नहीं है. इसके ऊपर तो काेई कोर्ट नहीं है. शराबबंदी राज्य का दायित्व है. हम इसे निभा रहे हैं. शराबबंदी को कानून के अनुरूप बताते हुए उन्होंने कहा कि शराबबंंदी के कानून के विरोध में यदि कोई विचार है, तो हम सहमत नहीं हैं.
गांव का अध्ययन करें, तब पता चलेगा शराबबंदी का असर
मुख्यमंत्री ने कहा कि शराबबंदी का जबरदस्त असर है. शराब पीनेवाले भी अब प्रशंसा कर रहे हैं. अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा पीने में खर्च करते थे. अब वह बच रहा है. इससे कम-से-कम 10 हजार करोड़ की बचत होगी. इसके लिए गांव का अध्ययन कीजिए. शहर में बैठे यह पता नहीं चलेगा. सजा का कड़ा प्रावधान है. जहरीली शराब में मौत पर पीड़ितों को चार लाख, गंभीर रूप से आहत को दो लाख और साधारण रूप से आहत को 25 हजार रुपये देने का प्रावधान है. इसकी भरपाई इसके अभियुक्तों से वसूल कर की जायेगी. गोपालगंज मामले में यही किया जा रहा है.
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री के साथ उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव, स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव, उत्पाद एवं मद्य निषेध मंत्री अब्दुल जलील मस्तान, शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी, मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, गृह सचिव अमीर सुबहानी, कैबिनेट सचिव ब्रजेश मेहरोत्रा आदि मौजूद थे.
छह माह में कमलेश की बदली दुनिया, बचाये 80 हजार
नवादा सदर : नवादा के स्टेशन रोड में रहनेवाले कमलेश कुमार की छह माह में दुनिया बदल गयी है. वह पहले अपने परिजनों व बच्चों को न तो समय दे पाते थे और न ही पैसे बचा पाते थे. पर, अब बच्चों को रोज उनका साथ मिल रहा है. परिवार की आर्थिक बदहाली धीरे-धीरे दूर हो रही है. पूर्ण शराबबंदी के बिहार सरकार फैसले ने छह महीने में उनके परिवार में 80 हजार रुपये की बचत कर दी है.
यह वह रकम है, जो पहले शराबखोरी में डूब जाती थी. अब ये पैसे घर के बूढ़े-बच्चों के काम आ रहे हैं. कमलेश व उनके परिजन स्वीकार रहे हैं कि शराब ने पूरे परिवार को परेशान कर रखा था. राशन के भी पैसे नहीं बच पाते थे. ऊपर से कमलेश के हाथों पत्नी मीना की पिटाई रूटीन का हिस्सा हो गया था. पर, अब ये समस्याएं दूर हो गयी हैं. कमलेश कहते हैं कि शराबबंदी के बाद शुरुआत में कुछ दिनों तक अजीब-सा एहसास होता था. पर, अब तो शराब देखने तक का भी मन नहीं करता.
मैं पहले रोज 400 रुपये तक की शराब पी जाता था. रोज घर में झगड़े-झंझट होते थे. माहौल हमेशा तनावपूर्ण रहता था. पर, शराबबंदी के बाद का माहौल अलग है. शराब पर होनेवाले खर्च के 80 हजार रुपये बचे हुए हैं. घर में अब टीवी और बाइक भी आ गयी है. पहले जो परिचित लोग भी दूर रहते थे, आज उनके घर आने-जाने लगे हैं. बीबी-बच्चे तो खुश हैं ही.
कमलेश की पत्नी गीता को तो लगता है कि मानो शराबबंदी उन्हीं के परिवार के लिए लागू हुई हो. मुस्कराते हुए वह कहती हैं, मुझे तो विश्वास ही नहीं होता कि कि हर बात में मुझसे बदसलूकी करनेवाले अब कोई भी काम मुझसे पूछे बिना कैसे नहीं कर पाते.
और कड़े प्रावधान
शराब पीने की आदत नहीं छुटी, तो डीएम कर सकते हैं जिलाबदर
अगर घर में शराब मिली, तो परिवार के सभी वयस्कों को जेल
किसी को फंसाने पर उत्पाद विभाग के अधिकारी को तीन से सात साल तक की सजा
जिलों में शराबबंदी के केस की सुनवाई को विशेष न्यायालय.
उत्पाद विभाग के दारोगा व अन्य पदाधिकारियों को भी सीआरपीसी के तहत कार्रवाई का अधिकार दोबारा पकड़े जाने पर पहले से होगी दोगुनी सजा
अगर यह तालीबानी कानून है, तो गैर तालिबानी कानून के लिए सुझाव दें
यदि किसी के घर में शराब या रैपर पकड़ाता है, तो बताइए किसको पकड़ना चाहिए?
यदि कोई बाहर से पीकर यहां उधम मचाता है, तो क्या करना चाहिए?
सकारात्मक असर
यह सामाजिक परिवर्तन की लड़ाई, धैर्य व संकल्प के साथ आगे बढ़ायेंगे
गांवों में शांति का वातावरण, गांवों का अध्ययन करें, तब पता चलेगा असर
लोग कमाई का बड़ा हिस्सा शराब पीने में खर्च करते थे, अब वह बच रहा है, 10 हजार करोड़ की बचत