बापू की 150वीं जयंती पर रिहा किये जायेंगे बिहार की जेलों में बंद 26 कैदी

Updated at : 02 Oct 2019 8:04 AM (IST)
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बापू की 150वीं जयंती पर रिहा किये जायेंगे बिहार की जेलों में बंद 26 कैदी

पटना: इस वर्ष दो अक्तूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के मौके पर बिहार की विभिन्न जेलों में बंद 26 कैदियों को रिहा किया जायेगा. इसके लिए निर्धारित तमाम मानकों को ध्यान में रखते हुए इनके नामों का प्रस्ताव राज्य सरकार ने तैयार कर लिया है. इस पर गृह (कारा) विभाग के स्तर […]

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पटना: इस वर्ष दो अक्तूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के मौके पर बिहार की विभिन्न जेलों में बंद 26 कैदियों को रिहा किया जायेगा. इसके लिए निर्धारित तमाम मानकों को ध्यान में रखते हुए इनके नामों का प्रस्ताव राज्य सरकार ने तैयार कर लिया है. इस पर गृह (कारा) विभाग के स्तर से आदेश जारी कर दिया गया है. बापू की 150वीं जयंती के मौके पर तीन चरणों में राज्य के चुनिंदा कैदियों को छोड़ने की नीति केंद्रीय गृह मंत्रालय ने तैयार की थी. इसके तहत इस बार यह तीसरा और अंतिम चरण है. पहले चरण में पिछले वर्ष गांधी जयंती के मौके पर 18 कैदी और दूसरे चरण के तहत जून 2019 में करीब 45 कैदी रिहा किये जा चुके हैं.

इसी क्रम में तीसरे चरण के तहत इस बार 26 कैदियों को छोड़ने के साथ ही यह योजना पूरी हो जायेगी. इस तरह राज्य के विभिन्न जेलों से 89 कैदियों की बची हुई सजा को माफ करते हुए वे रिहा हो जायेंगे. इसमें बड़ी संख्या में 14 साल की सजा पूरा करने वाले कैदियों की भी है. इस योजना के तहत छोटे-मोटे अपराध के लिए जेल में बंद उन कैदियों को माफी दी जायेगी, जिन्होंने अपनी कुल सजा का दो-तिहाई या 66 प्रतिशत समय काट लिया है.

कैदियों का व्यवहार सजा के दौरान जेल में कैसा रहा, उसकी मानसिक और शारीरिक स्थिति क्या है, जैसे तमाम पहलुओं को ध्यान में रखते हुए इनका चयन किया जायेगा. इसके अलावा 55 वर्ष से अधिक उम्र की वृद्ध महिला, जिसने अपनी 50 फीसदी या आधी सजा और 60 वर्ष से अधिक उम्र के वृद्ध व्यक्ति, जिन्होंने 50 फीसदी सजा काट ली हो, उन्हें भी इसमें शामिल किया गया है.

इन्हें नहीं छोड़ा जायेगा
किसी भी उम्र का कोई कैदी जो उम्र कैद या 20 वर्ष या 14 वर्ष की सजा काट रहा हो, उसे इस योजना में शामिल नहीं किया जायेगा. इसके अलावा पॉस्को, देशद्रोह, रेप, यूएपीए, दहेज उत्पीड़न, मादक द्रव्यों की तस्करी (एनडीपीएस), वित्तीय घोटाले या अनियमितता, हत्या, डकैती जैसे अन्य गंभीर आपराधिक मामलों में कितने भी समय की सजा काटने वाले कैदियों को शामिल नहीं किया गया है.

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