पटना : आयकर में 3 फीसदी की गिरावट, पिछले साल की तुलना में पांच सेक्टरों से कम मिल रहा टैक्स

By Prabhat Khabar Digital Desk
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7000 करोड़ का लक्ष्य बिहार में रखा गया है
पटना : सूबे में पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में चालू वित्तीय वर्ष के दौरान आयकर संग्रह में तीन फीसदी की कमी आयी है. इसकी मुख्य वजह चार-पांच प्रमुख सेक्टरों से पिछले साल की तुलना में कम टैक्स जमा होना है.
इसमें मेडिकल या निजी हॉस्पिटल, शिक्षण या कोचिंग, कंस्ट्रक्शन, ठेकेदारी और सर्विस सेक्टर मुख्य रूप से शामिल हैं, जबकि इन सेक्टरों में ग्रोथ होने के बाद भी टैक्स संग्रह में उतनी तेजी नहीं आयी है. इसके मद्देनजर आयकर विभाग इन सेक्टरों में अपेक्षाकृत कम टैक्स देने वाले लोगों की पहचान कर सख्त कार्रवाई कर सकती है. इसके लिए आयकर विभाग ने कई स्तर पर पड़ताल शुरू कर दी है. चालू वित्तीय वर्ष 2019-20 में बिहार और झारखंड से आयकर संग्रह का लक्ष्य 14 हजार करोड़ रखा गया है. इसमें करीब सात हजार करोड़ का लक्ष्य बिहार से रखा गया है.
विभागों को चिह्नित कर होगी सख्त कार्रवाई
हालांकि, मार्च के अंत तक टारगेट पूरा होने की बात आधा अधिकारी कह रहे हैं. चालू वित्तीय वर्ष में कॉरपोरेट टैक्स की दर को करीब आठ प्रतिशत घटा देने का थोड़ा असर भी टैक्स संग्रह पर पड़ रहा है.
इसके अलावा इस बार कई टैक्स देने वाली निजी कंपनियां या सेक्टर के लोगों ने अपनी कंपनी या संस्थान को नन-प्रॉफिट के तौर पर घोषित करते हुए एमएटी (मिनिमम अल्टरनेट टैक्स) का विकल्प अपनाया है. इसमें कंस्ट्रक्शन सेक्टर की कई कंपनियां शामिल हैं, जिन्होंने एमएटी का विकल्प अपनाया है. उनकी समुचित तरीके से पड़ताल की जायेगी.
यह देखा जायेगा कि वास्तव में इनका दावा वास्तव में सही है या नहीं. इसे हर तरह से परखने के बाद ही किसी को एमएटी का लाभ अंतिम रूप से मिल सकेगा. आयकर संग्रह को लक्ष्य के अनुरूप प्राप्त करने के लिए विभाग ने कई स्तर पर स्क्रूटनी शुरू कर दी है. सभी टैक्स देने वाले सेक्टरों की गहन समीक्षा की जा रही है. किसने कितना काम टैक्स दिया है. किसने टैक्स नहीं जमा किया है. इससे जुड़ी तमाम बातों की जांच की जा रही है. टैक्स छिपाने या ज्यादा ट्रांजैक्शन के बाद भी उचित टैक्स नहीं देने वालों पर खासतौर से जांच की जा रही है.
इसमें अब तक तीन प्रतिशत की कमी आयी है. बीते वित्तीय वर्ष में बिहार-झारखंड से आयकर संग्रह का लक्ष्य 13 हजार करोड़ रखा गया था. इसमें 12 हजार, 700 करोड़ रुपये संग्रह हुए थे. इस बार टारगेट में एक हजार करोड़ की बढ़ोतरी की गयी है, लेकिन फरवरी मध्य तक टैक्स संग्रह की रफ्तार धीमी है.
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