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पटना हाइकोर्ट को नंबर वन बनाना सपना: करोल

Updated at : 30 Dec 2019 8:57 AM (IST)
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पटना हाइकोर्ट को नंबर वन बनाना सपना: करोल

उत्साहजनक. मसौढ़ी सिविल कोर्ट परिसर में सेशन व सब जज कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश ने किया उद्घाटन मसौढ़ी : पटना उच्च न्यायालय को हम अपने सहयोगियों की बदौलत हिंदुस्तान में न्याय व इंसाफ के साथ-साथ किसी मामले का निबटारा शीघ्र ही देखना चाहते हैं. मेरा सपना है कि जो भी मुवक्किल हो उनका कम से […]

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उत्साहजनक. मसौढ़ी सिविल कोर्ट परिसर में सेशन व सब जज कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश ने किया उद्घाटन
मसौढ़ी : पटना उच्च न्यायालय को हम अपने सहयोगियों की बदौलत हिंदुस्तान में न्याय व इंसाफ के साथ-साथ किसी मामले का निबटारा शीघ्र ही देखना चाहते हैं. मेरा सपना है कि जो भी मुवक्किल हो उनका कम से कम पैसा खर्च हो. उक्त बातें रविवार को स्थानीय अनुमंडल सिविल कोर्ट परिसर में एडिशनल डिस्ट्रिक्ट व सेशन जज एवं सब जज न्यायालय का उद्घाटन करने के बाद स्थानीय बुद्धिजीवियों व अधिवक्ताओं को संबोधित करते पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संजय करोल ने कहीं.
उन्होंने कहा कि हमारे पदस्थापना के पूर्व निचली अदालत में 26 लाख मामले लंबित थे. हमने बहुत कम समय में साढ़े तीन लाख मामलों का निष्पादन कराया. उन्होंने पटना में अपने पदस्थापना के बाद अध्ययन किया तो पता चला कि सूबे में अपराध के मामले अधिक हैं, इसके तो ऐसे कई कारण हैं.
लेकिन मुख्य वजह है सिविल मामलों का निबटारा जल्दी नहीं होना. उन्होंने इसके लिए संबंधित न्यायालय से अनुरोध करने की बात कहते हुए कहा कि सिविल मामले का निबटारा जल्द करने का प्रयास करें. न्यायिक प्रक्रिया के जिम्मेदार लोगों की जिम्मेदारी बनती है विवादों का निबटारा जल्द करना.
इसी के लिए आप हैं. उन्होंने कहा कि संविधान में न्यायाधीश को बहुत बड़ी जिम्मेदारी दी गयी है. संविधान में अंकित है कि निचले स्तर तक के लोगों को न्याय देना और उसके बारे में उन्हें समझाना. हम ऐसी व्यवस्था करना चाहते हैं कि पूरी निष्ठा व क्षमता से सप्ताह के सातों दिन आपके लिए आपके द्वार में हैं. उन्होंने कहा कि बहुतेरे लोग ऐसे भी हैं जिन्हें न्याय प्रणाली की या तो जानकारी नहीं है या वह इसे समझ नहीं पाते. मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस मामले का अध्ययन करने पर पता चला कि न्यायिक प्रणाली के प्रति लोगों की सोच सकारात्मक नहीं है.
उन्होंने इस सेवा से जुड़े लोगों से अपील की कि आप लोगों को अपने कार्यों से समझाएं हम क्या हैं, और उनके जो भी ग्रीवांसेज हो उसे अपने कार्यों से आश्वस्त कर दें. इसके पूर्व विधि सेक्रेटरी मदन कौशिक ने यहां स्थापित हो रहे दो कोर्ट की सरकार की अधिसूचना को पढ़ा. जिला व सत्र न्यायाधीश रुद्र प्रकाश मिश्रा ने कोर्ट की स्थापना की महत्ता पर प्रकाश डाला. अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष महेंद्र सिंह अशोक व महासचिव अजीत कुमार ने भी बात रखी. धन्यवाद ज्ञापन अधिवक्ता चंद्रकांत सिंह चंदेल ने किया. मौके पर रजिस्ट्रार जनरल बीबी पाठक, डीएम कुमार रवि, एसएसपी गरिमा मलिक, सिटी एसपी जितेंद्र कुमार, एसडीओ संजय कुमार, मुख्य पार्षद सुनीता सिन्हा, डाॅ एमके मंगल समेत अन्य मौजूद थे.
दो जनवरी से शुरू होगा काम
अनुमंडल के लोगों को अब कोर्ट कचहरी के िलए पटना का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा. दोनों कोर्ट रूम में दो जनवरी से काम शुरू हो जायेगा. इसके लिए एडीजे पद पर मीतू सिंह और सब जज पद पर सारिका बहालिया की पदस्थापना कर दी गयी है.
आज का दिन मसौढ़ी के लिए है खास
न्यायमूर्ति संजय करोल ने अपने संबोधन में कहा कि मसौढ़ी के लिए आज का दिन खास है. पटना उच्च न्यायालय के एक तिहाई लोग आपके समक्ष उपस्थित हैं. उन्होंने बताया कि आज यहां दो-दो कोर्ट का शुभारंभ हो रहा है. इसके साक्षी मेरे अलावा हाइकोर्ट के न्यायाधीश चक्रधारी शरण सिंह, प्रभात कुमार झा, मोहित कुमार साह, अंजनी शरण सिंह, आशुतोष कुमार, अश्विनी कुमार सिंह, संजय कुमार के अलावा निरीक्षीय न्यायाधीश आशुतोष कुमार एक साथ मौजूद हैं.
मसौढ़ी में 12 हजार मामले हैं लंबित
मसौढ़ी अनुमंडल सिविल कोर्ट में 12 हजार मामले लंबित हैं, जिसमें 144 सिविल के हैं. 24 लाख की आबादी में 53 प्रतिशत लोग अशिक्षित हैं. जिन्हें न्याय प्रणाली की जानकारी नहीं है.
न्यायालय परिसर में पौधारोपण कर मुख्य न्यायाधीश को दिया गया गार्ड आॅफ आॅनर: कार्यक्रम की समाप्ति के बाद मुख्य न्यायाधीश संजय करोल को न्यायालय परिसर के मुख्य पेटिको के पास बिहार पुलिस के जवानों द्वारा बजाये गये राष्ट्रीय घुन पर गार्ड आॅफ आनर दिया गया. मौके पर मौजूद सभी न्यायाधीश के अलावा जिलाधिकारी कुमार रवि व वरीय पुलिस अधीक्षक गरिमा मलिक एवं सिटी एसपी जितेंद्र कुमार उनकी अगवानी की.
जल, जीवन व हरियाली पर दिया गया बल
सूबे की सरकार की योजना जल-जीवन-हरियाली को लेकर सूबा का सभी तंत्र गंभीर है. इधर रविवार को मसौढ़ी पहुंचे मुख्य न्यायाधीश भी इससे अपने आप को अलग नहीं रख सके. आर्यभट्ट परिवार मंच व स्थानीय लोगों के आग्रह पर उन्होंने न्यायालय परिसर में अपने हाथों से पौधा लगा, लोगों को इसके प्रति जागरूक किया.
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