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जातीय जनगणना रिपोर्ट को लेकर 27 जुलाई को बिहार बंद करायेंगे लालू

Updated at : 15 Jul 2015 1:33 AM (IST)
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जातीय जनगणना रिपोर्ट को लेकर 27 जुलाई को बिहार बंद करायेंगे लालू

पटना: जातीय जनगणना रिपोर्ट जारी करने की मांग को लेकर राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद ने 27 जुलाई को बिहार बंद का एलान किया है. हालांकि, ट्रेन, स्कूली बस व एंबुलेंस को इसे मुक्त रखा गया है. इसके एक दिन पहले 26 जुलाई को वह उपवास पर रह कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व भाजपा अध्यक्ष अमित […]

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पटना: जातीय जनगणना रिपोर्ट जारी करने की मांग को लेकर राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद ने 27 जुलाई को बिहार बंद का एलान किया है. हालांकि, ट्रेन, स्कूली बस व एंबुलेंस को इसे मुक्त रखा गया है. इसके एक दिन पहले 26 जुलाई को वह उपवास पर रह कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को चेतावनी देंगे. इस मुद्दे को खेत-खलिहान की लड़ाई बनाने के लिए लालू प्रसाद ने 21 जुलाई को पटना में पार्टी के सभी सांसदों, पूर्व सांसदों, विधायकों, पूर्व विधायकों, विधान पार्षदों, पूर्व विधान पार्षदों, जिलाध्यक्षों समेत सभी प्रकोष्ठों के नेताओं की बैठक बुलायी है.

लालू प्रसाद मंगलवार को अपने सरकारी आवास 10 सकरुलर रोड में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि हमारी मांग पर केंद्र सरकार ने रिपोर्ट जारी नहीं की, तो बिहार में अनिश्चितकालीन बंदी का एलान किया जायेगा. जब तक रिपोर्ट जारी नहीं हो जाती, तब तक हम चैन की नींद सोयेंगे और नहीं केंद्र सरकार को सोने देंगे. उन्होंने कहा कि दलितों, गरीबों और अल्पसंख्यकों के नाम पर राजनीति करनेवाले प्रवासी लोग बेनकाब हो गये हैं. उन्होंने कहा कि आंदोलन खड़ा कर हम अगड़ी जाति के लोगों का विरोध नहीं कर रहे हैं. हमारी लड़ाई सामाजिक न्याय के लिए है.

एससी-एसटी के नेताओं को यह बात जान लेनी चाहिए कि इतिहास उन्हें माफ नहीं करेगा. ब्रिटिश काल में 1931 में भारत की जातीय जनगणना हुई थी. इसी आधार पर अनुसूचित जाति/जनजातियों को आरक्षण दिया जा रहा है. संविधान में प्रावधान है कि इन दो समुदायों को उनकी जनसंख्या के आधार पर सरकारी सेवाओं में आरक्षण दिया जायेगा. अब दोनों जातियों की संख्या 30-40 फीसदी हो गयी है. इस अनुपात में इनको आरक्षण मिलना चाहिए.

उन्होंने कहा कि 10 फीसदी लोग 90 फीसदी का माल चट कर जा रहे हैं. गांव का हर तीसरा व्यक्ति भूमिहीन है. 6.68 लाख लोग भीख मांग रहे हैं. 75 फीसदी घरों की मासिक आमदनी पांच हजार से कम है. 51 फीसदी लोग दिहाड़ी मजदूरी कर जीवनयापन कर रहे हैं. 13.25 फीसदी लोगों के पास एक कमरा भी नसीब नहीं है. बिना रिपोर्ट जारी किये यह कैसे पता चलेगा कि ये कौन लोग हैं? उन्होंने 10 सकरुलर रोड में इफ्तार समारोह के बांस-बल्ले उखाड़नेवाले मजदूरों को बुला कर मीडिया के सामने एक-एक की जाति पूछवायी.

किसी ने अपने को यादव तो अधिसंख्य ने मुसलिम बताया. लालू प्रसाद ने कहा कि यही लोग हैं, जो अभी तक मजदूरी कर रहे हैं. अभी तक देश का अंधा बजट बनता रहा है. जब रिपोर्ट आयेगी, तो आबादी के अनुसार बजट बनाना होगा. सिर्फ पिछड़ा प्रधानमंत्री कहने से काम नहीं चलेगा. पिछड़ा प्रधानमंत्री हैं, तो इनका हक क्यों मार रहे हो. प्रेस कॉन्फ्रेंस में लालू ने एक तरफ प्रदेश अध्यक्ष डॉ रामचंद्र पूव्रे व मुंद्रिका सिंह यादव को बैठाया था, तो दूसरी तरफ दोनों पुत्र तेज प्रताप यादव व तेजस्वी यादव को बैठाया था.

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