शराबबंदी सख्त रहेगी, लापरवाही करनेवाले थानेदार छोड़ दें नौकरी : CM नीतीश

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 14 Aug 2016 8:39 AM

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पटना: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शराबबंदी को लेकर साफ कर दिया है कि प्रदेश में शराबबंदी लागू होकर रहेगी. विपक्ष की आलोचना और पुलिस अधिकारियों की थानेदारी छोड़ने की पेशकश पर तीखा प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि यदि थानेदार इसे रोक नहीं सकते तो, नौकरी छोड़ दें. शनिवार को एसके मेमोरियल सभागार में कुशवाहा […]

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पटना: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शराबबंदी को लेकर साफ कर दिया है कि प्रदेश में शराबबंदी लागू होकर रहेगी. विपक्ष की आलोचना और पुलिस अधिकारियों की थानेदारी छोड़ने की पेशकश पर तीखा प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि यदि थानेदार इसे रोक नहीं सकते तो, नौकरी छोड़ दें.

शनिवार को एसके मेमोरियल सभागार में कुशवाहा राजनीतिक चेतना परिषद द्वारा आयोजित नव निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के सम्मान समारोह को संबोिधत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि शराबबंदी पर थाना प्रभारी कह रहे हैं कि प्रभारी नहीं रहेंगे. जिनको प्रभारी नहीं रहना है वे मत रहें. कौन उनको रोका है, चाहे तो नौकरी छोड़कर चले जायें. उनको लगता है कि शराब के पक्षधर राज्य की व्यवस्था को नष्ट कर देंगे. लोग सिर्फ आलोचना करते हैं, सुझाव देते ही नहीं. मुख्यमंत्री ने भाजपा को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि शराबबंदी की आलोचना करनेवालों ने कानून के विरोध में सैकड़ों लेख लिखे. सवालिया लहजे में उन्होंने पूछा कि क्या ऐसे लोगों ने फसल बीमा पर कुछ भी लिखा.

चंपारण सत्याग्रह की होगी सच्ची श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री ने कहा कि चंपारण सत्याग्रह की सौवीं वर्षगांठ पर राज्य में पूरी शराबबंदी लागू कर सच्ची श्रद्धांजलि दी जायेगी. शराबबंदी पर आलोचनाओं को खारिज करते हुए कहा कि अब यह प्रचार किया जा रहा है कि कोई काम नहीं रह गया है सिर्फ मुझे शराबबंदी का नशा लगा है. पर वे लोग यह तो बतावें कि राज्य में कौन सा काम नहीं हो रहा है. सात निश्चय पर सरकार का काम हो रहा है. पर विरोध करनेवालों ने क्या-क्या दुष्प्रचार नहीं किया. कहते है कि यह ड्रेकोनियन कानून (काला कानून) है. यह भी कहा कि गांव में शराब पकड़ी जायेगी तो मुखिया को जेल होगा. पड़ोसी को जेल भेजा जायेगा. अब कुछ नहीं बचा तो परिवार की बात कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि उनके जैसा आदमी इस तरह की बात कल्पना में भी नहीं सोच सकता है. उनकी पूरी आस्था लोकतंत्र में है. भला इस तरह की बात कोई लोकतंत्र में आस्था रखने वाला व्यक्ति सोच सकता है.
सात निश्चय पर काम किया जा रहा है
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शराबबंदी को लेकर आलोचना करनेवालों का करारा जवाब देते हुए कहा कि बतावें कि राज्य में कौन सा काम नहीं हो रहा है. महागंठबंधन के साझा कार्यक्रम के तहत सात निश्चय पर काम किया जा रहा है. पंचायती राज संस्थाओं की मजबूती का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि नव निर्वाचित जन प्रतिनिधियों को उन्होंने दो दिन तक पटना से संबोधित किया. उन्होंने कहा कि राज्य में पंचायती राज के साथ न्याय पंचायत का गठन किया गया है. सरपंच और पंचों को विवाद निबटारे की जिम्मेवारी दी गयी है. राज्य के करीब 1400 से अधिक पंचायतों में पंचायत सरकार भवन का निर्माण हो रहा है. इसमें 600 पंचायत सरकार भवनों का निर्माण कार्य पूर्ण हो गया है.
उनकी इच्छा है कि जिस प्रकार प्रधानमंत्री लाल किला से या मुख्यमंत्री झंडोत्तोलन करते हैं उसी तरह से मुखिया पंचायत सरकार भवन में स्वतंत्रता दिवस व गणतंत्र दिवस पर झंडोत्तोलन करें. राज्य सरकार ने महिलाओं को सभी नौकरियों में 35 फीसदी आरक्षण को लागू कर दिया है. सात निश्चय में एक निश्चय का पालन कर दिया गया है. इसी तरह से दो अक्तूबर से स्वयं सहायता भत्ता, स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड और कौशल विकास का कार्य प्रारंभ किया जा रहा है. राज्य के 534 प्रखंडों में कौशल केंद्र स्थापित किया गया है. फरवरी तक सभी विश्वविद्यालय व कालेजों में वाइ-‌फाइ कर दिया जायेगा. हर घर में शौचालय का निर्माण कराया जा रहा है. हर घर में नल का जल पहुंचाने का काम किया जा रहा है. आपदा के लिए सरकार काम रही है. वे खुद इसको देखने जा रहे हैं.
शराब पीना मौलिक अधिकार नहीं
शराबबंदी के पहले उसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया. एक करोड़ 19 लाख अभिभावकों के हस्ताक्षर लिये गये. शराबबंदी से गांव का माहौल ठीक हो गया है. पड़ोसी राज्य झारखंड में पार्टी के नेता जलेश्वर महतो के परिवार में शादी समारोह का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि वहां पर शराब के कारण बरात आने में 15 मिनट की जगह दो घंटे लेट हो गयी. हमने सुझाव दिया कि झारखंड में पूर्ण शराबबंदी लागू कराइये तो बारात समय पर आयेगी. शराबबंदी सामाजिक सुधार का काम है. समाज सुधार के काम में प्रतिरोध का सामना हुआ है.
केंद्र की लंबी चौड़ी घोषणा का क्या हुआ
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार गैस सब्सिडी देने की लंबी चौड़ी घोषणा की थी. उसका क्या हाल हुआ. सीएजी की रिपोर्ट में इसका भंडाफोड़ हो गया है. देश के पूरे प्रचार तंत्र पर कब्जा है. केंद्र सरकार अब सीधे लाभार्थियों के खाते में पैसा ट्रांसफर करने की बात करती है. उनकी बैंक और केंद्र सरकार से मांग रही है कि हर पंचायत में बैंक की शाखा खुले. राज्य सराकर भी पेंशन, छात्रवृत्ति और आपदा की राशि लाभार्थी के खाते में भेजना चाहती है. इसके लिए हर गांव में बैंक की शाखा होनी चाहिए.
कानून बनता है तो उसका पालन करना चाहिए : वशिष्ठ
समारोह को संबोधित करते हुए जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि कानून बनता है उसका पालन करना चाहिए. कानून इसलिए नहीं बनता कि उसमें छिद्र रह जाये. अन्य राज्यों में शराबबंदी है. बिहार में कुछ लोग शराबबंदी कानून से असहमत हैं पर कानून एक बड़े तबके के लिए बनता है. इस मौके पर सीपी सिन्हा. समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री कृष्णनंदन वर्मा, बागी कुमार वर्मा, अभय कुशवाहा सहित नव निर्वाचित जन प्रतिनिधि मौजूद थे. इस मौके पर मुख्यमंत्री ने मुंगेर की जिला परिषद अध्यक्ष पिंकी देवी को सम्मानित किया.
पीएम फसल बीमा योजना किसानों के लिए नहीं, बीमा कपंनियों के फायदे के लिए :
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा तो एक धोखा है. यह बीमा किसानों के लिए नहीं है, बल्कि यह तो बीमा कंपनियों के फायदे के लिए है. बीमा कंपनियां उत्तर प्रदेश में प्रीमियम तीन-चार प्रतिशत पर और बिहार में 14 प्रतिशत प्रीमियम पर बीमा कर रही हैं. क्या बलिया और बक्सर में कोई अंतर है. राज्य में कितने लोग बीमा कराते हैं. राज्य में डेढ़ करोड़ किसान हैं जो ऋण लेते हैं उनका स्वत: बीमा हो जाता है. कितने सामान्य किसान बीमा कराते हैं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बीमा योजना तो मजाक है. इस बीमा में 650 करोड़ केंद्र, 650 करोड़ राज्य का प्रीमियम होता है साथ ही किसानों को भी राशि देनी पड़ती है. प्रधानमंत्री फसल बीमा है तो इसका पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाये. अन्यथा इसका नाम तो केंद्र-राज्य-किसान फसल बीमा योजना होना चाहिए.
प्रभात खबर के कॉलमनिस्ट सुरेंद्र किशाेर के सुझावों का किया स्वागत : मुख्यमंत्री ने शराबबंदी पर वरिष्ठ पत्रकार और प्रभात खबर के कॉलमनिस्ट सुरेंद्र किशोर का नाम लेते हुए कहा कि मैंने उनका लेख पढ़ा है. उनके सुझाव का स्वागत है. उनका सुझाव है कि जिस परिवार में शराब पकड़ी जाती है तो खून की जांच से पीने वाले का पता किया जाये. इस सुझाव का कानून में प्रावधान किया जायेगा. इस कानून में 1915 का एक प्रावधान था जिसमें गांव के प्रमुख को पकड़ने की बात थी, उसको बदल दिया गया.
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