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BIHAR : अवैध शराब से किसी की जान गयी, तो मिलेगी मौत की सजा

Updated at : 19 Feb 2016 6:42 AM (IST)
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BIHAR : अवैध शराब से किसी की जान गयी, तो मिलेगी मौत की सजा

पटना : राज्य सरकार एक अप्रैल से शराबबंदी को कारगर तरीके से लागू करने के लिए कड़े दंड का प्रावधान करने जा रही है. अगर अवैध शराब से किसी की जान जाती है, तो दोषी व्यक्ति को मौत तक की सजा देने का प्रावधान उत्पाद अधिनियम में किया जायेगा. गुरुवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने […]

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पटना : राज्य सरकार एक अप्रैल से शराबबंदी को कारगर तरीके से लागू करने के लिए कड़े दंड का प्रावधान करने जा रही है. अगर अवैध शराब से किसी की जान जाती है, तो दोषी व्यक्ति को मौत तक की सजा देने का प्रावधान उत्पाद अधिनियम में किया जायेगा. गुरुवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कैंप कार्यालय, 7, सर्कुलर रोड में निबंधन, उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की, जिसमें उत्पाद कानून में दंड प्रावधानों को और कड़ा करने का निर्णय लिया गया.
बैठक के बाद विभाग के प्रधान सचिव केके पाठक ने बताया कि नयी उत्पाद नीति, 2015 को प्रभावकारी बनाने के लिए सुझाव दिया गया, जिस पर सहमति बनी. बैठक में निर्णय लिया गया कि एक प्रभावकारी उत्पाद अधिनियम तुरंत लाकर विधिवत स्वीकृति ली जायेगी़ इसमें उत्पाद नीति को प्रभावकारी रूप से लागू करने के लिए सभी जरूरी प्रावधान होंगे. इसमें सात वर्ष या उम्रकैद के अलावा मृत्युदंड की सजा भी प्रस्तावित की जा रही है.
इस अधिनियम के तहत शराब बेचने और रखने के अलावा यदि अवैध तरीके से अथवा गैर कानूनी स्थान पर यदि कोई शराब पीता है, तो उस पर भी कड़ी सजा देने का प्रावधान किया जायेगा. बैठक में विभाग की ओर से बताया गया कि फरवरी माह के 16 दिनों में ही लगभग 822 लोगों को गिरफ्तार करके जेल भेजा गया है. भारी मात्रा में अवैध शराब जब्त की गयी.
बिहार स्टेट बिवरेज कॉरपोरेशन लिमिटेड के काम की समीक्षा के दौरान विभाग की ओर से बताया गया कि शहरी क्षेत्र में विदेशी शराब की दुकानें खोलने की तैयारी है. इसके लिए आवश्यक कर्मचारी भी रखे जा रहे हैं. राज्य में सभी डिस्टलरीज द्वारा निर्मित इथेनॉल का उठाव तेल कंपनियों द्वारा किया जायेगा.
बैठक में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि सभी मुद्दों पर प्रगति की समीक्षा मुख्य सचिव द्वारा समय-समय पर की जाये.
इसमें गृह विभाग के प्रधान सचिव भी उपस्थित रहेंगे. मुख्यमंत्री ने पुलिस विभाग और निबंधन, उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग को आपस में को-ऑर्डिनेशन बना कर काम करने का निर्देश दिया. बैठक में मुख्यमंत्री के अलावा उत्पाद एवं मद्य निषेध मंत्री अब्दुल जलील मस्तान, मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, प्रधान सचिव स्वास्थ्य आरके महाजन, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डीएस गंगवार, प्रधान सचिव निबंधन उत्पाद एवं मद्य निषेध केके पाठक, मुख्यमंत्री के सचिव चंचल कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव अतीश चंद्रा सहित सभी संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे.
जीपीएस व डिजिटल लॉक वाले ट्रकों का ही इस्तेमाल
एक अप्रैल से शराब उन्हीं ट्रकों ले जायी जायेगी, जिसमें जीपीएस व डिजिटल लॉक होगा. दूसरे राज्यों से आनेवाले ट्रकों पर कड़ी निगरानी के लिए सभी कंपोजिट चेकपोस्ट पर फुलबॉडी ट्रक स्कैनर भी लगाने का प्रस्ताव है.
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