पटना : अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं को लेकर सुनवाई
Updated at : 14 Jan 2020 8:49 AM (IST)
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पटना : राज्य के सरकारी अस्पतालों में बुनियादी व चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के मामले की सुनवाई करते हुए हाइकोर्ट ने राज्य सरकार से दो सप्ताह में कार्रवाई रिपोर्ट तलब किया है. मुख्य न्यायाधीश संजय करोल व न्यायाधीश डॉ अनिल कुमार उपाध्याय की खंडपीठ ने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन की ओर से दायर लोकहित याचिका […]
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पटना : राज्य के सरकारी अस्पतालों में बुनियादी व चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के मामले की सुनवाई करते हुए हाइकोर्ट ने राज्य सरकार से दो सप्ताह में कार्रवाई रिपोर्ट तलब किया है. मुख्य न्यायाधीश संजय करोल व न्यायाधीश डॉ अनिल कुमार उपाध्याय की खंडपीठ ने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन की ओर से दायर लोकहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया. कोर्ट को बताया गया कि सरकारी अस्पतालों की हालत काफी दयनीय है.
कोर्ट को यह भी बताया गया कि राज्य सरकार की ओर से इन अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए 548 करोड़ रुपया उपलब्ध कराया गया. उपलब्ध कराएं गये पैसे का सही तरीके से उपयोग नहीं करने के कारण इन सरकारी अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है. मुख्य सचिव को मामले की जांच कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है.
बगैर निबंधन चल रही गाड़ियों पर क्या कार्रवाई हुई
पटना. बगैर निबंधन के पटना नगर निगम की चल रही गाड़ियों के मामले पर हाइकोर्ट ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को कहा कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर उनके द्वारा क्या कार्रवाई की गयी है.
मुख्य न्यायाधीश संजय करोल व न्यायाधीश डॉक्टर अनिल कुमार उपाध्याय की खंडपीठ ने निर्भय प्रताप की ओर से दायर लोकहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया. खंडपीठ ने शहरी विकास विभाग के प्रधान सचिव को कहा कि वह जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर इसकी जानकारी अगली सुनवाई पर कोर्ट को उपलब्ध कराएं. हालांकि, कोर्ट ने प्रधान सचिव को पहले ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया था. लेकिन, आदेश के बाद भी दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गयी.
पटना : बीएड स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने डीएलएड प्राथमिकता के मामले में पटना हाइकोर्ट में याचिका दायर की है. एसोसिएशन के संयोजक सुधीर कुमार सिंह मुख्य याचिकाकर्ता हैं. सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि राज्य सरकार की तरफ से प्रारंभिक कक्षा के लिए चल रहे नियोजन में डीएलएड को प्राथमिकता देने से बीएड के अभ्यर्थियों का नुकसान हो रहा है. उन्होंने कहा कि नियोजन के लिए निकले मूल विज्ञापन में प्राथमिकता के संदर्भ में कुछ भी उल्लेख नहीं था. इसी मामले को लेकर हाइकोर्ट में याचिका दायर की गयी है. हमें न्यायालय पर पूरा भरोसा है.
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