सीएम व किसी भी मंत्री को नौकरी में नियुक्ति का अधिकार नहीं : हाइकोर्ट

Updated at : 21 Nov 2019 4:08 AM (IST)
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सीएम व किसी भी मंत्री को नौकरी में नियुक्ति का अधिकार नहीं : हाइकोर्ट

पटना :पटना हाइकोर्ट ने अपने एक आदेश में स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री सहित किसी भी मंत्री को किसी भी व्यक्ति को नौकरी में बहाल करने तथा बहाली के लिए अनुशंसा करने का कोई अधिकार नहीं है. कोर्ट ने कहा कि उन्हें ऐसी कार्रवाई करने का अधिकार न तो संविधान देता है और न ही […]

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पटना :पटना हाइकोर्ट ने अपने एक आदेश में स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री सहित किसी भी मंत्री को किसी भी व्यक्ति को नौकरी में बहाल करने तथा बहाली के लिए अनुशंसा करने का कोई अधिकार नहीं है. कोर्ट ने कहा कि उन्हें ऐसी कार्रवाई करने का अधिकार न तो संविधान देता है और न ही कोई कानूनी प्रावधान ही इस संबंध में है.

कोर्ट ने इन लोगों की अनुशंसा पर बहाल किये गये कर्मी को सेवा से निकाले जाने के आदेश पर किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने से इन्कार करते हुए उनकी याचिका को खारिज कर दिया. न्यायमूर्ति चक्रधारी शरण सिंह की एकलपीठ ने गंगा देवी की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया.
आरोपित हरेश मिश्रा की जमानत अर्जी खारिज
पटना . पटना हाइकोर्ट ने भाजपा के पूर्व उपाध्यक्ष विशेश्वर ओझा हत्याकांड के अभियुक्त हरेश मिश्रा की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया. न्यायमूर्ति हेमंत कुमार श्रीवास्तव की एकलपीठ ने हरेश मिश्र की ओर से दायर जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद उसे खारिज करते हुए ट्रायल की निर्देश दिया कि ट्रायल प्रक्रिया को जल्द पूरा कर लिया जाये. कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए केस डायरी की मांग की थी. केस डायरी आ जाने के बाद सुनवाई हुई जिसके बाद कोर्ट ने यह आदेश दिया.
शौचालय घोटाले में जमानत याचिका खारिज
पटना. पटना हाइकोर्ट ने शौचालय घोटाले के अभियुक्त और आदि सेवा शक्ति संस्थान के कोषाध्यक्ष सुमन सिंह की जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद बुधवार को खारिज कर दिया. कोर्ट ने वैसे सभी अभियुक्तों को जिन्हें इस घोटाले में जमानत मिली है, उन्हें नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों नहीं उनकी जमानत को रद्द कर दिया जाये. मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय करोल की एकलपीठ ने सुमन सिंह द्वारा जमानत याचिका पर सुनवाई की.
जमानत अर्जियों पर सुनवाई में थानाप्रभारी रहें उपस्थित
पटना. पटना हाइ कोर्ट में बुधवार को आपराधिक मामले की सुनवाइ के दौरान मात्र चार थाना प्रभारी ही उपस्थित रहे. इसके चलते सभी न्यायालयों में केवल जमानत के मामलों पर ही सुनवाई हुई. अग्रिम और नियमित जमानत मामलों को छोड़ कर अन्य किसी मामले पर सुनवाई नहीं हुई.
राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता सूर्यदेव यादव ने राज्य के गृह सचिव और डीजीपी को पत्र भेज कर बुधवार को अग्रिम जमानत और नियमित जमानत की अर्जियों पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस के कोर्ट में संबंधित थाना प्रभारियों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने को कहा था. यादव ने पत्र में यह भी कहा था कि चीफ जस्टिस ने उन्हें इस आशय का मौखिक आदेश दिया है.
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