परमाणु बम का असर कम करने के लिए शोध की करते थे बात
Updated at : 15 Nov 2019 5:43 AM (IST)
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चंदन, मधेपुरा : विजिटिंग प्रोफेसर बनाकर महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह को भूपेंद्र नारायण मंडल विवि ने सम्मानित करने की एक नजीर पेश की थी. 17 अप्रैल, 2013 को भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय ने इतिहास बनते देखा. डा वशिष्ठ नारायण सिंह ने भी विवि के विजिटिंग प्रोफेसर बनने पर खुशी जाहिर की. उन्होंने कहा कि […]
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चंदन, मधेपुरा : विजिटिंग प्रोफेसर बनाकर महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह को भूपेंद्र नारायण मंडल विवि ने सम्मानित करने की एक नजीर पेश की थी. 17 अप्रैल, 2013 को भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय ने इतिहास बनते देखा. डा वशिष्ठ नारायण सिंह ने भी विवि के विजिटिंग प्रोफेसर बनने पर खुशी जाहिर की.
उन्होंने कहा कि यह सुखद अनुभूति है. उन्होंने विवि के गेस्ट हाउस में कहा था कि परमाणु बम के असर को कम करने के लिए थोड़ा और शोध की जरूरत है. 17 अप्रैल, 2013 को उन्होंने बीएन मंडल विवि में योगदन दिया था. गेस्ट हाउस में वशिष्ठ ने अधलेटे ही सबसे बातें कीं. उन्होंने आकाश को निहारते हुए कहा कि गणितज्ञ रामानुजम हमारे समकालीन थे. ख्यालों में लगातर खोये रहते हुए उन्होंने वीसी से ब्लैकबोर्ड एवं छात्रों की मांग की.
कुलपति ने बताया था कि वे 18 अप्रैल, 2013 को अपने घर के लिये रवाना हो जायेंगे. सात दिन बाद यहां फिर लौट कर स्थायी तौर पर रहेंगे. फिलवक्त उनके लिए कोई कक्षा आयोजित नहीं की गयी. वह जब अपने घर से वापस आयेंगे, तब वे कक्षा लेंगे. उनकी कक्षा में यह खास ध्यान रखा जायेगा कि उच्च स्तरीय ज्ञान रखने वाले छात्र, रिसर्च स्कालर और प्रोफेसर ही शामिल हों. वशिष्ठ बाबू बार-बार कॉपी पर कुछ लिख रहे थे. लेकिन, उनकी लिखावट अस्पष्ट थी.
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