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संवरेगी अपने शहर की सूरत, इस माह अमल में आ जायेगा मास्टर प्लान

Updated at : 14 May 2015 6:58 AM (IST)
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संवरेगी अपने शहर की सूरत, इस माह अमल में आ जायेगा मास्टर प्लान

पटना: बढ़ती आबादी के बोझ से अव्यवस्थित होते जा रहे पटना शहर को सुनियोजित तरीके से विस्तार करने के लिए मास्टर प्लान इसी माह के अंत तक अपने पूरे स्वरूप में सामने आ जायेगा. इसे लागू करने से संबंधित तमाम प्रक्रियाएं करीब पूरी कर ली गयी हैं. नगर विकास एवं आवास विभाग ने इससे संबंधित […]

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पटना: बढ़ती आबादी के बोझ से अव्यवस्थित होते जा रहे पटना शहर को सुनियोजित तरीके से विस्तार करने के लिए मास्टर प्लान इसी माह के अंत तक अपने पूरे स्वरूप में सामने आ जायेगा. इसे लागू करने से संबंधित तमाम प्रक्रियाएं करीब पूरी कर ली गयी हैं.

नगर विकास एवं आवास विभाग ने इससे संबंधित हाल में एक महत्वपूर्ण और निर्णायक बैठक करके इसे अपने स्तर से फाइनल कर दिया है. अब इस पर विकास आयुक्त की अध्यक्षता में कुछ दिनों के अंदर एक अहम बैठक होगी. इसके बाद मई के अंत तक यह कैबिनेट से पास हो जायेगा. कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही पटना का मास्टर प्लान पूरी तरह से लागू हो जायेगा. इसके अंतर्गत पटना जिले के 13 प्रखंडों के कुल 558 गांव शामिल हो जायेंगे. यानी शहर का विस्तार इन प्रखंडों व गांवों तक हो जायेगा. कई कॉलोनियां या बड़े सिटी को सुनियोजित ढंग से बसाने का काम शुरू हो जायेगा.

जनता ने नौ मुद्दों पर दिये सुझाव
पटना का मास्टर प्लान तैयार करने से संबंधित एक ड्राफ्ट अगस्त, 2014 में कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद प्रकाशित किया गया था. इस पर आम लोगों के 759 सुझाव आये हैं. इन्हें भी समायोजित करके इस नये प्लान में शामिल किया गया है. इसमें नौ तरह के सुझाव प्राप्त हुए.
एयरपोर्ट लोकेशन के संबंध में
रोड या सड़क की चौड़ाई से जुड़े
रिहायशी भूमि को कॉमर्शियल बनाना
जंगल क्षेत्र या बफर जोन
बिल्डिंग बाइलॉज (विकास नियंत्रित नियम)
भूमि अधिग्रहण से संबंधित
प्लानिंग एरिया (फैलाव या कटौती)
कई तरह के संस्थानों से प्राप्त सुझाव
अन्य तरह के सुझाव
33 साल बाद बना मास्टर प्लान
1965 से 1982 तक पटना शहर का विकास करने के लिए मास्टर प्लान मौजूद था, लेकिन 1982 के बाद से आज तक मास्टर प्लान तैयार ही नहीं हुआ था. 33 साल बाद पहली बार यह मास्टर प्लान तैयार किया गया है. मास्टर प्लान के अभाव में शहर का विकास बेतरतीब तरीके से होता चला गया. इसी का परिणाम है कि आज 10 फुट से कम चौड़ी गलियों में भी बहुमंजिला अपार्टमेंट नजर आते हैं. अधिकतर मुहल्लों में नाली, गली समेत अन्य समस्याएं मौजूद हैं. इस नये मास्टर प्लान से इन समस्याओं के दूर होने की संभावना है.
एयरपोर्ट की जगह को लेकर सबसे ज्यादा चिंता
बिहटा के पास डुमरी में एयरपोर्ट बनाने का प्रस्ताव था. इसके प्रति सबसे ज्यादा शिकायतें या सुझाव प्राप्त हुए हैं. एक आवेदन में तो 1388 लोगों के हस्ताक्षर हैं. इसमें इस बात को लेकर आपत्ति की गयी है कि वर्तमान चिह्न्ति क्षेत्र कृषि योग्य उपजाऊ भूमि है. अगर यहां हवाई अड्डा बना, तो करीब 20 हजार लोगों की रोजी-रोटी छीन जायेगा. यह इलाका लो लैंड होने के कारण बरसात का पानी भी यहां भर जाता है. हवाई अड्डा बन जाने से अलग-बगल के क्षेत्र में बाढ़ का खतरा बढ़ जायेगा. लोगों ने यह भी कहा है कि जो पहले से बसे हुए ग्रामीण क्षेत्र हैं, उन्हें छोड़ कर हवाई अड्डा बनाया जाये. लोगों ने इसके लिए मसौढ़ी के पोटही में मौजूद मोड़हर नदी के पास की जमीन को चयनित करने का सुझाव दिया है. यह क्षेत्र नदवां स्टेशन के करीब है.
इस संबंध में 12 जनवरी, 2015 को एक बैठक हुई थी, जिसमें कुछ महत्वपूर्ण बातों पर सहमति बनी है. इसमें गांवों को नहीं हटाने, इनके विस्तार को ध्यान में रखना शामिल है. साथ ही इस क्षेत्र में होटल, एयरपोर्ट संबंधित उद्योग, वेयरहाउस, लॉजिस्टिक हब समेत अन्य बातों का विकास करने की बात है. फिलहाल सरकार ने एयरपोर्ट से संबंधित स्थान को लेकर एयरपोर्ट ऑथोरिटी के स्थानीय कार्यालय से भी सुझाव मांगा है. इससे संबंधित रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही सरकार कोई ठोस फैसला करेगी.
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