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मांझी के दो तेवर: बांका में ठोंकी ताल, कहा- मैं दिल से हूं अमीर

Updated at : 23 Jan 2015 6:22 AM (IST)
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मांझी के दो तेवर: बांका में ठोंकी ताल, कहा- मैं दिल से हूं अमीर

मंत्री श्याम रजक के यहां भोज के बाद जदयू में जारी ताजा बयानबाजी के बीच गुरुवार को मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के दो अलग-अलग तेवर देखने को मिले. सुबह बांका में उन्होंने अपनी उपलब्धियां गिनायीं. यहीं नहीं, उन्होंने कई मामलों में अपनी सरकार के कामकाज को बेहतर करार दिया. लेकिन, शाम को गया पहुंचते ही […]

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मंत्री श्याम रजक के यहां भोज के बाद जदयू में जारी ताजा बयानबाजी के बीच गुरुवार को मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के दो अलग-अलग तेवर देखने को मिले. सुबह बांका में उन्होंने अपनी उपलब्धियां गिनायीं. यहीं नहीं, उन्होंने कई मामलों में अपनी सरकार के कामकाज को बेहतर करार दिया. लेकिन, शाम को गया पहुंचते ही उनके सुर नरम पड़ गये. कहा-अगला विधानसभा चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही लड़ेंगे. वहीं, भोज में शामिल मंत्रियों ने तय किया है कि नीतीश के फैसलों को बदलने का प्रयास किया गया, तो उसका विरोध किया जायेगा. इधर, उद्योग मंत्री भीम सिंह ने सीएम पद के लिए अति पिछड़े की दावेदारी पेश कर दी है.
बांका: गुरुवार को बांका में मंदार महोत्सव में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह व अन्य मंत्रियों के साथ पहुंचे सीएम जीतन राम मांझी पूरे रौ में दिखे. कहा, मैं गरीब नहीं हूं. जीतन मांझी अमीर है. दिल का राजा है. काम करना चाहता है. गरीब कह कर डिमोरलाइज नहीं किया जाये.
मंदार की तलहटी में स्थित अद्वैत मिशन मंदार विद्यापीठ में आयोजित मंदार पर्वत पर रोपवे के शिलान्यास के मौके पर मांझी ने कहा कि हमने पिछले दिनों सात-आठ वर्षो का जायजा लिया है. पहले दिसंबर महीने तक बजट की मात्र 30 से 35 प्रतिशत राशि खर्च होती थी. हमने 58 प्रतिशत खर्च कर दिखा दिया कि खर्च कैसे होता है.
बिना किसी का नाम लिये उन्होंने कहा कि कुछ लोगों के पेट में पड़पड़ी हो रही है. पड़पड़ी क्यों नहीं होगी? दो करोड़ की योजना 10 करोड़ में फरिया लेते हैं. हमने इस पर रोक लगा दी है. उन्होंने कृषि मंत्री की ओर मुखातिब होते हुए कहा कि नरेंद्र बाबू, जिनकी जेब से आठ करोड़ जायेंगे, तो पेट में पड़पड़ी क्यों नहीं होगी? वह तो चाहेगा कि जीतन राम मांझी को समाप्त कर दे, वह तो बड़ी बोलता है.
मांझी ने कहा कि जो मौका मिला है, उसका भरपूर लाभ लेकर हम काम को आगे बढ़ा रहे हैं. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अकलियत में गरीब लोगों को जब कभी मौका मिलता है, तो लोग उसको नजरअंदाज करते हैं और कहते हैं क्या काम होगा इससे. मुख्यमंत्री ने कहा कि हम शिलान्यास पर ओवरलोडेड हुआ सीएम का हेलीकॉप्टर एक को उतारा, तब भर सका विश्वास नहीं करते, बल्कि समयसीमा में काम करने पर विश्वास करते हैं. शिलान्यास के बाद अगर कार्य नहीं हुआ, तो वैसे संवेदकों को हम काली सूची में ही नहीं डालते, बल्कि प्राथमिकी दर्ज कर जेल में डलवाते हैं. मांझी ने कहा कि गरीब कहे जाने से हमें तकलीफ होती है. आपको नहीं पता कि निचले तबके के लोग सबसे ज्यादा संवदेनशील होते हैं. समाज के लोग ज्यादा काम करनेवालों को गदहा कहते है, लेकिन उन्हें मालूम होना चाहिए कि वह बहुत कर्तव्यनिष्ठ होता है और बहुत ज्यादा काम करता है. सफाई करनेवाला आदमी बहुत ऊंचा होता है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि मुजफ्फरपुर में हुई घटना पर 50 वर्षीय विधवा सैल ने 10 लोगों को अपनी जान जोखिम में डाल कर बचाया था. जिसे उन्होंने 51 हजार नकद, इंदिरा आवास और उनके बच्चों के लिए 20-20 हजार रुपये अपने कोटा से देने की बात कही.
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