पटना : सात माह में दोगुनी हुई शराब जब्ती के लिए छापेमारी

Updated at : 21 Dec 2019 5:30 AM (IST)
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पटना : सात माह में दोगुनी हुई शराब जब्ती के लिए छापेमारी

अनिकेत त्रिवेदी पटना, गया, पश्चिमी चंपारण, भोजपुर व कटिहार आरोपितों की गिरफ्तारी में टॉप पर गिरफ्तारी भी हुई दोगुनी पटना : राज्य में शराब के कारोबार का सिलसिला थम नहीं रहा. शराब को लेकर छापेमारी, गिरफ्तारी की संख्या और जब्ती की मात्रा में दोगुनी बढ़ोतरी हुई है.बीते वित्तीय वर्ष के मुकाबले मार्च से नवंबर तक […]

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अनिकेत त्रिवेदी

पटना, गया, पश्चिमी चंपारण, भोजपुर व कटिहार आरोपितों की गिरफ्तारी में टॉप पर

गिरफ्तारी भी हुई दोगुनी

पटना : राज्य में शराब के कारोबार का सिलसिला थम नहीं रहा. शराब को लेकर छापेमारी, गिरफ्तारी की संख्या और जब्ती की मात्रा में दोगुनी बढ़ोतरी हुई है.बीते वित्तीय वर्ष के मुकाबले मार्च से नवंबर तक के मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के आंकड़ों की मानें तो वित्तीय वर्ष 2018-19 में पूरे राज्य में 69 हजार सात सौ 16 छापेमारी हुई थी. कुल नौ हजार 31 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था. वहीं, इस बार केवल अप्रैल के अक्तूबर यानी केवल सात महीने में उत्पाद विभाग को एक लाख सात हजार छह सौ दो छापेमारी करनी पड़ी है. सात महीने में ही 13 हजार तीन सौ 55 मुकदमे में दस हजार दो सौ 57 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजना पड़ा है.

खास बात है कि इस वित्तीय वर्ष को पूरा होने में लगभग तीन माह का समय है. इस आंकड़े में पांच माह का आंकड़ा जुड़ना बाकी है. अवैध शराब के कारोबार में पटना, गया, पश्चिमी चंपारण, भोजपुर व कटिहार जैसे जिले टॉप पर हैं. बीते वर्ष पटना में पांच हजार एक सौ 32 छापेमारी कर 710 लोगों को मुकदमा चलाया गया था. 672 लोगों को जेल भेजा गया था.

इस वित्तीय वर्ष के सात माह में ही पटना में 11 हजार चार सौ 24 छापेमारी कर 1746 मुकदमे चलाये गये. इसमें 1340 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया. उसी प्रकार गया में वित्तीय वर्ष के सात माह में 6171 छापेमारी, 689 मुकदमे व 632 गिरफ्तारी की गयी है. पश्चिमी चंपारण में 4636 छापेमारी, 860 मुकदमे व 672 गिरफ्तारी हुई है. भोजपुर में भी 1349 छापेमारी, 225 मुकदमे व 134 गिरफ्तारी हुई है.

कटिहार में 3208 छापेमारी, 519 मुकदमे व 416 गिरफ्तारी हुई है. इन सभी जिलों में बीते वित्तीय वर्ष के मुकाबले दोगुनी छापेमारी व गिरफ्तारी हुई है.

छापेमारी अधिक, लेकिन मुकदमा-गिरफ्तारी कम

ऐसा नहीं है कि केवल अवैध शराब के ठिकानों पर छापेमारी, मुकदमा व गिरफ्तारी का मामला ही बढ़ा है. आंकड़े बताते हैं कि वित्तीय वर्ष के केवल सात माह में ही अंग्रेजी शराब, देशी शराब, महुआ व बियर के पकड़े जाते की मात्रा भी करीब-करीब दोगुनी हो गयी है.

वहीं, कुछ ऐसे भी जिले हैं, जहां उत्पाद विभाग ने छापेमारी तो अधिक की है, लेकिन गिरफ्तारी व मुकदमो की संख्या कम है. मसलन अरवल जिले में मार्च से अक्तूबर तक 1744 छापेमारी हुई, लेकिन मात्र 98 लोगों पर मुकदमा चला व 137 लोग जेल भेजे गये. औरंगाबाद में 1955 छापेमारी हुई, लेकिन मात्र 160 मुकदमे हुए और 158 लोग जेल भेजे गये हैं. इसी प्रकार किसी भी जिले में 772 से अधिक मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है,जबकि छापेमारी का आंकड़ा न्यूनतम एक हजार और अधिकतम पांच हजार से अधिक है.

अरवल जिले में मार्च से अक्तूबर तक 1744 छापेमारी हुई

पटना में 11 हजार चार सौ 24 छापेमारी व 710 लोगों की गिरफ्तारी हुई

आंकड़े में बरामदगी

प्रकार 2018-19 2019-20 (अक्तूबर तक)

देशी शराब 176052.6 लीटर 120258.4 लीटर

स्प्रीट 117147.9 लीटर 18651.0 लीटर

विदेशी शराब 289298.7 334880 लीटर

बियर 6372 लीटर 11068 लीटर

अवैध महुआ 3189.4 लीटर 53861.9 लीटर

मसालेदार देशी शराब 13845.9 लीटर 11859.1 लीटर

ताड़ी 19469 लीटर 8232.9 लीटर

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