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सरकारी अस्पतालों व ट्राॅमा सेंटरों में इलाज के 29 प्रोटोकॉल तैयार

Updated at : 22 Nov 2024 1:06 AM (IST)
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सरकारी अस्पतालों व ट्राॅमा सेंटरों में इलाज के 29 प्रोटोकॉल तैयार

जिला अस्पतालों, अनुमंडलीय अस्पतालों, प्रखंडस्तरीय और ट्रॉमा सेंटरों में इमरजेंसी में आने वाले मरीजों के इलाज का प्रोटोकॉल तैयार किया गया है.

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जिला, अनुमंडलीय के बाद प्रखंडस्तरीय अस्पतालों का प्रशिक्षण 25 नवंबर से संवाददाता,पटना जिला अस्पतालों, अनुमंडलीय अस्पतालों, प्रखंडस्तरीय और ट्रॉमा सेंटरों में इमरजेंसी में आने वाले मरीजों के इलाज का प्रोटोकॉल तैयार किया गया है. इमरजेंसी में इलाज कराने आने वाले मरीजों को 29 प्रकार के प्रोटोकॉल के आधार पर सेवाएं मिलेंगी, जिससे गोल्डेन आॅवर में जान बचायी जा सके. प्रोटोकल में इमरजेंसी आनेवाले मरीजों को इमरजेंसी के ट्रायज में रेड जोन, येलो जोन और ग्रीन जोन में इलाज के लिए चिह्नित किया जायेगा. यह काम ड्यूटी पर उपस्थित डॉक्टरों या नर्स के द्वारा मरीज की गंभीरता के आधार पर किया जायेगा. इसके साथ ही दुर्घटना में घायल होकर आने वाले मरीजों को आइराएड पोर्टल पर मरीज की जानकारी दर्ज की जायेगी. पोर्टल पर मरीज की जानकारी दर्ज होते ही इसकी सूचना हेल्थ, पुलिस और एमवीआइ के पास चली जायेगी. इससे घायल व्यक्ति की मौत होने पर बीमा की राशि लेने में प्रमाणपत्र के लिए परिजनों को कहीं भागदौड़ नहीं करना होगा. अस्पताल से अविलंब उसकी मौत के कारण का प्रमाणपत्र मिल जायेगा, जिससे आगे की कार्रवाई में सुविधा होगी. एकीकृत हेल्थ सेवा के नोडल पदाधिकारी डाॅ अभिषेक कुमार सिन्हा ने बताया कि दुर्घटना में मौत होने पर पीड़ित के परिजनों को पांच लाख रुपये और लू, भूकंप जैसी आपदा में मौत पर चार लाख की सहायता सरकार द्वारा दी जाती है. यह सब सुविधा एकीकृत इमरजेंसी सेवा को बहाल करने के बाद मरीज के परिजनों को मिल जायेगी. उन्होंने बताया कि एकीकृत इमरजेंसी सेवा में सुधार के लिए सड़क सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और इमरजेंसी को लेकर जानकारी दी गयी. अगर कोई मरीज इलाज के लिए आता है, तो उसके इलाज कैसे अविलंब आरंभ हो जाये. उन्होंने बताया कि एकीकृत इमरजेंसी सेवा में एंबुलेंसों की भी मॉनीटरिंग की जायेगी. अस्पताल के चिकित्सक हर माह अपने यहां तैनात किये गये एंबुलेंस की जांच करेंगे. उसमें 118 प्रकार की दवाएं, आक्सीजन सिलिंडर, वेंटिलेटर की स्थिति सहित पूरी चेक लिस्ट है. उसकी जांच कर हर माह उसकी रिपोर्ट भरनी है. अगर एंबुलेंस में किसी प्रकार की खामी पायी जाती है, तो जांच करने वाले अधिकारी पर कार्रवाई होगी. उन्होंने बताया कि इमरजेंसी सेवा के तहत भीषण गर्मी में होने वाली शॉर्-टसर्किट और अगलगी की घटनाओं पर कैसे काबू पाया जायेगा. इसका प्रशिक्षण दिया गया. 25 नवंबर से 26 बैच का प्रशिक्षण : अजीत कुमार सिंह राज्य स्वास्थ्य समिति के प्रतिनिधि अजीत कुमार सिंह ने बताया कि 25 नवंबर से प्रखंड स्तरीय अस्पतालों के चिकित्सक और नर्सों का प्रशिक्षण आरंभ होगा. इसके लिए 1040 लोगों को विभिन्न 26 बैचों में प्रशिक्षण दिया जायेगा. हर बैच को दो दिनों का प्रशिक्षण दिया जायेगा, जिसमें अन्य बातों के अलावा सड़क दुर्घटना और आपदा प्रबंधन के बारे में जानकारी दी जायेगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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