मर्जर पर बोले नीतीश : धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय...

Updated at : 12 May 2015 6:23 AM (IST)
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मर्जर पर बोले नीतीश : धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय...

पटना : समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव के बयान के एक दिन बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि जब मर्जर का एलान हो गया है, तो उससे पीछे हटने का सवाल ही नहीं है. विलय को लेकर कोई विवाद नहीं है. इस पर सब लोगएकमत हैं. लोकतंत्र में सभी को अपने विचार […]

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पटना : समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव के बयान के एक दिन बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि जब मर्जर का एलान हो गया है, तो उससे पीछे हटने का सवाल ही नहीं है. विलय को लेकर कोई विवाद नहीं है. इस पर सब लोगएकमत हैं. लोकतंत्र में सभी को अपने विचार रखने का अधिकार है.

यदा-कदा अगर कोई कुछ बोलता है, तो उससे कोई फर्क नहीं पड़नेवाला है. वह सोमवार को जनता के दरबार कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे. सपा नेता रामगोपाल यादव ने रविवार को कहा था कि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले जनता परिवार का विलय डेथ वारंट पर साइन करने के समान है. उन्होंने जदयू-राजद को गंठबंधन कर बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने की सलाह दी थी.

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने विलय पर कवि के अंदाज में कहा कि ‘‘धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय, माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आये तब फल होय.’’ उन्होंने कहा, छह राजनीतिक दलों के मजर्र का एलान हो चुका है. मुलायम सिंह यादव इसके अध्यक्ष बनाये गये हैं. साथ ही उनके नेतृत्व में सात सदस्यीय कमेटी बनी है, जो नयी पार्टी के नाम, झंडा व निशान की तय करने का काम कर रही है. ऐसे में बहुत-सी बातें आती रहेंगी और काम धीरे-धीरे अपने समय पर होता रहेगा. नीतीश कुमार ने कहा कि इसके लिए धैर्य की जरूरत है. सब कुछ ठीक रास्ते पर चल रहा है. परेशानी की कोई बात नहीं है. कई पार्टियों को एक होना होता है. कई तरह के विचार आते हैं. जब मन मिल गया और सब कुछ तय हो गया, तो तकनीकी रूप से बात आती भी है. उसका रास्ता निकालना पड़ता है और समय पर इसका परिणाम भी आयेगा. समय से पहले कुछ नहीं होता है. विलय को लेकर किसी भी प्रकार की आपदा से निबटने के लिए हम तैयार हैं. विलय पर भाजपा की चुटकी लेने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि एक बयान से विलय में थोड़ी परेशानी दिखी, तो भाजपा को कितनी प्रसन्नता हो रही है. वे तो मस्ती में आ गये हैं. अब तो समझ में आ गया है कि विलय से कितने डरे हुए थे और कितने घबराहट में थे.

विधान परिषद चुनाव में गंठबंधन पर अंतिम निर्णय जल्द

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार विधान परिषद का चुनाव गंठबंधन कर लड़ने के लिए अन्य दलों से बातचीत चल रही है. इसके लिए जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह को अधिकृत और अंतिम निर्णय लेने को कहा गया है. जितने भी लोग व पार्टी संभावना के दायरे में आते हैं, उनसे बातचीत चल रही है. इसका जो भी फल निकलेगा, उसकी सूचना दे दी जायेगी. उन्होंने कहा कि गंठबंधन की संभावना में राजद के साथ-साथ कांग्रेस, सीपीआइ भी शामिल हैं. सभी से बात हो रही है और जल्द ही फाइनल निर्णय सामने होगा.

विप चुनाव में कुछ सीटों का त्याग कर सकता है जदयू

पटना. बिहार विधान परिषद की 24 सीटों के लिए होनेवाले चुनाव में जदयू की कुछ सीटिंग सीटें कट सकती हैं. इसके संकेत जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने दिये हैं. उन्होंने कहा कि अधिकतर सीटों पर अंदर से सहमति बन गयी है. राजद से बात हो चुकी है. अब कांग्रेस व सीपीआइ से बातचीत चल रही है. एक व्यापक गंठबंधन की तैयारी है. कांग्रेस व सीपीआइ ने एक-दो दिनों का समय लिया है. आपस में बात कर वे अपना फैसला देंगे. उन दोनों दलों का जवाब आने के बाद राजद के साथ उस पर बात होगी और किस-किस सीट से कौन-कौन चुनाव लड़ेंगे, इसकी घोषणा की जायेगी. उन्होंने कहा कि सीटों को किस ढंग से एडजस्ट किया जायेगा, उस पर अगले तीन-चार दिनों में फैसला आ जायेगा. 24 में से जदयू की सीटिंग सीटें 13 हैं. ऐसे में जदयू को को सेक्रेफाइस भी करना पड़ सकता है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव के बयान पर उन्होंने कहा कि उनके बयान पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है. उन्होंने जो कुछ कहा है, वह तथ्य के आधार पर कहा है और तकनीकी सवाल उठाया है. व्यावहारिकता की दृष्टि से जो बात हमलोगों ने की है, उस पर ही उनका बयान आया है.

क्या कहा था रामगोपाल यादव ने

तकनीकी रूप से विलय की प्रक्रिया लंबी खींच सकती है, जबकि जल्द ही बिहार में विस चुनाव होना है. ऐसे में बिहार में गंठबंधन कर चुनाव लड़ना बेहतर विकल्प है.
रामगोपाल यादव, सपा महासचिव

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