शशिभूषण कुंवर
पटना : बिहार में वर्ष 2025 तक पंचायतों की संख्या नहीं बढ़ेगी. 2021 की जनगणना के बाद ही पंचायतों का परिसीमन होगा. राज्य में अभी जो ग्राम पंचायतें, पंचायत समितियां और जिला पर्षद हैं, उनके क्षेत्र का निर्धारण 1994 में हुआ था. यानी 31 वर्ष बाद नयी पंचायतों का गठन होगा. वर्ष 2006 में पंचायतों का नये सिरे से चुनाव कराया गया था. लेकिन, उस समय ग्राम पंचायतों के क्षेत्र के निर्धारण का आधार वर्ष 2001 की जनगणना को नहीं बनाया गया था.
राज्य में पंचायतों की जनसंख्या में काफी अंतर है. किसी पंचायत की जनसंख्या सात हजार से कम है, तो किसी की 20 हजार तक. बिहार राज पंचायत राज अधिनियम, 2006 में कहा गया है कि सरकार किसी सामान्य या विशेष आदेश के अधीन जिला दंडाधिकारी जिला गजट में अधिसूचना निकाल कर किसी स्थानीय क्षेत्र को, जिसमें कोई गांव या निकटस्थ गांव के समूह या उसका कोई भाग होगा, को ग्राम पंचायत क्षेत्र घोषित कर सकेगा. सरकार वैसे क्षेत्र को ग्राम पंचायत क्षेत्र के रूप में घोषित करेगी, जिसके क्षेत्र की जनसंख्या सात हजार के निकटतम होगी.
राज्य सरकार द्वारा पंचायतों के गठन पर 2025 तक रोक लगाने का असर बड़ी आबादीवाली पंचायतों पर पड़ेगा. पंचायतों को सरकार की ओर विकास के लिए कई मदों में अनुदान राशि दी जाती है.
इसमें दी जानेवाली अनुदान राशि का आधार जनसंख्या नहीं होकर पंचायत को इकाई माना जाता है. पंचायतों को पिछड़ा क्षेत्र अनुदान (बीआरजीएफ), 13वें वित्त आयोग की अनुशंसा के आधार पर अनुदान, चतुर्थ राज्य वित्त आयोग की अनुशंसा के आधार पर अनुदान और पंचायतों की स्थापना पर अनुदान दिया जाता है. इस राशि से पंचायत अपने क्षेत्र के अंतर्गत सड़क, गली, नाली, आंगनबाड़ी केंद्र, शौचालयों का निर्माण सहित अनुसूचित जाति-जनजाति के क्षेत्रों का विकास करती है. सरकार द्वारा दी जानेवाली पंचायतों को समान राशि का असर इन पंचायतों पर दिखेगा.
