डेंटल डॉक्टर्स नियुक्ति : पास अभ्यर्थी फेल, फेल हुई पास

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 03 Sep 2019 6:23 AM

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रविशंकर उपाध्याय 558 डेंटल डॉक्टर्स की नियुक्ति के लिए मार्च 2015 में मांगा गया आवेदन पटना : सूबे में 558 डेंटल डॉक्टर्स की नियुक्ति प्रक्रिया में कई चूक और गड़बड़ियां सामने आ रही हैं. इसमें पिछले साल जो रिजल्ट जारी किया गया उसमें पास कैंडिडेट फेल हुए और फेल कैंडिडेट पास कर दिये गये. यही […]

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रविशंकर उपाध्याय
558 डेंटल डॉक्टर्स की नियुक्ति के लिए मार्च 2015 में मांगा गया आवेदन
पटना : सूबे में 558 डेंटल डॉक्टर्स की नियुक्ति प्रक्रिया में कई चूक और गड़बड़ियां सामने आ रही हैं. इसमें पिछले साल जो रिजल्ट जारी किया गया उसमें पास कैंडिडेट फेल हुए और फेल कैंडिडेट पास कर दिये गये.
यही नहीं 13 वर्षों से राज्य सरकार के अस्पतालों में काम कर रहे संविदा दंत चिकित्सकों को साक्षात्कार में जीरो से लेकर 3 नंबर तक दिये गये. राज्य में 35 साल बाद स्थायी डेंटल सर्जन की नियुक्ति को लेकर विज्ञापन निकाले गये थे, रिजल्ट भी जारी कर दिया गया लेकिन नियुक्ति से पहले ही मामले में गड़बड़ियों के प्रमाण सामने आ रहे हैं. इस मामले में प्रभात खबर के पास कई प्रमाण मौजूद हैं.
ऐसी-ऐसी गड़बड़ियां और चूक
पहली बड़ी गड़बड़ी तो यह है कि 29 सितंबर 2018 को बिहार लोक सेवा आयोग के द्वारा रिजल्ट जारी किया गया था, लेकिन इसके तीन महीने पहले 29 जून 2018 को ही डेंटल डॉक्टरों के बीच टॉपर और सेकेंड टॉपर की जानकारी फैल गयी थी.
यही नहीं पल्लवी नामक कैंडिडेट का आयोग ने रिजल्ट जारी होने के 106 दिनों बाद परीक्षाफल यह बताकर रद्द कर दिया गया कि कैंडिडेट ओबीसी की महिला उम्मीदवार है, जबकि महिला का रिजल्ट इबीसी श्रेणी में दे दिया गया था. मेरिट लिस्ट में फेल हुई कैंडिडेट तूलिका रानी को साढ़े 3 महीने बाद पास कर दिया गया. एक कैंडिडेट अविनाश कुमार जो मेरिट लिस्ट में असफल था उसे रिजल्ट प्रकाशन के 10 माह बाद पास कर दिया गया.
यह बताते हुए कि उसके अनुभव कार्य के लिए दिये गये अंको की गिनती में भूल हुई थी. इसके साथ ही 8 से लेकर 13 सालों से सरकारी अस्पतालों में दंत चिकित्सकों के रूप में काम कर रहे डॉक्टरों को जीरो से लेकर तीन अंक ही दिये गये.
क्या है मामला?
स्थायी डेंटल सर्जन की नियुक्ति का जिम्मा सरकार ने बीपीएससी को दिया था. आयोग ने 558 चिकित्सकों की बहाली के लिए विज्ञापन मार्च 2015 में निकाला. इसमें राज्य के संविदा दंत चिकित्सक के अलावे बीडीएस और पीजी डिग्री वाले कैंडिडेट शामिल हुए थे.
इसमें बहाली की प्रक्रिया एकमात्र साक्षात्कार ही थी. साक्षात्कार में राज्य भर के 350 संविदा दंत चिकित्सक समेत कुल 1833 कैंडिडेट शामिल हुए थे. साक्षात्कार के बाद बीपीएससी ने 552 कैंडिडेट का मेरिट लिस्ट 29 सितंबर 2018 को जारी किया था. जिसमें 280 संविदा चिकित्सक भी सफल हुए थे और 73 संविदा दंत चिकित्सक इसमें असफल घोषित हुए थे.
क्या कहते हैं डेंटल डॉक्टर?
हमलोग ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरों में स्थित सरकारी अस्पतालों में आठ से तेरह वर्षों से काम कर रहे हैं. इसके बावजूद हमें साक्षात्कार में जीरो अंक दिये गये हैं. हम अपनी फरियाद हर जगह गये लेकिन कहीं से न्याय नहीं मिला. गड़बड़ियों को लेकर अंतत: अक्तूबर 2018 में हम हाईकोर्ट की शरण में गये हैं.
-डॉ आयुष शरण, सचिव, बिहार राज्य दंत चिकित्सक संघर्ष मोर्चा
क्या कहते हैं पदाधिकारी?
पारदर्शी प्रक्रिया का पालन हुआ है. साक्षात्कार कमेटी करती है. एक आदमी तो इंटरव्यू लेता नहीं है, तीन चार लोग इंटरव्यू लेते हैं. कोई जवाब नहीं देगा तो नंबर कितना मिलेगा. हमलोग इस मामले में कोर्ट में अपना पक्ष रख रहे हैं. कोर्ट ने कहीं कोई रोक नहीं लगायी है.
-अमरेंद्र कुमार, परीक्षा नियंत्रक, बीपीएससी
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