बिहार में बेटियों की उड़ान : पीएचडी में दोगुनी से अधिक बढ़ी छात्राओं की संख्या
Updated at : 01 Feb 2020 8:34 AM (IST)
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राजदेव पांडेय नौ वर्षों में छात्राओं की संख्या में 118%, तो छात्रों की संख्या में सिर्फ 21% इजाफा पटना : बिहार में उच्च शिक्षा में लड़कियों की भागीदारी उत्साहजनक है. पूरी तरह फ्री उच्च शिक्षा, स्नातक तक मुख्यमंत्री कन्या समृद्धि और अन्य योजनाओं में मिलने वाले वित्तीय अनुदान ने लड़कियों के लिए उच्च शिक्षा की […]
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राजदेव पांडेय
नौ वर्षों में छात्राओं की संख्या में 118%, तो छात्रों की संख्या में सिर्फ 21% इजाफा
पटना : बिहार में उच्च शिक्षा में लड़कियों की भागीदारी उत्साहजनक है. पूरी तरह फ्री उच्च शिक्षा, स्नातक तक मुख्यमंत्री कन्या समृद्धि और अन्य योजनाओं में मिलने वाले वित्तीय अनुदान ने लड़कियों के लिए उच्च शिक्षा की राह आसान कर दी है. रिसर्च में उनकी रुचि कुछ इस कदर बढ़ी है कि बिहार में पिछले नौ वर्षों के दौरान पीएचडी में लड़कियों का नामांकन दोगुनी से अधिक (118%) बढ़ गया है. शैक्षणिक वर्ष 2010-11 में बिहार में पीएचडी कोर्स में 513 लड़कियों का नामांकन हुआ.
2018-19 में यह संख्या बढ़कर 1123 हो गयी. जबकि इस समयावधि में पीएचडी में लड़कों के नामांकन में केवल 21% बढ़ोतरी हुई है. इस तरह हाल के वर्षों में पीएचडी में लड़कियों की तुलना में लड़कों के नामांकन की दर काफी कम है. हालांकि, 2018-19 में पीएचडी में 2239 लड़कों का नामांकन हुआ, जबकि जबकि लड़कियों की कुल संख्या 1123 रही.
सालाना औसत 3% बढ़ा पीएचडी में नामांकन : प्रदेश उच्च शिक्षा और केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में पिछले नौ वर्षों में पीएचडी कोर्स में नामांकनों में 42% इजाफा हुआ है. इस हिसाब से पीएचडी में नामांकन सालाना तीन फीसदी की औसत दर से बढ़ा है. पिछले नौ वर्षों में एक हजार विद्यार्थियों के नामांकन बढ़े हैं. हालांकि, देश में कुल पीएचडी विद्यार्थियों में बिहार की हिस्सेदारी केवल दो फीसदी से भी कम है. देश में पीएचडी में नामांकन लेने वालों विद्यार्थियों की संख्या 169170 है.
बिहार में पीएचडी में नामांकन
वर्ष छात्र छात्रा कुल
2018-19 2239 1123 3362
2017-18 1902 954 2856
2016-17 1502 726 2228
2015-16 1567 975 2542
2014-15 1334 704 2038
2013-14 1471 692 2163
2012-13 1706 850 2556
2011-12 1970 606 2576
2010-11 1849 513 2362
एमफिल में एक भी नामांकन नहीं
नौ सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो मास्टर ऑफ फिलॉस्फी (फिलॉस्फी) का ट्रेंड बिल्कुल पूरी तरह खत्म हो गया है. पिछले करीब एक दशक में एमफिल में नामांकन सिर्फ शैक्षणिक वर्ष 2015-16 में 32 नामांकन हुए. इनमें लड़कों की संख्या 20 और लड़कियों की संख्या 12 रही थी. वहीं, इससे पहले के शैक्षणिक वर्ष 2014-15 में कुल 15 नामांकन हुए, जिनमें 18 लड़के और और सात लड़कियां थीं.
सरकार के प्रयासों का फल
पीएचडी में नामांकन कराने वाली लड़कियों की संख्या में वृद्धि हुई है. इसकी वजह उच्च शिक्षा में लड़कियों को दिये जाने वाले अनुदान और सामाजिक सोच में बदलाव आ रहा है. उच्च शिक्षा में आमूलचूल बदलाव के लिए सरकार कई प्रयास कर रही है. उच्च शिक्षा परिषद का गठन भी किया गया है.
सतीश चंद्र झा, विशेष सचिव, उच्च शिक्षा
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