बिहटा : ट्रक ने ली मां-बेटे की जान, बाल-बाल बचे पिता
Updated at : 29 Aug 2019 8:57 AM (IST)
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आरा से पति व सात वर्षीय मासूम पुत्र के साथ स्कूटी से मायके दीघा जा रही थी महिला बिहटा : बुधवार को थाना क्षेत्र के पटना-आरा एनएच 30 पर मौर्या मोटर्स सिकंदरपुर के समीप ट्रक से कुचल कर मां-बेटे की दर्दनाक मौत हो गयी. इस हृदयविदारक घटना में पिता बाल-बाल बच गये. मृतक महिला आरा […]
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आरा से पति व सात वर्षीय मासूम पुत्र के साथ स्कूटी से मायके दीघा जा रही थी महिला
बिहटा : बुधवार को थाना क्षेत्र के पटना-आरा एनएच 30 पर मौर्या मोटर्स सिकंदरपुर के समीप ट्रक से कुचल कर मां-बेटे की दर्दनाक मौत हो गयी. इस हृदयविदारक घटना में पिता बाल-बाल बच गये. मृतक महिला आरा से पति व सात वर्षीय इकलौते पुत्र के साथ स्कूटी से मायका दीघा (दानापुर) कार्यक्रम में हिस्सा लेने जा रही थी. मृतका की पहचान आरा के जगदेव नगर वार्ड 42 निवासी अभिषेक रंजन उर्फ बंटी कुमार की 28 वर्षीया पत्नी संध्या उर्फ जूही कुमारी व उसके पुत्र अभिराज रंजन के रूप में की गयी है.
पुलिस ने मां-बेटे के शव को पोस्टमार्टम के लिए अनुमंडलीय अस्पताल दानापुर भेज दिया है. पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त स्कूटी व ट्रक को कब्जे में ले लिया है. जबकि ट्रक का चालक फरार हो गया है. इस मामले में आरा के जगदेव नगर निवासी स्वर्गीय बिनोद कुमार के पुत्र व मृतका के पति अभिषेक रंजन उर्फ बंटी कुमार ने बताया कि वह पत्नी जूही व पुत्र अभिराज रंजन के साथ पटना के दीघा में ससुराल में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने जा रहे थे. एनएच 30 पर जैसे ही वह मौर्या मोटर्स के पास पहुंचे पीछे से तेज गति से आ रहे दस चक्का ट्रक उनकी स्कूटी में टक्कर मार दी. दुर्घटना में उनकी पत्नी व पुत्र सड़क पर गिर पड़े और ट्रक दोनों को कुचल दिया. घटना को अंजाम देकर चालक आगे ट्रक लगाकर भाग निकला.
इस घटना में उनकी पत्नी की मौत घटना स्थल पर ही हो गयी. स्थानीय लोगों के सहयोग के पुत्र को आनन-फानन लेकर रेफरल अस्पताल ले गये, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया. इस हृदयविदारक घटना की सूचना मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया. थानाध्यक्ष अवधेश कुमार झा ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि ट्रक को जब्त कर लिया गया है. परिजन की लिखित शिकायत पर आगे की कार्रवाई की जा रही है.
पिता ने कहा, उजड़ गयी दुनिया, बड़ा होनहार था पुत्र
पत्नी व इकलौते पुत्र को एक साथ खोने के गम में बदहवास बंटी कुमार का रो-रोकर हाल खराब था. उसका कहना था ईश्वर उसे किस लिए जिंदा बचा लिया. उसकी तो दुनिया ही उजड़ गयी है. अब उसको भी जिंदा रहने से कोई फायदा नहीं है.
वह कक्षा तीन में पढ़ने वाले अपने पुत्र को अगले माह शिमला के एक स्कूल में पढ़ाई के लिए नामांकन कराने वाले थे. दानापुर अपनी ससुराल के रिश्तेदार के यहां एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने जा रहे थे. उन्हें क्या पता था कि उनके कलेजा का टुकड़ा जीवन संगिनी का साथ छूट जायेगा. उनकी चीत्कार से आम लोग भी गमगीन हो उठे. इस घटना को जिसने भी देखा सुना, सबकी आंखें छलक पड़ी.
लोगों की जुबान पर सिर्फ यही था कि इस तरह का दुःख किसी पर कभी न पड़े. घटना के बाद मृतका के मायके में होने वाला कार्यक्रम गम में बदल गया है. परिजनों व मायका वालों का रो-रोकर हाल खराब था.
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