पटना हाइकोर्ट में वकीलों की हड़ताल

Updated at : 25 Feb 2015 4:48 AM (IST)
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पटना हाइकोर्ट में वकीलों की हड़ताल

पटना : पटना हाइकोर्ट के नये एक्ट के खिलाफ हाइकोर्ट के करीब 10 हजार वकील मंगलवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गये हैं. उन्होंने न न्यायिक कार्यो में भाग नहीं लिया और बहस से अपने को अलग रखा. सुबह साढ़े 10 बजे से कोर्ट बैठा. न्यायाधीश कोर्ट रूम में गये और बैठे, लेकिन कोई वकील […]

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पटना : पटना हाइकोर्ट के नये एक्ट के खिलाफ हाइकोर्ट के करीब 10 हजार वकील मंगलवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गये हैं. उन्होंने न न्यायिक कार्यो में भाग नहीं लिया और बहस से अपने को अलग रखा.
सुबह साढ़े 10 बजे से कोर्ट बैठा. न्यायाधीश कोर्ट रूम में गये और बैठे, लेकिन कोई वकील बहस के लिए नहीं गये. मुख्य न्यायाधीश समेत अन्य जज आधे घंटे के अंदर अपने चैंबर में आ गये. भोजनावकाश के बाद भी कुछ जज मामलों की सुनवाई के लिए कोर्ट रूम गये, लेकिन सुनवाई नहीं हो सकी. वकील सिविल ड्रेस में घूमते रहे. हड़ताल के कारण हाइकोर्ट में 500-600 मामलों की सुनवाई नहीं हो सकी. मंगलवार को अधिकतर मामले जमानत से संबंधित थे.
साथ ही कई मामलों में सरकारी पदाधिकारियों को तलब किया गया था, जिसमें उन्हें सशरीर कोर्ट में हाजिर होना था. ऐसे में इन अधिकारियों ने कोर्ट की जगह रजिस्ट्रार जनरल के पास अपनी उपस्थिति दर्ज करायी.
लॉयर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अभय कुमार सिंह ने कहा कि अगर कोर्ट ने अपना निर्णय नहीं बदला, तो उग्र आंदोलन होगा. यह आंदोलन राज्यव्यापी होगा. राज्य भर के करीब एक लाख वकील न्यायिक काम का बहिष्कार करेंगे.
पटना हाइकोर्ट के तीन समन्वय समिति के आह्वान पर वकीलों ने अश्चितकालीन हड़ताल की है. अधिवक्ता कमेटी के अध्यक्ष विंदकेशरी कुमार ने दावा किया कि हड़ताल के पहले दिन वकीलों की चट्टानी एकता दिखी है. न्यायिक काम से अपने को वकीलों ने अलग रखा है. लॉयर एसोसिएशन के अध्यक्ष उमाशंकर ने कहा कि वकीलों के लिए जो नया हाइकोर्ट एक्ट आया है, वह दुर्भाग्यपूर्ण है. इससे कई तरह की समस्याएं उत्पन्न हुई हैं. वकीलों को केस फाइलिंग करने में दिक्कत हो रही है.
वकीलों को सुनवाई छोड़ मुंशी का काम करना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि हाइकोर्ट प्रशासन को पहले ही अल्टीमेटम दिया गया था कि इसे वापस ले लें, लेकिन कोर्ट प्रशासन इस मुद्दे पर बात करना भी मुनासिब नहीं समझा. कोई भी नीतिगत फैसला लेने से वकील संगठनों की राय लेनी आवश्यक होती है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया.
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने किया हस्तक्षेप
पटना हाइकोर्ट के वकीलों की हड़ताल पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने हस्तक्षेप किया है. बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्र ने कहा कि बुधवार को वकीलों की बैठक बुलायी गयी है. इसमें पूरे मामले पर सुनवाई की जायेगी और निर्णय लिया जायेगा कि हड़ताल खत्म करनी है या फिर जारी रखनी है. उन्होंने कहा कि होली आनेवाली है. इस समय ज्यादातर जमानत से मामले आते हैं.
इस समय में ज्यादा-से-ज्यादा मामलों का निबटारा हो सकता है. पटना हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एल नरसिम्हा रेड्डी यहां के लिए नये हैं. वह यहां की राजनीति से अवगत नहीं हैं. हमें उनका सहयोग करना चाहिए और उन्हें समय देना चाहिए. हाइकोर्ट के नये एक्ट का मामला पूर्व मुख्य न्यायाधीश रेखा एम दोषित के समय का है. इसलिए बुधवार को साढ़े नौ बजे से होनेवाली बैठक में वकील तैयार होकर आएं, ताकि जरूरत पड़े, तो वे हाइकोर्ट के न्यायिक कार्य में भाग ले सकें.
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