महागंठबंधन के नेताओं ने कहा, अमर्यादित टिप्पणी के लिए माफी मांगें मोदी
पटना : प्रधानमंत्री अब लोकतंत्र के चौथे स्तंभ मीडिया की आलोचना करने पर उतर आये हैं. पत्रकारों के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जब अपनी कोई प्रतिक्रिया दी, उस पर मंगलवार को समस्तीपुर की सभा में पीएम ने कहा कि वे ‘दरबारियों’ के बीच अपनी बातें कहते हैं.
पीएम का खुले मंच से इस तरह की बातें कहना लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला है. उक्त बातें मेगलवार को जदयू मुख्यालय में महागंठबंधन द्वारा आयोजित संयुक्त प्रेस काॅन्फ्रेंस में जदयू , राजद और कांग्रेस के प्रवक्ताओं क्रमश: पवन वर्मा, मनोज झा और चंदन यादव ने कही. उन्होंने कहा कि भाजपा में मीडिया के खिलाफ हाल के दिनों में हमले तेज हुए हैं.
आनेवाले दिनों में इस तरह के हमले और तेज होंगे. हाल ही में भाजपा के एक मंत्री ने मीडिया को आगरा चले जाने की भी बातेें कही थी. उन्होंने कहा कि सदन में तो पीएम बोलते नहीं हैं. सदन तीन-चार दिन ही चल पा रहा है. सिर्फ मीडिया पर ही नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट पर भी केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ‘तानाशाही’ का आरोप लगा रहे हैं.
कोर्ट के फैसले के असहमत या सहमत होना अलग बात है, किंतु उस पर ‘तानाशाही’ का आरोप लगाना भाजपा की खुद की तानाशाही प्रवृति को साबित करता है. महागंठबंधन ने मीडिया और कोर्ट पर की गयी इस तरह की अमर्यादित टिप्पणी के लिए प्रधानमंत्री को माफी मांगने को कहा है.
महागंठबंधन के प्रवक्ताओं ने कहा कि बीजेपी ने दूसरे चरण के चुनाव के बाद से ही अपनी हार मान ली है. बिहार में भाजपा पीएम के नाम पर चुनाव लड़ रही है. यहां वह केंद्र की उपलब्धियां गिना रही हैं. उस यह जानना चाहिए कि बिहार चुनाव ‘रेफ्रिडेंम’ नहीं है. अब तो भाजपा में भी प्रधानमंत्री के खिलाफ कई नेताआें के बोल फूटने लगे हैं. अरुण शौरी ने आज ही तीखा प्रहार किया है. उन्होंने स्पष्ट कहा है कि पीएम कार्यालय कमजोर हो गया है, वहां एक्सपर्ट लोग नहीं हैं.
शत्रुध्न सिन्हा लगातार ट्वीट कर भाजपा के खिलाफ आग उगल रहे हैं. यही नहीं, यशवंत सिन्हा, आरके सिन्हा और शांता कुमार जैसे पार्टी के कद्दावर नेता तक यही कह रहे हैं. उन्होंने कहा कि पीएम बिहार की जनता को गुमराह कर रहे हैं. वे बिहार के चुनाव को कलंकित न करें. उन्हें जेपी, लोहिया और कर्पूरी के आर्दशों को मानना चाहिए.
