नागरिकता बिल : जदयू में अनुकंपा पर आये थे प्रशांत किशोर, पार्टी लाइन पसंद नहीं, तो रास्ता देख लें : आरसीपी सिंह

By Prabhat Khabar Digital Desk
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पटना : जदयू के राष्ट्रीय महासचिव सह राज्यसभा में पार्टी के नेता आरसीपी सिंह ने नागरिकता संशोधन विधयेक पर पार्टी के स्टैंड पर सवाल उठाने वाले प्रशांत किशोर पर शुक्रवार को जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर जदयू में अनुकंपा पर आये थे. अब पार्टी के कुछ नहीं हैं.
पार्टी में अभी राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव हुआ है और उसके बाद नयी कमेटी नहीं बनी है. लिहाजा न कोई उपाध्यक्ष है और न ही महासचिव. प्रशांत किशोर तो जदयू के सदस्य भी नहीं हैं. आरसीपी ने ये बातें जदयू प्रदेश मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत में कहीं. आरसीपी सिंह ने कहा कि प्रशांत किशोर सक्रिय सदस्य भी नहीं बने हैं. वह बिहार में पार्टी के लिए कहीं नहीं गये. पार्टी ने मान-सम्मान दिया और उसी पार्टी के साथ गद्दारी कर रहे हैं. वह पार्टी के कुछ नहीं है. ट्वीट करने और लेख लिखने से कुछ नहीं होने वाला है. उन्होंने कहा कि पार्टी प्रशांत किशोर पर कोई कार्रवाई करने नहीं जा रही है.
पार्टी के स्टैंड का किया था विरोध : दरअसल जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहे प्रशांत किशोर ने नागरिकता संशोधन बिल को पार्टी द्वारा समर्थन देने का विरोध किया है. वह तीन दिनों से ट्वीट कर इस संबंध में पार्टी को पुनर्विचार की अपील कर रहे हैं. पार्टी के वरीय नेता पवन कुमार वर्मा और विधान पार्षद गुलाम रसूल बलियावी ने भी इस विधेयक पर पार्टी के स्टैंड पुनर्विचार की अपील की थी.
जदयू में अभी न कोई उपाध्यक्ष है और न ही कोई महासचिव
इसके साथ ही आरसीपी सिंह ने नागरिकता संशोधन बिल का विरोध कर रहे दूसरे जदयू नेताओं को साफ-साफ कहा कि पार्टी लाइन पसंद नहीं है तो अपना रास्ता देख लें. नागरिकता संशोधन विधेयक क्या है और उसमें क्या व्यवस्था है, ये बहुत लोगों को पता ही नहीं है. जदयू को नये बिल की समझ है, इसलिए इसका समर्थन किया गया है.
प्रशांत किशोर ने फिर किया ट्वीट, कहा- अन्य गैर भाजपा सीएम भी अपना रुख साफ करें
प्रशांत किशाेर ने शुक्रवार को एक बार फिर ट्वीट करते हुए नागरिकता संशोधन बिल व एनआरसी पर गैर भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से अपना रुख साफ करने को कहा है. उन्होंने लिखा, 'संसद में बहुमत साबित हो चुका है. न्यायपालिका से इतर देश की आत्मा को बचाने की जिम्मेदारी अब 16 गैर भाजपा मुख्यमंत्रियों पर है.
ये वे राज्य हैं, जिन्हें इन कानूनों को लागू करना है. प्रशांत किशोर ने आगे लिखा, 'तीन मुख्यमंत्रियों (पंजाब, केरल और पश्चिम बंगाल) ने नागरिकता संशोधन बिल और एनआरसी का विरोध किया है. अब वक्त आ गया है कि बाकी मुख्यमंत्री इस पर अपना रुख साफ करें.
2020 में चुनावी मुद्दा होगा 15 साल बनाम 15 साल
आरसीपी सिंह ने कहा कि 2020 में चुनावी मुद्दा 15 साल बनाम 15 साल होगा. जनता अच्छी तरह जानती है कि नीतीश के शासन के पहले व बाद के बिहार में क्या अंतर है.
इधर राजद ने 21 िदसंबर को बुलाया बिहार बंद
पटना. राजद ने नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ 21 दिसंबर को बिहार बंद बुलाया है. पार्टी नेता तेजस्वी प्रसाद यादव ने शुक्रवार की रात बयान जारी कर इसका एलान किया.
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