पटना : पंचायतों को ग्रांट मिलने में नहीं होगी परेशानी

Updated at : 21 Jan 2020 8:44 AM (IST)
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पटना : पंचायतों को ग्रांट मिलने में नहीं होगी परेशानी

ग्राम पंचायतों की वित्तीय स्थिति में तेजी से हो रहा है सुधार पटना : केंद्र व राज्य वित्त आयोगों से ग्राम पंचायतों को मिलनेवाला बेसिक व परफॉर्मेंस ग्रांट की बाधा दूर होने लगी है. वर्षों से पंचायतों के विकास के लिए भेजी गयी राशि में से 18 हजार करोड़ के हिसाब की रिपोर्ट अब जिलों […]

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ग्राम पंचायतों की वित्तीय स्थिति में तेजी से हो रहा है सुधार
पटना : केंद्र व राज्य वित्त आयोगों से ग्राम पंचायतों को मिलनेवाला बेसिक व परफॉर्मेंस ग्रांट की बाधा दूर होने लगी है. वर्षों से पंचायतों के विकास के लिए भेजी गयी राशि में से 18 हजार करोड़ के हिसाब की रिपोर्ट अब जिलों द्वारा नियमित रूप से उपलब्ध करायी जा रही है. प्रति माह करीब 500 करोड़ का उपयोगिता प्रमाणपत्र विभाग को उपलब्ध कराया जा रहा है.
यह माना जा रहा है कि फिलहाल वित्त विभाग द्वारा पांच हजार करोड़ का और इस वित्तीय वर्ष के अंत तक सभी उपयोगिता प्रमाणपत्र उपलब्ध होने पर राशि का समायोजन कर दिया जायेगा.
ग्राम पंचायतों को भेजी गयी राशि की जब विभाग के प्रधान सचिव अमृत लाल मीणा ने पंचायती राज पदाधिकारियों के साथ समीक्षा की, तो बड़े पैमाने पर उपयोगिता प्रमाणपत्र नहीं मिलने का खुलासा हुआ. लंबित उपयोगिता प्रमाणपत्र के मामले में पंचायती राज विभाग दूसरे स्थान पर है. इसके कारण ग्राम पंचायतों को 14 वें वित्त आयोग से मिलनेवाली 10 प्रतिशत की परफॉर्मेंस ग्रांट की राशि ही उपलब्ध नहीं हो रही है. इसके कारण पंचायतों को सालाना 500 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ रहा था. अब जिलों द्वारा उपयोगिता प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने के साथ ही ग्राम पंचायतों की राशि भी मिलेगी.
साथ ही 15 वें वित्त आयोग से मिलने सभी प्रकार के ग्रांट निर्बाध रूप से मिलते रहेंगे.सबसे अधिक लंबित उपयोगिता प्रमाणपत्र वाले जिले वैशाली, रोहतास, नवादा, नालंदा, पूर्वी चंपारण, समस्तीपुर, सीतामढ़ी, गया, मुजफ्फरपुर, मधुबनी, पश्चिम चंपारण, पटना, सारण और सीवान प्रमुख हैं. प्रधान सचिव ने सभी जिलों को सख्त निर्देश दिया था कि लंबित उपयोगिता प्रमाणपत्र का जल्द समायोजन करें. जो राशि खर्च हुई है, उसका ऑडिट कराएं और शेष राशि कोषागार में जमा कराकर उसका विपत्र विभाग को भेज दें. साथ ही जिला पंचायती राज पदाधिकारियों को जिला स्तर पर कैशबुकों की नियमित रूप से जांच करने का भी निर्देश दिया गया.
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